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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर 'इंडिया' गठबंधन के हंगामे के बीच सायोनी घोष का बड़ा बयान; कहा- "सदन को चलने दें, टैक्सपेयर्स के पैसे बर्बाद न करें"

by admin@bebak24.com on | 2026-07-31 22:38:52

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर 'इंडिया' गठबंधन के हंगामे के बीच सायोनी घोष का बड़ा बयान; कहा- "सदन को चलने दें, टैक्सपेयर्स के पैसे बर्बाद न करें"

नई दिल्ली : अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर संसद के दोनों सदनों में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया'  का जोरदार विरोध प्रदर्शन जारी है। इस हंगामे के कारण लगातार बाधित हो रही संसदीय कार्यवाही पर अब टीएमसी की बागी सांसद और नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी की नेता सायोनी घोष ने अपनी ही पूर्व सहयोगी पार्टियों के रुख पर कड़ा एतराज जताया है।

सायोनी घोष ने विपक्षी सांसदों के लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन पर निराशा जताते हुए संसद के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने की अपील की है।

सायोनी घोष ने क्या कहा? 

  • टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी: सायोनी घोष ने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए कहा, "सत्र चल नहीं पा रहा है। हर दिन सदन की कार्यवाही में बाधा डाली जा रही है, जिससे देश के टैक्सपेयर्स के गाढ़े पसीने का पैसा बर्बाद हो रहा है।"

  • जनता के मुद्दों पर असर: उन्होंने आगे कहा, "चाहे प्रश्नकाल हो या शून्यकाल, हंगामे की वजह से हम जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं और मुद्दों को सदन में नहीं उठा पा रहे हैं।"

  • सदन चलाने में विपक्ष की भी जिम्मेदारी: सायोनी घोष ने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा:

    "यह स्थिति बहुत दुखद है। जनता की हमसे बहुत अपेक्षाएं हैं। मेरा सभी से केवल एक ही अनुरोध है कि सदन को चलने दें। विरोध प्रदर्शन बाहर जो करना हो करें। अगर सदन चलाना ट्रेजरी बेंच  का काम है, तो सदन को चलने देना विपक्ष की भी उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है।"

राजनीतिक पृष्ठभूमि: टीएमसी बागी सांसदों का कदम

सायोनी घोष टीएमसी के उन 20 बागी सांसदों के समूह का हिस्सा थीं, जिन्होंने हाल ही में नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में अपने गुट का विलय किया था। 'इंडिया' गठबंधन द्वारा राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर संसद में उठाए गए सख्त रुख के बीच सायोनी घोष का यह बयान विपक्षी एकजुटता पर भी सवाल खड़े करता है।

बेबाक24 टेक

संसदीय लोकतंत्र में विरोध और प्रश्न पूछना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन लगातार हंगामे के कारण प्रश्नकाल और शून्यकाल का रद्द होना जनहित से जुड़े अन्य मुद्दों के लिए नुकसानदेह साबित होता है। सायोनी घोष का यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि गतिरोध के बजाय बहस और चर्चा ही जनता के पैसे और समय का सही उपयोग है।



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