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‘वंदे मातरम्’ विवाद: बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी से माफी की मांग की, बोले- ‘लाखों शहीदों का अपमान’

by admin@bebak24.com on | 2026-08-16 12:39:13

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‘वंदे मातरम्’ विवाद: बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी से माफी की मांग की, बोले- ‘लाखों शहीदों का अपमान’

नई दिल्ली: ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के भाजपा विधायक और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के सीधे वंशज सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हुई कथित घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोनिया गांधी से भारत के नागरिकों, खासकर पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना शर्त माफी मांगने की अपील की है।

सुमित्रो चटर्जी ने अपने पत्र में ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व और स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका का उल्लेख करते हुए अरबिंदो, खुदीराम बोस, बिपिन चंद्र पाल, सरला देवी चौधरानी, बाल गंगाधर तिलक और रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़े कई ऐतिहासिक प्रसंगों का भी जिक्र किया।

‘ऐतिहासिक गलती को दोहराया गया’

सुमित्रो चटर्जी के मुताबिक, जब भारत अपनी स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ मना रहा था, उसी समय अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के पूरे संस्करण को लेकर हुई कथित घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी।

उन्होंने अपने पत्र में आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाए जाने के दौरान सोनिया गांधी की कथित बेचैनी और उसे रोकने की कोशिश ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया।

चटर्जी ने इसे एक ऐतिहासिक गलती को दोहराने जैसा बताया और कहा कि राष्ट्रीय गीत के प्रति इस तरह का रवैया स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत के संदर्भ में गंभीर विषय है।

‘लाखों शहीदों के बलिदान का अपमान’

अपने पत्र में सुमित्रो चटर्जी ने खुद को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का सीधा वंशज बताते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया था।

उन्होंने अरबिंदो का उल्लेख करते हुए कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम में शामिल अनेक क्रांतिकारियों को प्रेरित किया। चटर्जी ने दावा किया कि स्वतंत्र भारत में ‘वंदे मातरम्’ के पूरे पाठ को लेकर असहिष्णुता दिखाना लाखों शहीदों के बलिदान का अपमान है।

हालांकि, कांग्रेस या सोनिया गांधी की ओर से इस पत्र और इन आरोपों पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आजादी की लड़ाई में ‘वंदे मातरम्’ की भूमिका का जिक्र

चटर्जी ने अपने पत्र में राष्ट्रवादी नेता बिपिन चंद्र पाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बंगाल विभाजन के बाद ‘स्वदेशी’, ‘बहिष्कार’ और ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख प्रतीकों में शामिल हो गए थे।

उनका दावा है कि उस दौर में यह गीत राष्ट्रवादी आंदोलन और क्रांतिकारी गतिविधियों से गहराई से जुड़ गया था।

1905 से 1938 तक के ऐतिहासिक प्रसंग गिनाए

भाजपा विधायक ने 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरला देवी चौधरानी ने वहां ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाया था।

उन्होंने 1909 के बाल गंगाधर तिलक से जुड़े एक राजद्रोह मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें उनके समर्थकों द्वारा ‘वंदे मातरम्’ के नारे लगाए जाने की बात कही गई।

इसके अलावा उन्होंने 1938 में उस्मानिया विश्वविद्यालय में हुए राष्ट्रवादी छात्र आंदोलन का भी संदर्भ दिया और इसे स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय गीत की व्यापक भूमिका से जोड़ा।

रवींद्रनाथ टैगोर का भी किया उल्लेख

सुमित्रो चटर्जी ने 1896 में कलकत्ता में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन का उल्लेख किया, जहां रवींद्रनाथ टैगोर ने ‘वंदे मातरम्’ गाया था।

उन्होंने टैगोर से जुड़े उन ऐतिहासिक संदर्भों का भी उल्लेख किया, जिनमें गीत के प्रभाव और उसके ‘जादुई शब्दों’ की चर्चा की गई थी। चटर्जी के अनुसार, यह गीत लोगों के दिलों को छूने और बाधाओं को तोड़ने वाली राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बना।

‘वंदे मातरम्’ को लेकर पहले से जारी है विवाद

‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण को लेकर देश में पहले भी राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है। इसके कुछ पदों में धार्मिक संदर्भ होने के कारण अलग-अलग समुदायों की ओर से इसकी स्वीकार्यता को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

वहीं, इसके समर्थकों का कहना है कि यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय की कथित घटना को लेकर भाजपा की ओर से भी कांग्रेस पर लगातार निशाना साधा जा रहा है। इसी राजनीतिक माहौल में सुमित्रो चटर्जी की सोनिया गांधी से माफी की मांग सामने आई है।

बेबाक24 न्यूज़: ‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद अब स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत, राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और राजनीतिक दलों के रवैये की बहस तक पहुंच गया है। सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी से बिना शर्त माफी की मांग की है, लेकिन इस मामले में कांग्रेस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।



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