by admin@bebak24.com on | 2025-11-19 13:06:56
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वाराणसी | भोजपुरी और हिंदी साहित्य के महान साधक, कथाकार एवं निबंधकार डॉ. विवेकी राय की 101वीं जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर देश भर के साहित्यिक गलियारों में उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जा रहा है।
डॉ. राय का जन्म 22 नवंबर 1924 को उत्तर प्रदेश के बलिया-गाजीपुर सीमावर्ती गाँव भरौली में नाना के घर हुआ था। वह मूल रुप से गाजीपुर के सोनवानी के रहने वाले थे । उन्होंने अपना अधिकांश जीवन शिक्षा और साहित्य को समर्पित किया। गाजीपुर में हिंदी के अध्यापक के रूप में कार्य करने के बाद, वह 1988 में सेवानिवृत्त हुए और ज्ञान की नगरी लहुरी काशी में स्थायी रूप से रहने लगे, मोक्ष की नगरी वाराणसी में 19 नवंबर 2016 को उनका निधन हुआ।
साहित्य में अप्रतिम योगदान
डॉ. विवेकी राय को उनकी सहज, ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़ी हुई और विचारोत्तेजक लेखन शैली के लिए जाना जाता है। उन्होंने हिंदी और भोजपुरी दोनों भाषाओं में समान अधिकार से लिखा।
* भोजपुरी साहित्य: उन्हें भोजपुरी गद्य साहित्य का पुरोधा माना जाता है। उन्होंने न केवल कथा और निबंध लिखे, बल्कि भोजपुरी साहित्य के विकास को आधार प्रदान किया।
* विविध विधाओं के मास्टर: उनके लेखन में उपन्यास, कहानी, कविता, निबंध, रेखाचित्र, संस्मरण, रिपोर्ताज और डायरी जैसी लगभग सभी प्रमुख विधाएँ शामिल हैं।
* अकादमिक महत्व: उनके साहित्य की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे भारत के विश्वविद्यालयों में उनके कृतित्व पर 50 से अधिक शोध कार्य संपन्न हो चुके हैं।
सम्मानों से अलंकृत
उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें प्रेमचंद पुरस्कार, साहित्य भूषण पुरस्कार, आचार्य शिवपूजन सहाय सम्मान, पंडित राहुल सांकृत्यायन सम्मान, और उत्तर प्रदेश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान यश भारती प्रमुख हैं।
'जनता के पोखरा' - एक मार्मिक चित्रण
डॉ. राय की एक प्रसिद्ध और मार्मिक रचना 'जनता के पोखरा' है, जो आधुनिक समाज में ग्रामीण जीवन और सार्वजनिक संपत्तियों की उपेक्षा पर गहरा कटाक्ष करती है। इस कविता में तालाब (पोखरा) के अतीत के गौरव और वर्तमान की जीर्ण-शीर्ण अवस्था का चित्रण कर व्यवस्था की बेकसी को उजागर किया गया है।
उनके महत्वपूर्ण भोजपुरी ग्रंथ जैसे 'भोजपुरी कथा साहित्य के विकास', 'गंगा जमुना सरस्वती', 'ओझइती', और 'कथुली गांव' आज भी साहित्यिक अध्ययन के लिए भोजपुरी साहित्यांगन जैसी वेबसाइटों पर ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
डॉ. विवेकी राय की जयंती पर, साहित्यिक समाज उन्हें नमन करता है और उनके समृद्ध लेखन को भावी पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य विरासत मानता है।
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