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पीएम मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर जयराम रमेश का पलटवार, बोले- ‘अब विरोधियों को कह रहे हैं दिमागी नक्सल’

by admin@bebak24.com on | 2026-08-15 14:14:24

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पीएम मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर जयराम रमेश का पलटवार, बोले- ‘अब विरोधियों को कह रहे हैं दिमागी नक्सल’

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पहले अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए ‘अर्बन नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते थे और अब उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं।

जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी को उनकी कथित राजनीतिक हताशा से जोड़ते हुए कहा कि जिन लोगों और समूहों को सरकार ऐसे नामों से संबोधित करती है, बाद में उन्हीं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को कदम उठाने पड़ते हैं।

जयराम रमेश ने क्या कहा?

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले अपने विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहते थे और अब ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं।

उन्होंने इसे प्रधानमंत्री की ‘हताशा’ का संकेत बताया और अपने संदेश में प्रधानमंत्री पर तीखा राजनीतिक हमला भी किया।

पीएम मोदी ने लाल किले से क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए नक्सलवाद और माओवादी हिंसा को दशकों पुरानी चुनौती बताया।

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने देश के बड़े हिस्से और लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया तथा सुरक्षा बलों के जवानों ने इसके खिलाफ लड़ाई में जान गंवाई।

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार के प्रयासों से हथियारबंद नक्सली हिंसा अब अपने अंतिम चरण में है।

‘दिमागी नक्सल’ को लेकर पीएम का बयान

प्रधानमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सली ताकतों के खिलाफ कार्रवाई में सफलता मिलने के बावजूद वैचारिक स्तर पर ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जिन्हें उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ कहा।

उन्होंने कहा कि ऐसी ताकतों की पहचान करना और उन्हें अलग-थलग करना जरूरी है।

कांग्रेस का आरोप- मुद्दों पर बाद में कदम उठाती है सरकार

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री जिन लोगों को ‘अर्बन नक्सल’ या अब ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं, उनके उठाए मुद्दों या मांगों पर सरकार बाद में कार्रवाई करती है।

कांग्रेस नेता ने इस टिप्पणी को लेकर प्रधानमंत्री की राजनीतिक शैली पर सवाल उठाया और कहा कि विरोधियों को इस तरह के शब्दों से संबोधित करना राजनीतिक असहमति को वैचारिक दुश्मनी के रूप में पेश करने की कोशिश है।

स्वतंत्रता दिवस के भाषण पर सियासत

प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस संबोधन आम तौर पर सरकार की प्राथमिकताओं और राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित रहता है। इस बार नक्सलवाद पर की गई ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी विपक्ष के निशाने पर आ गई है।

कांग्रेस और भाजपा के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव के बीच अब यह शब्द भी राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गया है।



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