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उदय कोटक की चेतावनी: ब्याज दरों में तेज उतार-चढ़ाव के लिए रहें तैयार

by admin@bebak24.com on | 2026-09-02 14:12:10

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उदय कोटक की चेतावनी: ब्याज दरों में तेज उतार-चढ़ाव के लिए रहें तैयार

मुंबई | बेबाक24 न्यूज़

दुनिया के प्रमुख वित्तीय बाजारों में सरकारी कर्ज और बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने के बीच कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने ब्याज दरों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। जापान और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में सरकारी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

उदय कोटक ने सामाजिक माध्यम पर साझा टिप्पणी में कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के सरकारी ऋण पर प्रतिफल बढ़ रहा है और बाजार को ब्याज दरों में अचानक होने वाले बदलावों के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके अनुसार, बढ़ता सरकारी कर्ज और राजकोषीय दबाव आने वाले समय में वित्तीय बाजारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

अमेरिका और जापान में बढ़ा सरकारी बॉन्ड प्रतिफल

उदय कोटक ने अमेरिका और जापान के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के आंकड़ों का उल्लेख किया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल करीब 4.81 प्रतिशत और जापान में 3.02 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल बढ़ना इस बात का संकेत है कि निवेशक अधिक प्रतिफल की मांग कर रहे हैं। इसका असर दूसरे वित्तीय बाजारों और देशों की उधारी लागत पर भी पड़ सकता है।

बढ़ता सरकारी कर्ज बनी बड़ी चिंता

उदय कोटक ने ब्याज दरों में संभावित अस्थिरता को बढ़ते सरकारी कर्ज और बजट घाटे से जोड़ा है। उनका तर्क है कि जब सरकारों की उधारी लगातार बढ़ती है तो केंद्रीय बैंकों पर मौद्रिक नीति को लेकर दबाव बढ़ता है।

ऐसी स्थिति में यदि केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए अपनी बैलेंस शीट का विस्तार करते हैं, तो लंबे समय में मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप ब्याज दरों में भी तेज बदलाव देखने को मिल सकता है।

भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

अमेरिका और जापान जैसे विकसित देशों में सरकारी बॉन्ड पर बढ़ता प्रतिफल भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए महत्वपूर्ण है। सुरक्षित और अपेक्षाकृत बेहतर प्रतिफल देने वाले विकसित बाजार विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में भारत सहित उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी का दबाव बढ़ सकता है।

विदेशी निवेश में कमी आने पर भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने के साथ ऋण बाजार पर भी असर पड़ सकता है। घरेलू स्तर पर भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल करीब 6.96 प्रतिशत दर्ज किया गया है। वहीं 5 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल 6.59 प्रतिशत और 30 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल 7.56 प्रतिशत के आसपास है।

अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भी बढ़ी यील्ड

सरकारी कर्ज का दबाव केवल अमेरिका और जापान तक सीमित नहीं है। यूरोप में ब्रिटेन के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल करीब 5.22 प्रतिशत, जर्मनी का 3.34 प्रतिशत और फ्रांस का 4.21 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

इसके विपरीत चीन के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल करीब 1.69 प्रतिशत पर बना हुआ है। अलग-अलग देशों में ब्याज दरों और सरकारी ऋण की स्थिति में अंतर के कारण वैश्विक पूंजी का प्रवाह भी प्रभावित हो सकता है।

निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह संकेत?

बॉन्ड प्रतिफल में तेज बढ़ोतरी का असर केवल सरकारी ऋण बाजार तक सीमित नहीं रहता। इससे कंपनियों और सरकारों के लिए उधारी महंगी हो सकती है, जबकि शेयर बाजार में जोखिम के प्रति निवेशकों की धारणा बदल सकती है।

उदय कोटक की चेतावनी का मुख्य संकेत यही है कि वैश्विक बाजार फिलहाल स्थिर ब्याज दरों के दौर से अलग चरण में प्रवेश कर रहे हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए ब्याज दरों, सरकारी कर्ज, मुद्रास्फीति और विदेशी पूंजी के प्रवाह पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।



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