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गाजीपुर DIOS कार्यालय में लाखों का 'वारा-न्यारा', भ्रष्टाचार की बहती गंगा में डुबकी लगा रहे साहब!

by on | 2026-03-08 08:01:10

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गाजीपुर DIOS कार्यालय में लाखों का 'वारा-न्यारा', भ्रष्टाचार की बहती गंगा में डुबकी लगा रहे साहब!

 

गाजीपुर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही 'जीरो टॉलरेंस' का दम भरती हो, लेकिन गाजीपुर का जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय भ्रष्टाचार की नई इबारत लिख रहा है। यहाँ के हालात देखकर इसे 'जंगलराज' कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी, जहाँ नियम-कायदे रद्दी के टुकड़े बन चुके हैं और सरकारी खजाना निजी जागीर की तरह लुटाया जा रहा है। ताजा मामला राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में फर्नीचर और कार्यालय व्यय के नाम पर हुए करोड़ों के बंदरबांट का है, जिसने विभाग की साख को तार-तार कर दिया है।

नियमों को ठेंगा, जेम पोर्टल के नाम पर करोड़ों की 'लूट'

सूत्रों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपये का बजट बिना किसी सक्षम अनुमति और तय प्रक्रिया के ठिकाने लगा दिया गया। जून 2025 में बजट आवंटित हुआ और जुलाई के आते-आते कागजों पर खरीदारी का 'खेल' भी पूरा हो गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस भारी-भरकम खरीदारी के लिए तत्कालीन डीआईओएस से कोई औपचारिक अनुमति तक नहीं ली गई क्या यह सच है । स्थानीय फर्मों को दरकिनार कर प्रयागराज की एक खास फर्म पर मेहरबानी बरसाई गई, जो सीधे तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करती है।

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इस घोटाले की परतें जब खुलीं, तो विभागीय अफसरों के होश उड़ गए। नियमतः बजट विद्यालयों को आवंटित होना चाहिए था और प्रबंधन समिति को खरीदारी करनी थी, लेकिन यहाँ तो 'साहब' ही सर्वेसर्वा बन बैठे। कार्यालय स्तर से ही सीधे जेम पोर्टल पर ऑर्डर दे दिए गए। हद तो तब हो गई जब उन विद्यालयों को भी 7 लाख रुपये से अधिक का सामान सप्लाई कर दिया गया, जहाँ मात्र पाँच छात्राएं नामांकित हैं। यह साफ दर्शाता है कि मकसद शिक्षा व्यवस्था को सुधारना नहीं, बल्कि कमीशन की मलाई काटना था।

जिम्मेदार कौन? पल्ला झाड़ने में जुटे 'साहब'

करोड़ों के इस खेल के पीछे विभाग के हुक्मरानों का सीधा हाथ बताया जा रहा है। अब जब मामला उजागर हो गया है, तो अधिकारी बगलें झाँक रहे हैं। वर्तमान डीआईओएस प्रकाश सिंह का कहना है कि उन्हें इस बजट या खरीदारी की कोई जानकारी नहीं है। वहीं, वित्त एवं लेखाधिकारी का रटा-रटाया तर्क है कि बजट विद्यालयों के नाम पर आया था और उसे आवंटित कर दिया गया।

सवाल यह उठता है कि क्या गाजीपुर में भ्रष्टाचार के मुख्य सूत्रधारों पर गाज गिरेगी या 'मछटी इंटर कॉलेज' जैसे डिबार विद्यालयों को सेंटर बनाने वाले साहब की 'सेटिंग' एक बार फिर भारी पड़ेगी? जनता और विभाग के ईमानदार कर्मचारी अब शासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।




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