नई दिल्ली: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट ने रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए उपलब्ध पीने के पानी और बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई रेलवे स्टेशनों के वॉटर कूलरों से लिए गए पानी के नमूनों में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया।
कैग ने रेलवे के 16 जोन के 512 स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का परीक्षण किया। इनमें से 458 स्टेशनों पर एक या उससे अधिक जरूरी सुविधाओं में कमी पाई गई।
इन स्टेशनों के पानी में मिला ई. कोलाई
कैग की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला तथा पूर्व रेलवे के मधुपुर स्टेशन के वॉटर कूलरों से लिए गए पानी के नमूनों में ई. कोलाई पाया गया।
रिपोर्ट में इन नमूनों को दूषित बताया गया है।
512 में 458 स्टेशनों पर सुविधाओं की कमी
कैग के निरीक्षण में सिर्फ पीने के पानी की गुणवत्ता ही चिंता का विषय नहीं रही। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच किए गए 512 स्टेशनों में 458 पर एक या उससे अधिक जरूरी यात्री सुविधाएं पर्याप्त नहीं थीं।
इनमें पीने का पानी, बैठने की व्यवस्था, शौचालय, प्लेटफॉर्म शेल्टर, पंखे, वॉटर कूलर और साइनबोर्ड जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अधिक यात्री संख्या और अधिक आय वाले एनएसजी-1 से एनएसजी-3 श्रेणी के स्टेशनों पर भी कई कमियां मिलीं।
वॉशरूम की सफाई पर भी सवाल
कैग ने कई रेलवे स्टेशनों के वॉशरूम में अस्वच्छ परिस्थितियों का भी उल्लेख किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति रेलवे बोर्ड की ओर से निर्धारित साफ-सफाई और यात्री सुविधा संबंधी मानकों के अनुरूप नहीं थी।
कैग ने रेलवे को निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने और यात्रियों को सुरक्षित तथा स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।
ई. कोलाई कितना खतरनाक है?
ई. कोलाई एक प्रकार का बैक्टीरिया है जो मनुष्यों और जानवरों की आंतों में पाया जा सकता है। इसकी कुछ प्रजातियां बीमारी का कारण बन सकती हैं और दूषित पानी या भोजन के जरिए संक्रमण फैल सकता है।
इसके कारण दस्त, पेट दर्द, उल्टी और कुछ मामलों में गंभीर संक्रमण जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर ई. कोलाई स्ट्रेन समान रूप से घातक नहीं होता। इसलिए केवल पानी में ई. कोलाई की मौजूदगी से बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जा सकती; इसके लिए बैक्टीरिया के प्रकार और मात्रा की जानकारी जरूरी होती है।
रेलवे के लिए बड़ा स्वच्छता सवाल
कैग की रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब रेलवे देशभर के स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने और स्वच्छता पर लगातार जोर दे रहा है।
लेकिन रिपोर्ट में पानी की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं में मिली कमियां यह सवाल उठाती हैं कि क्या निर्धारित मानकों की निगरानी और उनका पालन जमीनी स्तर पर पर्याप्त रूप से हो रहा है।
बेबाक24 टेक : कैग की रिपोर्ट ने रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए उपलब्ध पीने के पानी और स्वच्छता व्यवस्था की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में 512 में से 458 स्टेशनों पर सुविधाओं में कमी और कई स्टेशनों के वॉटर कूलर के पानी में ई. कोलाई पाए जाने का उल्लेख है।