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मुख्तार अंसारी के बेटे के वलीमे में अखिलेश: सियासी समीकरण और संदेश

by admin@bebak24.com on | 2025-11-20 00:38:37

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मुख्तार अंसारी के बेटे के वलीमे में अखिलेश: सियासी समीकरण और संदेश

मुख्तार अंसारी के छोटे बेटे उमर अंसारी और फातिमा के निकाह के बाद दिल्ली में आयोजित वलीमे (रिसेप्शन) में समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव की उपस्थिति ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया सियासी भूचाल ला दिया है। यह सिर्फ एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आगामी लोकसभा चुनावों से पहले पूर्वांचल के समीकरणों को साधने की एक स्पष्ट कोशिश मानी जा रही है।


 कार्यक्रम में प्रमुख रूप से दिखा यह सब:

 * अखिलेश यादव की एंट्री: सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने स्वयं नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं दीं, जो मुख्तार परिवार के साथ सपा की नजदीकी को सार्वजनिक रूप से दर्शाता है।

 * नेताओं का जमावड़ा: अखिलेश यादव के अलावा, एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, और सपा के कई वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति ने इस रिसेप्शन को 'मिनी-सियासी मंच' में बदल दिया।

 * अब्बास अंसारी की मेजबानी: जेल मे मौत के बाद मुख्तार अंसारी की अनुपस्थिति में, विधायक बेटे अब्बास अंसारी ने मुख्य मेजबान की भूमिका निभाई।

 * सांकेतिक उपस्थिति: कार्यक्रम में मुख्तार अंसारी की तस्वीर भी रखी गई थी, जो यह दर्शाता है कि परिवार अभी भी अपने राजनीतिक प्रभाव और पहचान को मजबूती से बनाए रखना चाहता है।

 * तस्वीरों पर विवाद: अब्बास अंसारी द्वारा साझा की गई तस्वीरों में महिलाओं के चेहरे ब्लर (धुंधले) किए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई।


 सियासत के मायने: बाहुबली की एंट्री और टिकट का पेंच

इस वैवाहिक कार्यक्रम के सियासी मायने मुख्य रूप से दो बड़े लक्ष्यों की ओर इशारा करते हैं:

1. पूर्वांचल का 'M-Y' समीकरण मजबूत करना

अखिलेश यादव का अंसारी परिवार के आयोजन में शामिल होना, गाजीपुर, मऊ और बलिया के मुस्लिम वोट बैंक को स्पष्ट संदेश देता है। यह कदम सपा के पारंपरिक मुस्लिम-यादव (M-Y) कोर वोट बैंक को एकजुट करने और यह विश्वास दिलाने की कोशिश है कि सपा उनके प्रभावशील परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।


2. अतुल राय और बाहुबलियों की 'वापसी' 

 पहले अखिलेश यादव ने लोक सभा चुनाव में अतुल राय को टिकट देने के लिए मना कर दिया था, लेकिन अब वलीमे में उनका शामिल होना और राय की उपस्थिति यह बताती है कि सपा परिणाम के लिए pragmatism (व्यावहारिकता) अपनाने को तैयार है।

 * टिकट का पेंच: सबसे बड़ी राजनीतिक उलझन अतुल राय के संभावित चुनाव क्षेत्र को लेकर है। यदि सपा उन्हें टिकट देती है, तो इसका मतलब होगा कि उस क्षेत्र में मौजूदा सपा विधायक का टिकट कटना लगभग तय है। यह सपा के भीतर अंतर्कलह पैदा कर सकता है और अतुल राय जैसे 'बाहुबली' की एंट्री पार्टी के 'सुधार' की छवि पर भी सवाल खड़े कर सकती है।

संक्षेप में, अखिलेश यादव का यह कदम एक सियासी निवेश है। वह पूर्वांचल के वोट बैंक में लाभ देख रहे हैं, भले ही इसके लिए उन्हें कानून व्यवस्था के मुद्दे पर BJP के हमलों और पार्टी के भीतर संभावित टिकट विवादों का जोखिम उठाना पड़े।



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