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रामदेव बोले- ‘बच्चे आंदोलन करेंगे तो पढ़ेंगे कब?’, अराजक प्रदर्शन का किया विरोध

by admin@bebak24.com on | 2026-08-17 16:04:39

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रामदेव बोले- ‘बच्चे आंदोलन करेंगे तो पढ़ेंगे कब?’, अराजक प्रदर्शन का किया विरोध

नई दिल्ली: योग गुरु रामदेव ने बच्चों के आंदोलनों में शामिल होने को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बच्चों को आंदोलन में नहीं धकेलना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलनों के समर्थन में हैं, लेकिन अराजकता का समर्थन नहीं करते।

रामदेव ने रविवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि देश के बचपन को आंदोलन की राजनीति से दूर रखना जरूरी है। उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े सवालों के समाधान की भी जरूरत बताई।

‘बच्चा पढ़ेगा कब?’

रामदेव ने कहा कि अगर कोई बच्चा प्राथमिक विद्यालय में पढ़ रहा है और उसे आंदोलन में शामिल कर दिया जाता है, तो उसकी पढ़ाई का क्या होगा।

उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को थाने, सड़क या प्रशासनिक अधिकारियों के घेराव जैसे प्रदर्शनों में भेजना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, बच्चों को आंदोलन की वास्तविक प्रकृति और उसके उद्देश्यों की भी पूरी समझ नहीं होती।

‘शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन करता हूं’

रामदेव ने कहा कि वह हर तरह के आंदोलन के खिलाफ नहीं हैं। उनके मुताबिक, संवैधानिक, लोकतांत्रिक और नैतिक मूल्यों पर आधारित शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतंत्र का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि देश को अराजक आंदोलन की जरूरत नहीं है, लेकिन शांतिपूर्ण आंदोलन ने भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

शिक्षा और चिकित्सा के सवालों का समाधान जरूरी

रामदेव ने कहा कि देश की शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल मौजूद हैं और इनका समाधान किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि देश की व्यवस्था में बदलाव केवल किसी एक व्यक्ति के प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर जागरूकता जरूरी है।

पहले सरकारी नौकरियों पर भी उठाए थे सवाल

इससे पहले स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रामदेव ने देश में शिक्षा और रोजगार से जुड़ी समस्याओं पर नाराजगी जताई थी।

उन्होंने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि सरकारी नौकरियों के साक्षात्कार में 90% से 99% तक घोटाला होता है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई विस्तृत आंकड़ा या स्रोत सार्वजनिक नहीं किया।

बच्चों के आंदोलनों पर बहस के बीच आया बयान

रामदेव का यह बयान ऐसे समय आया है जब विभिन्न राज्यों में शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्र और युवा आंदोलन कर रहे हैं।

उनके बयान से एक ओर बच्चों को राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों से दूर रखने की बहस सामने आई है, वहीं दूसरी ओर शांतिपूर्ण विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार और बच्चों की भागीदारी की सीमा को लेकर भी चर्चा तेज हो सकती है।

बेबाक24 न्यूज़: रामदेव ने बच्चों को आंदोलनों में शामिल करने का विरोध करते हुए कहा है कि उन्हें पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक और शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन आंदोलन के नाम पर अराजकता स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।



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