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रांची छात्र आंदोलन में देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती; सीएम सोरेन ने लिखा खुला पत्र

by admin@bebak24.com on | 2026-08-11 15:28:15

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रांची छात्र आंदोलन में देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती; सीएम सोरेन ने लिखा खुला पत्र

रांची। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आंदोलनकारी नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। महतो पिछले 9 दिनों से अनशन पर थे और सोमवार को खराब स्वास्थ्य के बावजूद छात्रों के विधानसभा मार्च में शामिल हुए थे।

इसी बीच रांची में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों के नाम खुला पत्र जारी कर संवाद और विश्वास के माध्यम से आंदोलन का समाधान निकालने की अपील की है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को झारखंड बंद का आह्वान किया है।

9 दिन से अनशन पर थे देवेंद्र नाथ महतो

देवेंद्र नाथ महतो जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। वह पिछले 9 दिनों से अनशन पर थे।

सोमवार को स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद वह छात्रों के विधानसभा मार्च में शामिल हुए। बताया गया कि वह एंबुलेंस से प्रदर्शन स्थल तक पहुंचे और बाद में स्ट्रेचर के सहारे प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया।

प्रदर्शन के दौरान महतो ने सरकार से छात्रों की मांगें स्वीकार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार को बल प्रयोग के बजाय विद्यार्थियों से बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करना चाहिए।

बाद में उनकी तबीयत और बिगड़ गई और उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, उनके रक्त शर्करा स्तर में गिरावट आई है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।

विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस और छात्रों में टकराव

छात्र जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे।

प्रदर्शनकारियों का एक समूह विधानसभा की सीमा के पास पहुंच गया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार, कुछ स्थानों पर हल्का लाठीचार्ज भी किया गया।

रांची के नगर पुलिस अधीक्षक पारस राणा ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के एक हिस्से ने पथराव किया और अवरोधक तोड़ने का प्रयास किया। उनके मुताबिक, पुलिसकर्मियों को चोटें आने के बाद स्थिति नियंत्रित करने के लिए सीमित बल का इस्तेमाल किया गया।

पुलिस के अनुसार, कार्रवाई में लगभग 4 से 5 छात्र मामूली रूप से घायल हुए हैं। वहीं कुछ पुलिसकर्मियों के भी घायल होने की जानकारी दी गई है।

पुलिस का दावा- अधिकांश प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण थे

रांची के नगर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल अधिकांश विद्यार्थी शांतिपूर्ण थे, लेकिन भीड़ के एक हिस्से द्वारा पथराव और अवरोधक तोड़ने की कोशिश के कारण स्थिति बिगड़ी।

पुलिस का कहना है कि विधानसभा की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए पहले से कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का एक समूह विधानसभा की सीमा तक पहुंच गया।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की और दावा किया कि घेराव की कार्रवाई बाद में समाप्त हो गई।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों के नाम लिखा खुला पत्र

प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विद्यार्थियों के नाम सोशल मीडिया पर एक खुला पत्र जारी किया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह छात्रों की आवाज सुने। मुख्यमंत्री ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने वाले विद्यार्थियों के अधिकार का सम्मान करने की बात कही।

सोरेन ने यह भी कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को लेकर बातचीत कर रही है और वरिष्ठ मंत्री लगातार आंदोलनकारियों के संपर्क में हैं।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में सरकार ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की है और व्यवस्था की कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि भविष्य में विद्यार्थियों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।

उन्होंने छात्रों से राजनीतिक दलों के प्रभाव से बचते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने की अपील भी की।

छात्रों की सबसे बड़ी मांग क्या है?

छात्र आंदोलन का मुख्य मुद्दा झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आंदोलनकारी विशेष रूप से 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने, जेपीएससी की बैकलॉग परीक्षाओं और अन्य परीक्षाओं की जांच की मांग कर रहे हैं।

सरकार और आंदोलनकारियों के बीच रविवार को हुई बातचीत में कुछ मांगों पर सहमति बनने का दावा किया गया था। आंदोलनकारी पक्ष के अनुसार, 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा और कुछ बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने तथा संबंधित मामलों की जांच कराने पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया।

हालांकि, छात्रों की ओर से अभी भी सीबीआई जांच समेत कुछ मांगों पर जोर दिया जा रहा है। इसी कारण आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

सरकार का दावा- अधिकांश मांगें मानी गईं

झारखंड सरकार का कहना है कि उसने विद्यार्थियों की लगभग 98 प्रतिशत मांगों को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, आंदोलनकारी इस दावे से पूरी तरह सहमत नहीं हैं।

छात्रों और सरकार के बीच हुई वार्ताओं में परीक्षा रद्द करने, जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई है। कुछ मांगों, विशेषकर उम्र सीमा में छूट और जांच की प्रकृति को लेकर अभी भी मतभेद बने हुए हैं।

यही कारण है कि बातचीत के बावजूद छात्रों का आंदोलन जारी है।

महिला प्रदर्शनकारियों ने भी लगाए आरोप

प्रदर्शन के दौरान कुछ महिला प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पुरुष पुलिसकर्मियों ने लाठीचार्ज किया।

इन आरोपों को लेकर भी विवाद सामने आया है। वहीं पुलिस का कहना है कि उसने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक और सीमित कार्रवाई की तथा अधिकांश प्रदर्शनकारियों के साथ संयम बरता गया।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है।

राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने भी दी प्रतिक्रिया

झारखंड छात्र आंदोलन पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ हिंसा का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कहीं भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा होती है तो उसकी निंदा की जानी चाहिए।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी झारखंड के विद्यार्थियों के आंदोलन पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बेरोजगारी को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि युवाओं के रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, भाजपा ने रांची में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को झारखंड बंद का आह्वान किया है।

अब आगे क्या?

देवेंद्र नाथ महतो के अस्पताल में भर्ती होने के बाद छात्र आंदोलन की स्थिति और संवेदनशील हो गई है। एक ओर सरकार कुछ मांगों पर सहमति बनने का दावा कर रही है, वहीं आंदोलनकारी अभी भी कई प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय चाहते हैं।

अब सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली बातचीत महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, महतो की स्वास्थ्य स्थिति और मंगलवार के झारखंड बंद के दौरान कानून-व्यवस्था पर भी नजर रहेगी।

फिलहाल झारखंड में छात्र आंदोलन का मूल सवाल परीक्षाओं की पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और अभ्यर्थियों की लंबित मांगों के समाधान को लेकर है।



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