ब्रेकिंग न्यूज़
झांसी हादसे में छोटे बेटे अबान की मौत, कसारी-मसारी में पिता-चाचा की कब्रों के पास ही होगा सुपुर्द-ए-खाक
ताजा खबर ताजा खबर

स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी के भाषण की 5 बड़ी बातें, नेहरू का जिक्र से लेकर ‘दिमागी नक्सल’ और 2047 के विकसित भारत तक

by admin@bebak24.com on | 2026-08-15 13:11:50

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3017


स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी के भाषण की 5 बड़ी बातें, नेहरू का जिक्र से लेकर ‘दिमागी नक्सल’ और 2047 के विकसित भारत तक

नई दिल्ली: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। यह स्वतंत्रता दिवस पर उनका लगातार 13वां संबोधन था। अपने करीब 12 साल के शासनकाल की उपलब्धियां गिनाने के साथ प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य दोहराया।

भाषण में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह समेत कई ऐतिहासिक नेताओं का उल्लेख किया। उन्होंने नक्सलवाद, आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक, किसानों और सुधारों को भी अपने संबोधन के प्रमुख विषयों में शामिल किया। प्रधानमंत्री का आधिकारिक भाषण भी प्रधानमंत्री कार्यालय और प्रेस सूचना ब्यूरो ने जारी किया है।

1. नक्सलवाद के बाद ‘दिमागी नक्सल’ की बात

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद और माओवादी हिंसा ने देश के बड़े हिस्से को प्रभावित किया और इसमें सुरक्षा बलों के हजारों जवानों ने अपनी जान गंवाई।

उन्होंने दावा किया कि अब सशस्त्र नक्सली हिंसा अपने अंतिम चरण में है। हालांकि, इसके साथ उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि माओवादी विचारधारा के कुछ प्रभाव अब भी अलग-अलग संस्थानों और सामाजिक क्षेत्रों में मौजूद हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी विचारधाराओं को पहचानना और उनसे सावधान रहना जरूरी है। इस हिस्से में उनका जोर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ वैचारिक संघर्ष पर भी रहा।

2. सरकार की 12 साल की उपलब्धियों का हिसाब

प्रधानमंत्री ने अपने शासनकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर आए हैं और भारत की अर्थव्यवस्था ने तेज गति पकड़ी है।

उन्होंने रक्षा उत्पादन, खादी और ग्रामोद्योग, मोबाइल फोन निर्माण, डिजिटल लेनदेन और पेटेंट के क्षेत्र में वृद्धि का उल्लेख किया। साथ ही शौचालय, आवास, मेट्रो और बुनियादी ढांचे के विस्तार को भी सरकार की उपलब्धियों के रूप में पेश किया।

मोदी ने कहा कि भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’, ‘लोकल फॉर वोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर जोर दिया।

3. सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और तकनीक पर बड़ा जोर

प्रधानमंत्री ने तकनीकी आत्मनिर्भरता को विकसित भारत की आधारशिला बताया। उन्होंने सेमीकंडक्टर उत्पादन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा सेंटर और महत्वपूर्ण खनिजों का जिक्र किया।

उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा को भी राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया और कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अधिक आत्मनिर्भर होना होगा।

प्रधानमंत्री ने समुद्री क्षेत्र में तेल और गैस की खोज, परमाणु ऊर्जा, पाइप से गैस की पहुंच और सौर ऊर्जा के विस्तार का उल्लेख किया। उन्होंने रेलवे के विद्युतीकरण और हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का भी जिक्र किया।

इन योजनाओं को उन्होंने भारत की दीर्घकालीन ऊर्जा और औद्योगिक क्षमता से जोड़ते हुए 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य का हिस्सा बताया।

4. युद्ध और वैश्विक संकटों के बीच किसान और ऊर्जा सुरक्षा

प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी के बाद पैदा हुए वैश्विक संकट और रूस-यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया के युद्धों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इन संकटों के बावजूद भारत में पेट्रोल, गैस और उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश की गई। किसानों को उर्वरक अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध कराने की बात भी उन्होंने कही।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सरकार किसानों को राहत देने की कोशिश कर रही है।

5. ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ और विकसित भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब भारत को सुधारों की गति और बढ़ानी होगी। उन्होंने आने वाले वर्षों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जिन कामों को पूरा होने में दशकों लगे, उन्हें अब कम समय में पूरा करने की जरूरत है।

उन्होंने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की बात करते हुए विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, डिजाइन, उत्पादन और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की भूमिका मजबूत करने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय उत्पादों की पहचान गुणवत्ता, लागत और बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता से होनी चाहिए। उन्होंने ‘जीरो डिफेक्ट’ को भारतीय विनिर्माण की पहचान बनाने का आह्वान किया।

महिलाओं के 33% प्रतिनिधित्व की अपील

प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में सहयोग करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं और युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए स्टार्टअप और नवाचार के अवसरों का भी उल्लेख किया।

नेहरू समेत कई नेताओं का जिक्र

भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कई प्रमुख नेताओं का नाम लिया। इनमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. भीमराव आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, भगवान बिरसा मुंडा और ज्योतिबा फुले शामिल थे।

उन्होंने कहा कि इन नेताओं के सपनों और योगदान से प्रेरणा लेकर भारत को आगे बढ़ाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ का भी विशेष उल्लेख किया और कहा कि इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लाल किले से इसका उल्लेख विशेष महत्व रखता है।

भाषण का मुख्य संदेश क्या रहा?

प्रधानमंत्री के इस वर्ष के संबोधन का केंद्र 2047 का विकसित भारत, आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा, विनिर्माण, युवा शक्ति और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी रहा।

साथ ही, नक्सलवाद और ‘दिमागी नक्सल’ की टिप्पणी के जरिए उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और वैचारिक चुनौती को भी अपने भाषण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।

कुल मिलाकर, पीएम मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में पिछले 12 साल की उपलब्धियों का राजनीतिक और आर्थिक हिसाब पेश करने के साथ अगले 21 साल के लिए विकसित भारत का रोडमैप सामने रखने की कोशिश की।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment