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मौत का एक्सप्रेस-वे! एक साथ 8 बसें बनीं 'अग्नि-कुंड', 13 ज़िंदा जले; कोहरा या काल?

by admin@bebak24.com on | 2025-12-17 08:42:08

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मौत का एक्सप्रेस-वे! एक साथ 8 बसें बनीं 'अग्नि-कुंड', 13 ज़िंदा जले; कोहरा या काल?


यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, 100 से ज़्यादा घायल

मथुरा। मंगलवार की सुबह यमुना एक्सप्रेसवे पर एक ऐसा दृश्य दिखा, जिसे देखकर हर कोई कांप उठा। कोहरे की चादर ने सड़कों को छिपाया, लेकिन जो सामने आया वह 'मौत का तांडव' था। बलदेव क्षेत्र में माइलस्टोन 127 के पास, शून्य दृश्यता के बीच एक के बाद एक कुल सात डबल डेकर बसों और एक रोडवेज बस ने आपस में टक्कर मार दी। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका—पीछे से आईं तीन कारें भी इस 'दुर्घटना की जंजीर' में फंस गईं।

​> चीख-पुकार और आग की लपटें: टक्कर होते ही, किसी भयावह विस्फोट की तरह, बसें धू-धू कर जल उठीं। देखते ही देखते आठ बसें पूरी तरह राख में बदल गईं, मानो वे कभी थीं ही नहीं। यात्री, जो अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रहे थे, आग की लपटों के बीच फंस गए। खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश में लगे यात्रियों की चीख-पुकार से पूरा एक्सप्रेसवे गूंज उठा।

​इस दिल दहला देने वाले हादसे में 13 लोग दर्दनाक मौत के शिकार हो गए। मरने वालों में अधिकतर की मौत जलने से हुई है। 100 से अधिक घायल यात्रियों को मथुरा, वृंदावन और आगरा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। आग की भयावहता का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि इसे बुझाने के लिए 15 दमकल गाड़ियों को दो घंटे तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

मरने वालों में भाजपा नेता भी: मृतकों में प्रयागराज के भाजपा नेता और रेलवे बोर्ड के सदस्य अखिलेंद्र प्रताप यादव भी शामिल हैं। शवों की पहचान के लिए अब डीएनए जांच ही एकमात्र रास्ता है।

सवाल एक्सप्रेसवे पर: यह हादसा सिर्फ़ कोहरे के कारण हुआ या एक्सप्रेसवे के प्रबंधन में भी कोई चूक थी? क्या एक्सप्रेसवे कोहरे के लिए तैयार था? ये वो सवाल हैं, जिनका जवाब जांच कमेटी को जल्द से जल्द देना होगा।



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