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पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर जयराम रमेश का पलटवार, बोले- ‘दावे खोखले हैं’

by admin@bebak24.com on | 2026-08-16 15:29:29

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पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर जयराम रमेश का पलटवार, बोले- ‘दावे खोखले हैं’

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री उन लोगों को ‘दिमागी नक्सल’ बताते हैं जो उनकी नीतियों पर सवाल उठाते हैं या उनके दावों को चुनौती देते हैं।

जयराम रमेश ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि सामाजिक न्याय और संविधान से जुड़े मुद्दे उठाने वालों को इस तरह के नामों से संबोधित करना उचित नहीं है।

‘जो सवाल करता है, वह दिमागी नक्सल हो जाता है’

जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री के मुताबिक जो लोग उनकी सरकार का विरोध करते हैं, वे ‘दिमागी नक्सल’ हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सामाजिक न्याय की मांग करना या संविधान को लागू करने की मांग करना ‘दिमागी नक्सल’ होने का संकेत है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि राजनीतिक विरोधियों का सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और उनके मुताबिक प्रधानमंत्री को इस तरह की भाषा से बचना चाहिए।

जाति जनगणना का दिया उदाहरण

जयराम रमेश ने जाति जनगणना का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस लंबे समय से इसकी मांग करती रही थी।

उन्होंने दावा किया कि पहले केंद्र सरकार की ओर से इसे लेकर विरोध जताया गया, लेकिन बाद में प्रधानमंत्री ने जाति जनगणना कराने की घोषणा की।

जयराम रमेश ने कहा कि इसी तरह के कई मुद्दों को पहले खारिज किया जाता है और बाद में सरकार उन्हीं मांगों पर कदम उठाती है।

‘अर्बन नक्सल’ से ‘दिमागी नक्सल’ तक

जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री पहले अपने आलोचकों और राजनीतिक विरोधियों के लिए ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते थे और अब ‘दिमागी नक्सल’ शब्द सामने आया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘खान मार्केट गैंग’ और ‘जेएनयू गैंग’ जैसे शब्दों के जरिए भी सरकार के आलोचकों को निशाना बनाया जाता रहा है।

पीएम मोदी पर तीखा राजनीतिक हमला

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री के 12 वर्षों के कार्यकाल और सरकार के दावों पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लंबे समय से यह कहते आ रहे हैं कि 2014 से पहले भारत की स्थिति अलग थी और उसके बाद ‘नया भारत’ बना। जयराम रमेश ने इन दावों को ‘खोखला’ बताते हुए प्रधानमंत्री की राजनीतिक शैली की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के वादे और दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते।

पीएम मोदी ने लाल किले से क्या कहा था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में नक्सलवाद और माओवादी हिंसा का जिक्र किया था।

उन्होंने कहा था कि सशस्त्र नक्सली ताकतों के खिलाफ कार्रवाई में सफलता मिली है, लेकिन उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ऐसी ताकतें समाज को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर रही हैं।

प्रधानमंत्री ने ऐसी ताकतों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत पर जोर दिया था।

‘दिमागी नक्सल’ बना राजनीतिक बहस का नया मुद्दा

प्रधानमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस शब्द को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि राजनीतिक असहमति और सरकार की नीतियों की आलोचना को नक्सलवाद से जोड़ना लोकतांत्रिक बहस को कमजोर करता है।

वहीं, प्रधानमंत्री के समर्थकों का तर्क है कि उनका बयान सशस्त्र नक्सलवाद के खत्म होने के बाद वैचारिक स्तर पर मौजूद कथित उग्र विचारधाराओं को लेकर था।

बेबाक24 न्यूज़: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर कांग्रेस का पलटवार सामने आया है। जयराम रमेश ने इसे राजनीतिक विरोधियों को बदनाम करने की भाषा बताते हुए प्रधानमंत्री के दावों और पिछले 12 वर्षों के शासन पर भी सवाल उठाए हैं।



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