by admin@bebak24.com on | 2025-11-17 23:11:31
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बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को 'मानवता के खिलाफ अपराधों' (Crimes Against Humanity) के एक मामले में विशेष न्यायाधिकरण (International Crimes Tribunal-ICT) ने मौत की सज़ा सुनाई है। यह ऐतिहासिक फैसला पिछले साल (2024) छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनकी सरकार की घातक कार्रवाई से संबंधित है, जिसके कारण उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी थी।
न्यायाधिकरण ने हसीना को उनकी अनुपस्थिति में (in absentia) दोषी ठहराया है, क्योंकि वह अपनी सरकार गिरने के बाद भारत में शरण लिए हुए हैं।
पूरा मामला और सज़ा का आधार
यह मामला पिछले साल जुलाई और अगस्त में देशव्यापी छात्र-नेतृत्व वाले व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है।
- मुख्य आरोप: शेख हसीना पर निहत्थे प्रदर्शनकारियों और नागरिकों के खिलाफ जानलेवा गोलीबारी, हत्या, यातना, और अन्य अमानवीय कृत्यों का आदेश देने का आरोप है।
- ICT का फैसला: इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष ने बिना किसी संदेह के यह स्थापित किया है कि इन घातक कृत्यों के पीछे सीधे तौर पर हसीना का आदेश था। उन्हें कई गंभीर आरोपों में दोषी पाया गया है।
- अन्य सज़ा: हसीना के साथ ही, उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी इसी मामले में मौत की सज़ा सुनाई गई है।
भारत और प्रत्यर्पण की मांग
इस फैसले ने भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ा दिया है:
- बांग्लादेश की मांग: डॉ. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण (Extradition) की औपचारिक मांग की है। बांग्लादेश ने इसके लिए दोनों देशों के बीच 2013 में हुई प्रत्यर्पण संधि का हवाला दिया है।
- भारत का रुख: भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उन्होंने बांग्लादेश में घटनाक्रम का संज्ञान लिया है। भारत ने यह भी दोहराया कि वह पड़ोसी देश में शांति, लोकतंत्र और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ा रहेगा। हालांकि, प्रत्यर्पण की मांग पर भारत ने अभी तक कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया है।
शेख हसीना की प्रतिक्रिया
शेख हसीना ने इस फैसले को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि अंतरिम सरकार के उग्र तत्व उनकी पार्टी, अवामी लीग, को राजनीतिक परिदृश्य से मिटाना चाहते हैं और ICT कोई निष्पक्ष अदालत नहीं है, बल्कि एक "धांधली से भरा न्यायाधिकरण" है।
यह घटनाक्रम बांग्लादेश के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है, जबकि भारत के लिए यह एक जटिल कूटनीतिक चुनौती पेश करता है।
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