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मानसून सत्र में 12 विधेयक पास, लेकिन बहस के लिए कम समय मिला: किरेन रिजिजू

by admin@bebak24.com on | 2026-08-13 16:25:51

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मानसून सत्र में 12 विधेयक पास, लेकिन बहस के लिए कम समय मिला: किरेन रिजिजू

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सत्र के कामकाज का ब्योरा साझा किया। उन्होंने कहा कि विधायी कामकाज के लिहाज से सत्र सफल रहा और कुल 12 विधेयक पारित किए गए, लेकिन बहस और चर्चा के मामले में संसद की उत्पादकता अपेक्षाकृत कम रही।

रिजिजू के मुताबिक, निर्धारित समय की तुलना में लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत और राज्यसभा की 39 प्रतिशत रही। उन्होंने इसके लिए विपक्ष के लगातार हंगामे और कई मौकों पर किए गए बहिर्गमन को प्रमुख कारण बताया।

12 विधेयक हुए पारित

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मानसून सत्र में कुल 12 विधेयक पारित किए गए। उनके अनुसार, विधायी कामकाज के लिहाज से सरकार सत्र को सफल मानती है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सदन में व्यापक चर्चा के लिए पर्याप्त समय का उपयोग नहीं हो सका।

लोकसभा में सिर्फ 1 विधेयक पर पूरी चर्चा

रिजिजू ने बताया कि लोकसभा में केवल 1 विधेयक पर पूरी तरह चर्चा हो सकी। यह विधेयक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने से संबंधित था।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम इसी सत्र में पारित किया गया और इस पर लोकसभा तथा राज्यसभा, दोनों सदनों में चर्चा हुई।

उत्पादकता पर क्या बोले रिजिजू?

रिजिजू ने कहा कि लोकसभा में निर्धारित कुल समय के मुकाबले केवल 19 प्रतिशत कामकाज हो सका, जबकि राज्यसभा में यह आंकड़ा 39 प्रतिशत रहा।

उनके मुताबिक, कई विपक्षी दलों के सांसदों ने हंगामे और बहिर्गमन के बावजूद कुछ चर्चाओं में हिस्सा लिया। इसके अलावा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अधिकांश सांसद भी सदन की बहस में शामिल हुए।

हंगामे से प्रभावित हुई चर्चा

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि विपक्ष के लगातार विरोध के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। इससे विधेयकों और दूसरे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत बहस के लिए उपलब्ध समय का पूरा इस्तेमाल नहीं किया जा सका।

उन्होंने कहा कि सरकार की नजर में विधायी कामकाज पूरा हुआ, लेकिन बहस और चर्चा की गुणवत्ता तथा समय के उपयोग के लिहाज से सत्र उतना प्रभावी नहीं रहा।

मानसून सत्र का दोहरा आकलन

रिजिजू के बयान के मुताबिक, मानसून सत्र को 2 अलग-अलग नजरियों से देखा जा सकता है। विधायी कामकाज के लिहाज से सत्र सफल रहा, जबकि संसदीय बहस और चर्चा के लिहाज से इसकी उत्पादकता कम रही।

सत्र समाप्त होने के बाद अब सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने नजरिए से इसके कामकाज का आकलन कर रहे हैं।



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