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CJP के छात्र आंदोलन पर देश की दिग्गजों ने तोड़ी चुप्पी! सलमान, आलिया, अरुंधति और नसीरुद्दीन शाह की दो टूक

by admin@bebak24.com on | 2026-07-23 23:58:23

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CJP के छात्र आंदोलन पर देश की दिग्गजों ने तोड़ी चुप्पी! सलमान, आलिया, अरुंधति और नसीरुद्दीन शाह की दो टूक

नई दिल्ली: नीट पेपर लीक, NTA में सुधार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब सिर्फ दिल्ली के जंतर-मंतर या सड़कों तक सीमित नहीं रहा है। 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च पर हुए लाठीचार्ज और सोनम वांगचुक के अनशन (26वां दिन) के बाद देश के सिनेमा, साहित्य, शिक्षण और राजनीतिक जगत की बड़ी हस्तियों ने इस आंदोलन पर खुलकर अपनी बात रखी है।

बॉलीवुड का रुख: सलमान, आलिया, अनुपम खेर और नसीरुद्दीन शाह

बॉलीवुड के दिग्गजों ने छात्रों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन किया है:

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                │             बॉलीवुड दिग्गजों के बयान         │
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│  सलमान खान (अभिनेता) │    │  आलिया भट्ट (अभिनेत्री)│    │ अनुपम खेर (अभिनेता)  │
│ • "यह आंदोलन बहुत    │    │ • "छात्रों के साहस ने│    │ • "छात्र देश की सबसे │
│   शांतिपूर्ण था। इसे │    │   दिल जीता, क्या हम  │    │   बड़ी उम्मीद हैं, पर│
│   राजनीतिक रंग न दिया│    │   उनकी आवाज सुन रहे  │    │   राजनीतिक औजार न   │
│   जाए।"              │    │   हैं?"              │    │   बनें।"             │
└──────────────────────┘    └──────────────────────┘    └──────────────────────┘
  • सलमान खान: "प्रश्नपत्र लीक बेहद गंभीर मुद्दा है। छात्र शांतिपूर्ण ढंग से देश का भविष्य बनाने के लिए खड़े हुए हैं। इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए, इसका श्रेय सिर्फ छात्रों को मिलना चाहिए। मुझे उम्मीद है सरकार सकारात्मक फैसला लेगी।"

  • आलिया भट्ट: "पिछले कुछ दिनों में जो हुआ उससे दिल टूटा है, लेकिन छात्रों के साहस ने उम्मीद जगाई है। वे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता बना रहे हैं।"

  • अनुपम खेर: "छात्र देश की पूंजी हैं। मैं उनके साथ हूं, लेकिन बड़े भाई के नाते एक सलाह है—अपने आंदोलन को किसी राजनीतिक दल का औजार मत बनने दीजिए। राजनीति घुसते ही आपकी सच्चाई पीछे छूट जाती है।"

  • नसीरुद्दीन शाह: "मेरा दिल गुस्से से खौल रहा है कि हमारे बच्चों के साथ कैसा जुल्म हो रहा है। नकाबपोश पुलिस कार्रवाई मुझे अमेरिका के ICE एजेंट्स की याद दिलाती है। युवाओं से अपील है कि वे हिम्मत न हारें।"

बौद्धिक और अकादमिक वर्ग: अरुंधति रॉय और प्रो. सविता झा

  • बुकर विजेता अरुंधति रॉय ('द वायर' में लेख):

    "कई वर्षों बाद पहली बार भारतीय होने पर गर्व और उम्मीद दोनों महसूस हो रहे हैं... 2014 से अब तक 152 पेपर लीक हो चुके हैं, जिसने लाखों युवाओं का जीवन तबाह कर दिया। अन्ना आंदोलन के उलट CJP के पास सिर्फ खुद पर और इंटरनेट पर भरोसा है। लेकिन इस जनाक्रोश को राजनीतिक दिशा मिलना भी जरूरी है।"

  • प्रो. सविता झा (दिल्ली यूनिवर्सिटी, 'इंडियन एक्सप्रेस' में लेख):

    "मेरी बेटी ने पूछा कि आप जंतर-मंतर क्यों नहीं गईं? तब मुझे अहसास हुआ कि हम आंदोलन की राजनीति देख रहे हैं, जबकि बच्चे उस 'वजह' को देख रहे हैं—वे छात्र जिन्होंने आत्महत्या कर ली। नचिकेता का आदर्श याद दिलाता है कि सभ्यताएं असहज सवालों से संवाद करने पर आगे बढ़ती हैं, दमन से नहीं।"

राजनीतिक/संसदीय दृष्टिकोण: शशि थरूर

  • कांग्रेस सांसद शशि थरूर ('इंडियन एक्सप्रेस' में लेख):

    "संवैधानिक लोकतंत्र की असली कसौटी यह है कि वह असहमति से कितनी विनम्रता से संवाद करता है। जब सेंट्रल दिल्ली आंसुओं और दर्द से भरी थी, तब संसद के भीतर चर्चा के सभी नोटिसों को खारिज कर दिया गया। जब कार्यपालिका संसद से मुंह मोड़ती है, तो वह लोकतंत्र की मूल भावना पर चोट करती है।"

बेबाक24 टेक

चाहे सिनेमा जगत के सितारे हों, लेखक हों या यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर—सबका एक सुर में यह मानना है कि देश के युवाओं और छात्रों की यह लड़ाई पूरी तरह जायज है।

बेबाक24 का मानना है कि जब समाज का हर वर्ग मुख्यधारा के प्लेटफॉर्म्स से हटकर छात्रों के समर्थन में आने लगे, तो सरकार को इसे 'राजनीतिक औजार' मानने के बजाय तुरंत संवेदनशील संवाद का रास्ता अख्तियार करना चाहिए।



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