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CJP प्रदर्शनकारी रुचिका सिंह पर पीएम मोदी पर अमर्यादित टिप्पणी मामले में 'जीरो FIR'; संसद मार्ग थाने ट्रांसफर हुआ केस

by on | 2026-07-31 20:18:19

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CJP प्रदर्शनकारी रुचिका सिंह पर पीएम मोदी पर अमर्यादित टिप्पणी मामले में 'जीरो FIR'; संसद मार्ग थाने ट्रांसफर हुआ केस

नई दिल्ली : जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के खिलाफ आपत्तिजनक/अमर्यादित टिप्पणी करने के आरोप में रुचिका सिंह के खिलाफ गाजियाबाद की एक महिला की शिकायत पर नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में 'जीरो FIR' दर्ज की गई है।

घटनास्थल दिल्ली का जंतर-मंतर होने के कारण कानूनी प्रक्रिया के तहत इस केस को आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस के संसद मार्ग थाने को ट्रांसफर कर दिया गया है।

किस मामले और धाराओं में दर्ज हुई FIR?

  • शिकायतकर्ता व आरोप: गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई और सार्वजनिक शांति भंग करने का प्रयास किया।

  • लगाई गई धाराएं (BNS): पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), धारा 353(1) (सार्वजनिक उपद्रव को बढ़ावा देना) और धारा 356(1) (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया है।

CJP की प्रतिक्रिया: 'आपत्तिजनक भाषा गलत, लेकिन आपराधिक केस बनाना निंदनीय'

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए कहा:

  • आपराधिक कार्रवाई का विरोध: सौरव दास ने कहा कि अगर किसी ने अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया है तो वह गलत हो सकता है, लेकिन किसी 25 साल की युवती पर आपराधिक कानून थोपना और डराना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

  • युवाओं को सलाह: उन्होंने युवाओं से अपनी भाषा में संयम बरतने की अपील भी की, लेकिन साथ ही सवाल उठाया कि पुलिस को अपनी ऊर्जा सांसदों पर दर्ज गंभीर आपराधिक मुकदमों की जांच में लगानी चाहिए, प्रदर्शनकारी युवाओं को प्रताड़ित करने में नहीं।

दिल्ली सरकार के केस वापसी के दावों के बीच नया मोड़

यह मामला ऐसे समय आया है जब हाल ही में दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल की मंजूरी से CJP प्रदर्शनों के दौरान निर्दोष छात्रों पर दर्ज 13 मामलों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक बयानों और सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट से जुड़े मामलों में दिल्ली पुलिस और अन्य राज्यों की पुलिस सख्त रुख अपना रही है।

बेबाक24 टेक

छात्र आंदोलनों में अभिव्यक्ति की आजादी और अमर्यादित/अपमानजनक बयानों के बीच की रेखा हमेशा संवेदनशील रही है। जहां एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को किसी भी कठोर/दंडात्मक कार्रवाई से राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष संवैधानिक पद पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर पुलिस की यह कार्रवाई कानूनी बहस का नया केंद्र बन गई है।



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