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"धिक्कार है ऐसे नीच खयालों पर, क्या अनशन की पवित्रता साबित करने के लिए कैरेक्टर सर्टिफिकेट देना होगा?"— अनशन तोड़ने के बाद आरोपों पर फटे सोनम वांगचुक

by on | 2026-07-25 12:34:31

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"धिक्कार है ऐसे नीच खयालों पर, क्या अनशन की पवित्रता साबित करने के लिए कैरेक्टर सर्टिफिकेट देना होगा?"— अनशन तोड़ने के बाद आरोपों पर फटे सोनम वांगचुक

नई दिल्ली: 26 दिनों तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर रहने के बाद अस्पताल में केंद्रीय मंत्रियों के हाथों अनशन खत्म करने को लेकर उठ रहे सवालों और 'डील/सौदा' के आरोपों पर प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जबर्दस्त गुस्सा और दर्द छलका है।

मेदांता अस्पताल से जारी अपने भावुक और तीखे वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो उनके अनशन समाप्त करने की क्रोनोलॉजी और निष्ठा पर सवाल उठा रहे थे।


"11 किलो वजन घट गया, क्या मुझे कैरेक्टर सर्टिफिकेट देना होगा?"

सोनम वांगचुक ने बेहद दुखी और गुस्से में कहा कि लद्दाख की हाड़ कंपाने वाली ठंड से लेकर दिल्ली की चिलचिलाती धूप में बैठकर 26 दिन भूखा रहने के बाद भी लोग उन पर सौदेबाजी का आरोप लगा रहे हैं।

सोनम वांगचुक:

"यह वीडियो मैं थोड़ा दुख, थोड़ी हैरानी, थोड़े गम और गुस्से के साथ बना रहा हूं। अपने भाई-बहनों और छात्रों के लिए 26 दिन भूखा रहने के बाद, जिसमें मेरा 11 किलो शरीर खत्म हो चुका है, मसल्स चले गए हैं, ऑर्गन्स और दिमाग पर इररिवर्सिबल डैमेज (अपरिवर्तनीय क्षति) होने के कगार पर पहुंचा है... क्या मुझे किसी से कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेना होगा कि मेरा अनशन कितना पवित्र था?"

'डील' के आरोपों पर तीखा हमला: "धिक्कार है ऐसे दिमागों पर"

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के हाथों जूस पीकर अनशन तोड़ने पर लग रहे आरोपों का जवाब देते हुए वांगचुक ने कहा:

  • सौदा करने का आरोप बेबुनियाद: "मुझसे पूछा जा रहा है कि किसके हाथों अनशन तोड़ा? क्या डील हुई? क्या सौदा हुआ? अगर सौदा ही करना होता तो क्या 26 दिन तक भूखे मरना पड़ता? धिक्कार है ऐसे देश पर, जिसमें ऐसे दिमागों की उपज होती है और ऐसे नीच ख्याल निकलते हैं।"

सफदरजंग अस्पताल को बताया 'नॉर्थ कोरिया': पाबंदियों का खुलासा

सोनम वांगचुक ने बताया कि मेदांता शिफ्ट होने से पहले सफदरजंग अस्पताल में उन्हें किस तरह कैद करके रखा गया था:

  • छावनी जैसी स्थिति: "सफदरजंग अस्पताल एक छावनी बन गया था। कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। कमरे से बाहर जाने की इजाजत नहीं थी। मैं नैपकिन पेपर पर लिखकर संदेश बाहर भेजता था। लद्दाख से आए मेरे रिश्तेदारों को मिलने नहीं दिया गया। हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद मुझे जाने नहीं दिया गया। दिल्ली को एक तरह का 'नॉर्थ कोरिया' बना दिया गया था।"

विपक्षी सांसदों और CJP प्रतिनिधियों को रोकने का आरोप

वांगचुक ने खुलासा किया कि वे नेताओं व छात्रों की मौजूदगी में अनशन तोड़ना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने ऐसा होने नहीं दिया:

  • गेट पर रोका गया: वांगचुक के अनुसार, अगले दिन जब विपक्षी दलों के 15-20 सांसद और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की छात्राएं मिलने आईं, तो उन्हें 3-4 घंटे गेट पर रोक कर रखा गया और मिलने नहीं दिया गया।

  • छात्रों की सुरक्षा पर अड़े: उन्होंने कहा, "सरकार को छात्रों पर दर्ज केसों और एफ़आईआर पर बहुत ऐतराज था। लेकिन मैंने साफ कह दिया कि मैं अनशन तोड़कर चला जाऊं और पीछे से छात्रों पर केस चले, NSA लगे—इसके बिना मैं अनशन नहीं तोडूंगा।"

"थोड़ी संवेदना रखिए, प्यार की वाणी बोलिए"

संदेश के अंत में सोनम वांगचुक ने देशवासियों से संवेदनशीलता बरतने की भावुक अपील की:

सोनम वांगचुक:

"अभी मैं उठकर खड़ा भी नहीं हो पाया हूं और ऐसी बातें जो दिल को चीर कर जाती हैं, सुनने की हालत में नहीं हूं। कृपया अपनी वाणी को लगाम दीजिएगा। बोले तो प्यार की वाणी बोलिएगा, न बोले तो न ही बोलें, वह मेरे लिए ज्यादा मरहम होगा।"

बेबाक24 टेक

सोनम वांगचुक का यह बयान उन तमाम अटकलों और कयासों पर विराम लगाता है जो उनके अनशन समाप्त करने को लेकर बनाए जा रहे थे। 26 दिनों की शारीरिक प्रताड़ना और प्रशासनिक बंदिशों के बीच छात्रों के खिलाफ मुकदमों को रोकने की शर्त पर अड़े रहना यह साबित करता है कि वांगचुक का आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि नैतिक और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की लड़ाई थी।



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