ब्रेकिंग न्यूज़
पीएम मोदी ने छात्रों के लिए रोका अपना काफिला: नीट परीक्षा के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर 45 मिनट रुके
एजुकेशन एजुकेशन

'जिस देश को रोज प्रोपेगेंडा परोसा जाए, उसे शिक्षित नहीं किया जा सकता'— सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि की दोटूक; बोलीं: शिक्षा से पहले मीडिया में सुधार हो

by admin@bebak24.com on | 2026-07-26 21:35:58

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3002


'जिस देश को रोज प्रोपेगेंडा परोसा जाए, उसे शिक्षित नहीं किया जा सकता'— सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि की दोटूक; बोलीं: शिक्षा से पहले मीडिया में सुधार हो

नई दिल्ली/लेह (26 जुलाई 2026): जंतर-मंतर पर 37 दिनों के ऐतिहासिक छात्र आंदोलन के समाप्त होने के बाद अब देश में 'शिक्षा व्यवस्था' और 'मीडिया' की भूमिका को लेकर बहस छिड़ गई है। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि जे. अंगमो ने देश के मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य पर एक बेहद तीखा और विचारणीय बयान दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अपनी बात रखते हुए डॉ. गीतांजलि ने कहा कि देश में शिक्षा सुधार की बात करने से पहले 'मीडिया सुधार' सबसे ज्यादा जरूरी है।

"आज टीवी स्टूडियो और सोशल मीडिया ट्रोल्स ही असली शिक्षक हैं"

डॉ. गीतांजलि जे. अंगमो ने अपने पोस्ट में इस बात पर गहरा दुख जताया कि आज समाज को किस तरह टीवी डिबेट्स और भ्रामक कंटेंट के जरिए ढाला जा रहा है:

डॉ. गीतांजलि जे. अंगमो:

"हर कोई शिक्षा सुधार की मांग कर रहा है, यह एक बहुत अच्छा विचार है। लेकिन क्या हम शुरुआत मीडिया सुधार से कर सकते हैं? आज हमें सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाले कोई स्कूल या शिक्षक नहीं, बल्कि टीवी स्टूडियो, व्हाट्सऐप फॉरवर्ड्स, यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया पर ट्रोल करने वाले लोग हैं। इनमें से कुछ हमें समझने से पहले नफरत करना, सोचने से पहले प्रतिक्रिया देना और सच्चाई के बजाय तयशुदा कहानियों पर अंधाधुंध भरोसा करना सिखाते हैं।"

"अंधभक्त हों या विरोधी, सब पर पड़ा है असर"

उन्होंने राजनीतिक रूप से बंट रहे समाज पर सीधा हमला बोलते हुए लिखा:

  • संकीर्ण सोच की ओर धक्का: "चाहे हम खुद को अंधभक्त कहें या किसी और राजनीतिक पहचान से जोड़ें, हम सभी किसी न किसी हद तक अधिक पक्षपाती और संकीर्ण सोच वाले बनने के लिए प्रभावित किए गए हैं।"

  • प्रोपेगेंडा और शिक्षा: उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा कि— "शिक्षा सुधार की बात बाद में कीजिए, पहले मीडिया में सुधार कीजिए। जिस देश को हर दिन प्रचार और प्रोपेगेंडा परोसा जाए, उसे शिक्षित नहीं किया जा सकता, उसे सिर्फ एक तय सोच के अनुसार ढाला जा सकता है।"

जंतर-मंतर आंदोलन के बाद मीडिया की भूमिका पर सवाल

37 दिनों तक चले नीट-यूजी आंदोलन के दौरान जिस तरह से मुख्यधारा के कई चैनलों द्वारा छात्रों की मांगों को नजरअंदाज किया गया या उन्हें अलग-अलग टैग दिए गए, उसी पृष्ठभूमि में डॉ. गीतांजलि का यह बयान आया है। सोनम वांगचुक और गीतांजलि अंगमो लगातार देश में सत्य, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की बहाली के लिए आवाज उठा रहे हैं।

बेबाक24 टेक

डॉ. गीतांजलि अंगमो ने भारतीय लोकतंत्र और मीडिया तंत्र के सबसे संवेदनशील नस पर हाथ रखा है। जब तक सूचना के प्राथमिक स्रोत (टीवी न्यूज, सोशल मीडिया और मैसेंजिंग ऐप्स) निष्पक्ष और सत्यनिष्ठ नहीं होंगे, तब तक केवल स्कूली पाठ्यक्रम बदलने से समाज में तार्किक और स्वतंत्र सोच का विकास संभव नहीं है।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment