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यूपी में 100 विधायकों के टिकट पर खतरा, भाजपा नए चेहरों पर लगाएगी दांव

by admin@bebak24.com on | 2026-10-03 13:30:44

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यूपी में 100 विधायकों के टिकट पर खतरा, भाजपा नए चेहरों पर लगाएगी दांव

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संभावित उम्मीदवारों के चयन की तैयारी तेज कर दी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी इस बार करीब 100 मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है। आंतरिक सर्वेक्षण में जिन विधायकों की जनता के बीच पकड़ कमजोर पाई जाएगी, उनके स्थान पर नए चेहरों को मौका देने पर विचार किया जा रहा है।

जनाधार और जनता की राय पर जोर

सूत्रों के अनुसार, पार्टी विधानसभा क्षेत्रवार सर्वेक्षण करा रही है। इसमें विधायकों की जनता के बीच पकड़, स्थानीय संगठन के साथ संबंध और लगातार कई वर्षों से विधायक रहने के कारण पैदा हुए असंतोष जैसे पहलुओं को देखा जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ विधायकों के स्थानीय पदाधिकारियों के साथ मतभेद भी सामने आए हैं। पार्टी ने विधायकों के बारे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी राय ली है। इन सभी पहलुओं के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

युवाओं को मिल सकता है मौका

पार्टी इस बार नए और युवा चेहरों को भी अवसर देने पर विचार कर रही है। लंबे समय से विधायक रहे नेताओं के स्थान पर ऐसे उम्मीदवारों को आगे लाने की तैयारी है, जिनकी क्षेत्र में जनता के बीच मजबूत पकड़ हो।

पार्टी के सामने लगातार दो कार्यकाल की सरकार के बाद विधायकों के प्रति पैदा हुए असंतोष को भी ध्यान में रखने की चुनौती है। हालांकि, जिन विधायकों ने अपना जनाधार मजबूत बनाए रखा है और जिनकी दोबारा जीत की संभावना मानी जा रही है, उनके लगातार विधायक रहने को अकेले टिकट काटने का आधार नहीं माना जाएगा।

2024 का अनुभव भी ध्यान में

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की उत्तर प्रदेश में सीटें 62 से घटकर 33 रह गई थीं। पार्टी ने पहले के 49 सांसदों को दोबारा टिकट दिया था, जिनमें से 27 चुनाव हार गए थे।

इसी अनुभव को देखते हुए विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन को लेकर अधिक सावधानी बरती जा रही है। पार्टी यह देख रही है कि मौजूदा विधायक क्षेत्र में जनता के बीच कितने प्रभावी हैं और उनकी दोबारा जीत की संभावनाएं कैसी हैं।

सामाजिक समीकरण भी चुनौती

भाजपा के सामने उम्मीदवार चयन के साथ सामाजिक समीकरण साधने की भी चुनौती है। रिपोर्टों में सवर्ण मतों में बिखराव की बात कही गई है, जबकि दलित मतदाताओं पर भी पार्टी का ध्यान रहने की संभावना जताई गई है।

वहीं, समाजवादी पार्टी पिछड़े, दलित और आदिवासी मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। ऐसे में भाजपा के लिए मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन, जनाधार और सामाजिक समीकरण के आधार पर उम्मीदवारों का चयन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बेबाक24 टेक: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के संभावित टिकट बदलाव को लेकर चर्चा तेज है। अंतिम उम्मीदवारों का फैसला पार्टी के सर्वेक्षण, संगठनात्मक आकलन और चुनावी रणनीति के आधार पर होने की बात कही जा रही है।



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