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केरल में कुदरत का कहर— भारी बारिश से 8 की मौत, 8 लापता

by admin@bebak24.com on | 2026-08-02 19:35:22

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केरल में कुदरत का कहर— भारी बारिश से 8 की मौत, 8 लापता

तिरुवनंतपुरम : दक्षिण भारतीय राज्य केरल में जारी भारी मानसूनी बारिश और जगह-जगह हुए भूस्खलन से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। रविवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आपदा की स्थिति का विस्तृत विवरण पेश किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि बारिश और बाढ़ जनित हादसों में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 8 अन्य लोग अभी भी लापता हैं और 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

नुकसान का ब्यौरा: 27 मकान पूरी तरह तबाह, 209 राहत शिविर स्थापित

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:

  • मकानों को नुकसान: राज्य भर में 27 मकान पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं, जबकि 196 मकानों को आंशिक क्षति पहुंची है।

  • राहत व बचाव अभियान: प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालकर 209 राहत शिविरों में पहुंचाया गया है, जहां फिलहाल 5,792 नागरिक शरण लिए हुए हैं।

  • सरकार का आश्वासन: मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा कि राज्य सरकार मृतकों के परिजनों और जिन लोगों ने अपने घर या आजीविका खोई है, उन्हें पुनर्वास और वित्तीय सहायता देने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

कन्नूर में रिकॉर्ड 320 मिमी बारिश; 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी

केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मौसम विभाग के अनुसार:

  • रिकॉर्ड बारिश: शनिवार को कन्नूर जिले के अय्यनकुन्नू क्षेत्र में 24 घंटे के भीतर रिकॉर्ड 320 मिमी तक मूसलाधार बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा उत्तरी मालाबार क्षेत्र में सुबह से मध्यरात्रि तक 90 मिमी से 180 मिमी तक बारिश हुई।

  • राहत की खबर और सतर्कता: रविवार को बारिश की तीव्रता शनिवार के मुकाबले थोड़ी कम दर्ज की गई है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने पहाड़ी (हाई-रेंज) क्षेत्रों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को लगातार सतर्क रहने की सलाह दी है।

  • सफाई व जल निकासी अभियान: बाढ़ और जलभराव वाले इलाकों में पानी उतरने के बाद जन-प्रतिनिधियों और स्वयंसेवकों की मदद से व्यापक स्तर पर सफाई अभियान चलाया जा रहा है।

बेबाक24 टेक

केरल में हर साल मानसूनी आपदाओं का बढ़ता स्वरूप जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती को रेखांकित करता है। राज्य प्रशासन द्वारा राहत शिविरों की त्वरित स्थापना सराहनीय है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों (Landslide Zones) के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा नीतियां और पूर्व-चेतावनी प्रणाली को और अधिक मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।



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