ब्रेकिंग न्यूज़
झांसी हादसे में छोटे बेटे अबान की मौत, कसारी-मसारी में पिता-चाचा की कब्रों के पास ही होगा सुपुर्द-ए-खाक
राजनीति राजनीति

संसद सत्र के अंतिम चरण में अमित शाह की पेशकश, कांग्रेस ने बदली रणनीति; राजनीतिक टकराव हुआ तेज

by admin@bebak24.com on | 2026-08-13 15:15:56

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3004


संसद सत्र के अंतिम चरण में अमित शाह की पेशकश, कांग्रेस ने बदली रणनीति; राजनीतिक टकराव हुआ तेज

नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र के समापन से ठीक पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नीट परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन और उससे संबंधित घटनाक्रम पर संसद में विस्तृत चर्चा करने की पेशकश की है। हालांकि कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए अब गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग को प्रमुख मुद्दा बना दिया है। दोनों पक्षों के बदले रुख के बाद संसद में राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।

अमित शाह ने कहा कि वह विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं और चर्चा के लिए सदन में उपस्थित रहेंगे। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि उसे भाषण नहीं, बल्कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर स्पष्ट जवाब चाहिए।

अमित शाह ने क्या कहा?

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और वह सभी पहलुओं पर खुली चर्चा के लिए तैयार हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से भी इस विषय पर चर्चा कराने का अनुरोध किया।

अमित शाह ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार पहले भी चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने सदन नहीं चलने दिया।

कांग्रेस ने क्यों बदली रणनीति?

संसद सत्र की शुरुआत में कांग्रेस गृह मंत्री से सदन में बयान देने और छात्र आंदोलन पर चर्चा कराने की मांग कर रही थी। अब पार्टी का कहना है कि केवल चर्चा पर्याप्त नहीं है और गृह मंत्री को पुलिस कार्रवाई पर जवाबदेही तय करनी चाहिए।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष गृह मंत्री का भाषण सुनने में रुचि नहीं रखता। उनका कहना है कि देश के युवा यह जानना चाहते हैं कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग का आदेश किसने दिया।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कार्रवाई का आदेश गृह मंत्री ने दिया था तो उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए और यदि नहीं दिया तो प्रशासनिक विफलता की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों की अलग-अलग राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद सत्र के अंतिम चरण में सरकार की ओर से चर्चा की पेशकश आने से राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार पहले ही चर्चा के लिए तैयार हो जाती तो संसद में लंबे समय तक जारी गतिरोध टल सकता था। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते राजनीतिक हालात को देखते हुए कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया है।

विश्लेषकों का यह भी कहना है कि सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने राजनीतिक संदेश को जनता तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

संसद में गतिरोध बरकरार

मॉनसून सत्र के अधिकांश दिनों में हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित रही। विपक्ष छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगता रहा, जबकि सरकार लगातार चर्चा के लिए तैयार होने का दावा करती रही।

सत्र समाप्ति से पहले सरकार की नई पेशकश और कांग्रेस के बदले रुख के बाद भी गतिरोध समाप्त होता नजर नहीं आया।

आगे क्या?

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संसद में इस मुद्दे पर औपचारिक चर्चा हो पाती है या नहीं। साथ ही छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर सरकार तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment