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‘दिमाग़ी नक्सल’ पर चिदंबरम का पलटवार, बोले- ‘गर्व है’; बीजेपी ने उनके गृह मंत्री कार्यकाल पर उठाए सवाल

by on | 2026-08-17 15:00:24

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‘दिमाग़ी नक्सल’ पर चिदंबरम का पलटवार, बोले- ‘गर्व है’; बीजेपी ने उनके गृह मंत्री कार्यकाल पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमाग़ी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि उन्हें ‘दिमाग़ी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व है। उनके इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने चिदंबरम पर हमला बोलते हुए उनके गृह मंत्री रहने के दौरान देश में नक्सली हिंसा के आंकड़ों और सरकार की नक्सल नीति पर सवाल उठाए हैं।

वहीं, कुछ पत्रकारों और राजनीतिक टिप्पणीकारों ने चिदंबरम के पुराने बयानों और उनके गृह मंत्री के कार्यकाल को याद करते हुए इस पूरे विवाद में एक अलग पहलू भी सामने रखा है।

चिदंबरम ने क्यों कहा- ‘मुझे गर्व है’?

पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की ‘दिमाग़ी नक्सल’ टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस शब्द से जोड़े जाने पर गर्व है।

उनकी इस टिप्पणी के बाद भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री ने किस संदर्भ में यह शब्द इस्तेमाल किया था और चिदंबरम ने उसे अपने ऊपर क्यों लिया।

भाजपा ने चिदंबरम के कार्यकाल का रिकॉर्ड सामने रखा

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने चिदंबरम के बयान पर पलटवार करते हुए उनके गृह मंत्री रहने के दौर का उल्लेख किया।

उन्होंने दावा किया कि 2004 से 2014 के बीच नक्सली हिंसा के खिलाफ अभियानों में करीब 1913 पुलिसकर्मी और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान मारे गए तथा नक्सली हमलों में 5019 से अधिक भारतीयों की जान गई।

सांघवी ने यह भी दावा किया कि उस दौर में नक्सली हिंसा 2013 तक 182 जिलों में फैली हुई थी। उन्होंने चिदंबरम के गृह मंत्री कार्यकाल को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से विफल बताया।

हालांकि, ये आंकड़े भाजपा नेताओं द्वारा राजनीतिक बहस में प्रस्तुत किए गए दावे हैं और इनके संदर्भ तथा परिभाषाओं को अलग-अलग सरकारी आंकड़ों से मिलाकर देखना जरूरी है।

रविशंकर प्रसाद ने कहा- बयान गैर-जिम्मेदाराना

भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने चिदंबरम के बयान की आलोचना करते हुए पूछा कि वह प्रधानमंत्री की टिप्पणी का संदर्भ समझते हुए भी खुद को ‘दिमाग़ी नक्सल’ क्यों बता रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का संदर्भ सशस्त्र नक्सलवाद के बाद वैचारिक स्तर पर मौजूद कथित चुनौती से था। भाजपा का कहना है कि मोदी सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों के कारण देश में नक्सली हिंसा में बड़ी कमी आई है।

रवनीत सिंह बिट्टू का भी हमला

भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने भी चिदंबरम के गृह मंत्री कार्यकाल को निशाने पर लिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में नक्सली हिंसा का व्यापक असर था।

बिट्टू ने चिदंबरम से कहा कि उनके गृह मंत्री रहते नक्सलवाद सबसे अधिक सक्रिय था और इस मुद्दे पर उन्हें बोलने के बजाय अपने कार्यकाल के रिकॉर्ड पर ध्यान देना चाहिए।

‘दिमाग़ी नक्सल’ शब्द को लेकर भी बहस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से अपने भाषण में कहा था कि हथियारबंद नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में सफलता मिली है, लेकिन ‘दिमाग़ी नक्सल’ अब भी समाज को गलत दिशा में ले जाने और हिंसा तथा अराजकता के रास्ते खोलने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगों की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने की बात कही थी।

इसके बाद विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि ‘दिमाग़ी नक्सल’ से प्रधानमंत्री का संकेत किन लोगों की ओर था।

कांग्रेस ने कहा- राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा

कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि ‘दिमाग़ी नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले लोगों, युवाओं, बुद्धिजीवियों और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश पहले ही कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री कभी ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते थे और अब ‘दिमाग़ी नक्सल’ शब्द सामने आया है।

चिदंबरम के पुराने बयानों की भी हुई चर्चा

इस विवाद में चिदंबरम के पुराने बयानों को भी सामने लाया गया है। वर्ष 2009 में गृह मंत्री बनने के बाद उन्होंने नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के प्रमुख खतरों में शामिल किया था।

2010 में उन्होंने कहा था कि सरकार अगले 2 से 3 वर्षों में नक्सली प्रभावित इलाकों पर प्रभावी नियंत्रण हासिल करने की उम्मीद करती है। उन्होंने माओवादी हिंसा के खिलाफ राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय की बात भी कही थी।

इसी पुराने रुख को देखते हुए कुछ पत्रकारों और राजनीतिक टिप्पणीकारों ने चिदंबरम के मौजूदा बयान को विडंबनापूर्ण बताया है।

क्या चिदंबरम का बयान राजनीतिक तंज है?

चिदंबरम का ‘दिमाग़ी नक्सल होने पर गर्व’ वाला बयान मूल रूप से प्रधानमंत्री के शब्दों को पलटकर राजनीतिक व्यंग्य के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस के लिए इसका संदेश यह है कि सरकार अपने आलोचकों को ऐसे विशेषण देकर बदनाम कर रही है।

दूसरी ओर, भाजपा इसे प्रधानमंत्री की टिप्पणी को तोड़कर पेश करने और नक्सलवाद जैसे गंभीर सुरक्षा मुद्दे को राजनीतिक बचाव का विषय बनाने की कोशिश बता रही है।

बेबाक24 न्यूज़: ‘दिमाग़ी नक्सल’ शब्द को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पी. चिदंबरम के पुराने गृह मंत्री कार्यकाल, यूपीए शासन के दौरान नक्सली हिंसा और मोदी सरकार की नक्सल नीति तक पहुंच गया है। एक तरफ चिदंबरम ने इस शब्द को अपने लिए सम्मान की तरह पेश किया है, वहीं भाजपा उनके पुराने कार्यकाल के आंकड़े सामने रखकर पलटवार कर रही है।



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