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26 दिन बाद सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त; इसे आंदोलन की बड़ी जीत माना जाए या अधूरा मोड़?

by admin@bebak24.com on | 2026-07-24 17:36:51

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26 दिन बाद सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त; इसे आंदोलन की बड़ी जीत माना जाए या अधूरा मोड़?

नई दिल्ली/गुरुग्राम: नीट पेपर लीक, NTA में सुधार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना 26 दिनों का उपवास तोड़ दिया।

गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, डॉ. जितेंद्र सिंह और लद्दाख एपेक्स बॉडी के नेताओं की मौजूदगी में वांगचुक ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। हालांकि, उनके अनशन तोड़ने की शर्तों, राजनीतिक बयानों और आंदोलन के भविष्य को लेकर अब देश के राजनीतिक व सामाजिक हलकों में बहस छिड़ गई है।

वांगचुक ने क्यों तोड़ा अनशन? लिखित आश्वासन और हिंसा की आशंका

उपवास समाप्त करने के बाद जारी वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह फैसला देश में संभावित हिंसा को रोकने और 65 सांसदों की अपील के बाद लिया है।

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                │          अनशन समाप्ति के 3 मुख्य कारण         │
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│ 1. 65 सांसदों का     │    │ 2. सरकार से लिखित    │    │ 3. मृतक छात्रों के   │
│    समर्थन व अपील      │    │    आश्वासन (Fast-   │    │    परिजनों को उचित   │
│                      │    │    Track Court Bill) │    │    मुआवजा           │
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  • वांगचुक का बयान: "मैंने मंत्रियों से लिखित में आश्वासन लिया है कि सरकार पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कदम उठाएगी और जिन छात्रों ने मानसिक तनाव में आत्महत्या की, उनके परिवारों को मुआवजा मिलेगा। किसी भी तरह की हिंसा न होने देने के लिए सतर्क रहें।"

बीजेपी में भी उठे सवाल: मुरली मनोहर जोशी और निशिकांत दुबे का रुख

सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने से ठीक पहले बीजेपी के भीतर से भी छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग पर आवाजें उठने लगी थीं:

  • मुरली मनोहर जोशी (पूर्व शिक्षा मंत्री): "छात्रों की चिंताएं वास्तविक हैं। इन्हें केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानकर बलपूर्वक नहीं निपटाया जाना चाहिए। महिलाओं पर निर्मम बल प्रयोग देखकर पीड़ा हुई।"

  • प्रशासनिक सर्जरी: बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने बताया कि पीएम मोदी ने प्रशासनिक लापरवाही पर कार्रवाई करते हुए उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला पंचायती राज मंत्रालय में कर दिया है और नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया है।

विश्लेषकों और विपक्ष की प्रतिक्रिया: "जवाबदेही से भटकाव या रणनीतिक मोड़?"

सोनम वांगचुक के अनशन वापस लेने के तरीके पर बुद्धिजीवियों और राजनीतिक विश्लेषकों की राय बंटी नजर आ रही है:

प्रो. अपूर्वानंद (दिल्ली यूनिवर्सिटी):

"बेहद निराशाजनक है। अब जवाबदेही का बोझ सरकार से हटकर विपक्ष पर डाल दिया गया है। जब आप विपक्षी नेताओं से यह भरोसा मांग रहे हैं कि वे संसद में मुद्दा उठाएं, तो आपने सीधे तौर पर सरकार की जवाबदेही को वैकल्पिक बना दिया।"

  • गीतांजलि आंगमो (वांगचुक की पत्नी) का विवादित बयान: अनशन के दौरान राहुल गांधी के पीएम आवास के बाहर धरने को गीतांजलि ने 'दिखावा' करार दिया था, जिस पर विपक्षी दलों में नाराजगी दिखी।

  • सुशांत सिंह (येले यूनिवर्सिटी): "सरकार नौकरशाहों के तबादले करके प्रशासनिक कार्रवाई का नैरेटिव गढ़ रही है, लेकिन असली सवाल कायम है—इतनी बड़ी नाकामी के बाद भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों नहीं हुआ?"

  • अविनाश पालीवाल (यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन): "यह एक ऐतिहासिक मोड़ है। भारत का युवा और जेन-जी (Gen-Z) अब सिर्फ अपना हक, सम्मान और प्रशासनिक जवाबदेही मांग रहा है।"

अब आंदोलन का क्या होगा? CJP की दो टूक: "जंतर-मंतर पर धरना जारी रहेगा"

सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन थमा नहीं है:

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                               │     CJP का अगला कदम     │
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                                            │
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│ 1. धर्मेंद्र प्रधान के     ││ 2. 24 जुलाई को देशभर में    ││ 3. संसद के मॉनसून सत्र में  │
│    इस्तीफे की मांग पर कायम। ││    'देशव्यापी बंद/प्रदर्शन'। ││    विपक्ष के जरिए घेराबंदी। │
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  • अभिजीत दीपके (संस्थापक, CJP): "हमें खुशी है कि सोनम सर सुरक्षित हैं। लेकिन जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता और परीक्षा प्रणाली पारदर्शी नहीं बनती, जंतर-मंतर पर CJP का शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।"

बेबाक24 टेक

सोनम वांगचुक के अनशन वापस लेने से सरकार को फौरी राहत जरूर मिली है, लेकिन प्रशासनिक फेरबदल और कैबिनेट में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बिल लाने की घोषणा यह साबित करती है कि छात्र आंदोलन का दबाव काम कर रहा है।

बेबाक24 का मानना है कि यह आंदोलन अब किसी एक व्यक्ति या पार्टी का न रहकर देश के 22 लाख से अधिक प्रभावित युवाओं की आवाज बन चुका है। सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस छात्र असंतोष को शांत करने के लिए क्या राजनीतिक कदम उठाती है।



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