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बांकीपुर उपचुनाव में 35% से कम वोटिंग; क्या प्रशांत किशोर का दांव पड़ेगा भारी या बीजेपी के गढ़ में लगेगी सेंध?

by on | 2026-07-31 19:58:40

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बांकीपुर उपचुनाव में 35% से कम वोटिंग; क्या प्रशांत किशोर का दांव पड़ेगा भारी या बीजेपी के गढ़ में लगेगी सेंध?

पटना : बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल मानी जा रही पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में महज 34-35 फीसदी मतदान दर्ज किया गया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के खुद मैदान में उतरने के बावजूद 2025 के मुख्य विधानसभा चुनाव (41.35%) की तुलना में वोटिंग में करीब 7% की भारी गिरावट आई है।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफे से खाली हुई इस सीट पर 3 अगस्त को मतगणना होगी, लेकिन कम मतदान ने राजनीतिक विश्लेषकों और दलों के बीच कयासों का दौर शुरू कर दिया है।

बांकीपुर में कम मतदान के 3 मुख्य कारण

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,79,611 मतदाता हैं और 25 उम्मीदवार मैदान में हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार कम वोटिंग के पीछे तीन प्रमुख वजहें हैं:

  • उपचुनाव का उदासीन रुख: महज एक साल के भीतर दोबारा चुनाव होने और इस एक सीट के नतीजे से बिहार सरकार की सेहत/स्थायित्व पर कोई असर न पड़ने के कारण आम शहरी मतदाता पोलिंग बूथों तक नहीं निकले।

  • पारंपरिक वोटिंग पैटर्न: बांकीपुर पूरी तरह से पटना का शहरी इलाका है, जहां ऐतिहासिक रूप से कम मतदान होता रहा है।

  • अन्य राज्यों से तुलना: 30 जुलाई को हुए अन्य उपचुनावों की तुलना में बांकीपुर सबसे पीछे रहा। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर 71.41% और गुजरात की मंजलपुर सीट पर 37.5% वोटिंग हुई।

प्रशांत किशोर के लिए क्या हैं राजनीतिक संकेत?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर में सीधी उम्मीदवारी प्रशांत किशोर का एक 'कैलकुलेटेड रिस्क' है:

  • बीजेपी के कोर वोट बैंक में सेंध का प्रयास: बांकीपुर 1995 से बीजेपी का अजेय गढ़ रहा है। यहां कायस्थ और वैश्य समुदाय की बड़ी आबादी है। बीजेपी ने कायस्थ समाज से नीरज कुमार सिन्हा को उतारा है, जबकि ब्राह्मण समाज से आने वाले प्रशांत किशोर को उम्मीद है कि एनडीए से असंतुष्ट उच्च जातियां और युवा उनके साथ आएंगे।

  • कुम्हरार का पिछला सबक: हालांकि, 2025 के चुनाव में जन सुराज ने पटना की कुम्हरार सीट से चर्चित प्रोफेसर के.सी. सिन्हा (कायस्थ) को उतारा था, लेकिन कायस्थ मतदाताओं ने बीजेपी को ही वोट दिया और के.सी. सिन्हा तीसरे स्थान पर रहे।

  • पुलिस विवाद और जक्कनपुर थाना घेराव: वोटिंग की पूर्व संध्या पर अपने 20 कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा उठाए जाने के विरोध में देर रात जक्कनपुर थाने पहुंचे पीके ने प्रशासन पर बीजेपी को मदद पहुंचाने का सीधा आरोप लगाया, जिससे चुनावी लड़ाई और तीखी हो गई है।

प्रमुख उम्मीदवारों के बीच मुकाबला

  • बीजेपी (BJP): नीरज कुमार सिन्हा (गढ़ बचाने की चुनौती)

  • जन सुराज (JSP): प्रशांत किशोर (अपनी राजनीतिक साख और जनाधार की परीक्षा)

  • आरजेडी (RJD): रेखा गुप्ता (विपक्षी मतों के सहारे मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास)

बेबाक24 टेक

कम मतदान का फायदा आमतौर पर कैडर-बेस्ड पार्टी को मिलता है, क्योंकि उनके प्रतिबद्ध मतदाता बूथ तक जरूर पहुंचते हैं। हालांकि, अगर प्रशांत किशोर बीजेपी के पारंपरिक सवर्ण और शहरी युवा वोटरों में 10-15% की भी सेंध लगाने में कामयाब होते हैं, तो यह बांकीपुर के नतीजों को चौंकाने वाला बना सकता है। 3 अगस्त को आने वाले नतीजे तय करेंगे कि बिहार में 'तीसरे विकल्प' के रूप में जन सुराज की जमीन कितनी मजबूत हुई है।



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