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109 साल पुराने कर्ज़ का दावा: मध्य प्रदेश के परिवार ने ब्रिटिश सरकार से मांगे 35 हज़ार रुपए

by admin@bebak24.com on | 2026-08-13 15:07:00

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109 साल पुराने कर्ज़ का दावा: मध्य प्रदेश के परिवार ने ब्रिटिश सरकार से मांगे 35 हज़ार रुपए

भोपाल/सीहोर: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के रुठिया परिवार ने दावा किया है कि उनके पूर्वज सेठ जुम्मालाल रुठिया ने वर्ष 1917 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को 35000 रुपए का युद्ध ऋण दिया था। परिवार का कहना है कि अब 109 वर्ष बाद उसने ब्रिटेन से इस राशि की वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल ब्रिटिश अधिकारियों ने दावे को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन मामले से जुड़े दस्तावेज़ों और पारिवारिक अभिलेखों का सत्यापन करने के लिए अतिरिक्त जानकारी मांगी है।

परिवार के अनुसार, उनके पास 4 जून 1917 का एक प्रमाण-पत्र मौजूद है, जिसमें ब्रिटिश प्रशासन को 35000 रुपए दिए जाने का उल्लेख है। उनका दावा है कि यह राशि भोपाल एजेंसी के तत्कालीन राजनीतिक अभिकर्ता के माध्यम से उपलब्ध कराई गई थी।

ब्रिटिश अधिकारियों ने मांगे दस्तावेज़

रुठिया परिवार के सदस्य गौतम रुठिया ने बताया कि ब्रिटेन के संबंधित अधिकारियों ने ईमेल के माध्यम से परिवार की वंशावली, मूल दस्तावेज़, उस समय की फर्म से जुड़ी जानकारी तथा अन्य अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया दावे के सत्यापन का हिस्सा है और अभी तक ब्रिटिश सरकार की ओर से दावे को स्वीकार नहीं किया गया है।

परिवार का कहना है कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना है कि 1917 में राशि उपलब्ध कराने वाला परिवार और वर्तमान में दावा करने वाला परिवार एक ही है।

पुराने अभिलेखों से सामने आया मामला

परिवार के अनुसार, इस दस्तावेज़ की जानकारी उन्हें इसी वर्ष फ़रवरी 2026 में पुराने अभिलेखों की जांच के दौरान मिली। इसके बाद उन्होंने विधिक सलाह लेकर ब्रिटिश अधिकारियों से संपर्क किया।

परिवार का कहना है कि यह मामला केवल धनराशि का नहीं, बल्कि उनके पूर्वज की विरासत और ऐतिहासिक अभिलेखों से जुड़ा विषय भी है।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान दिए जाने का दावा

रुठिया परिवार का दावा है कि यह राशि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार को भारतीय सैनिकों से जुड़े युद्ध व्यय के लिए दी गई थी। परिवार इसे सामान्य बैंक ऋण नहीं, बल्कि युद्ध ऋण मानता है, जिसकी वापसी के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं थी।

मूल राशि के साथ ब्याज का भी दावा

परिवार का कहना है कि यदि उनका दावा स्वीकार होता है तो वह केवल 35000 रुपए की मूल राशि ही नहीं, बल्कि उस पर ब्याज, चक्रवृद्धि ब्याज, महंगाई तथा अन्य संबंधित वित्तीय पहलुओं को जोड़कर कुल देय राशि का दावा करेगा। हालांकि अभी तक अंतिम दावा राशि तय नहीं की गई है।

2015 में ब्रिटेन ने चुकाए थे प्रथम विश्व युद्ध के कुछ पुराने ऋण

रुठिया परिवार ने अपने दावे के समर्थन में यह भी कहा है कि ब्रिटेन ने 2015 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान लिए गए कुछ पुराने सरकारी ऋणों का भुगतान किया था। हालांकि इससे यह स्वतः सिद्ध नहीं होता कि रुठिया परिवार द्वारा दावा की जा रही राशि भी उन्हीं ऋणों का हिस्सा थी।

सत्यापन के बाद ही होगा अगला निर्णय

फिलहाल पूरा मामला दस्तावेज़ों के सत्यापन के चरण में है। ब्रिटिश अधिकारियों की ओर से परिवार के दावे पर कोई अंतिम निर्णय या आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। आवश्यक अभिलेखों की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 1917 के कथित युद्ध ऋण से जुड़े दस्तावेज़ ब्रिटिश सरकारी अभिलेखों से मेल खाते हैं या नहीं।

परिवार ने संकेत दिया है कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक होने पर आगे की विधिक और मध्यस्थता संबंधी कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा।



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