by on | 2026-07-18 18:34:42
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वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व में चल रहे भारी तनाव के बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई की रहस्यमयी स्थिति को लेकर वैश्विक कूटनीति और राजनीति में अटकलें बेहद तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में ईरान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के पूरी तरह ध्वस्त होने का दावा करते हुए बड़ा बयान दिया है। ट्रंप के मुताबिक, पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा भी शारीरिक रूप से लगभग खत्म होने की कगार पर हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में ईरान की मौजूदा स्थिति पर बेहद तीखा और बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा:
"ईरान के पास अब कोई नौसेना नहीं बची है, उनकी वायु सेना और एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह तबाह हो चुका है। उनके सबसे बेहतरीन लीडर्स मारे जा चुके हैं। अली ख़ामेनेई खत्म हो चुके हैं और उनके बेटे (मोजतबा ख़ामेनेई) भी 90 प्रतिशत खत्म हो चुके हैं।"
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मोजतबा ख़ामेनेई को मार्च 2026 में ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किए जाने के बाद से एक बार भी सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। वे अपने पिता के अंतिम संस्कार और आधिकारिक श्रद्धांजलि सभा में भी शामिल नहीं हुए, जिसने इन दावों को और हवा दे दी है।
मोजतबा ख़ामेनेई के सामने न आने की असली वजह अमेरिकी अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक हालिया रिपोर्ट में सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक बड़े हवाई हमले में पूर्व सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई की मौत हो गई थी, और उसी हमले में मोजतबा भी गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे।
ईरानी अधिकारियों के हवाले से मोजतबा की मेडिकल स्थिति को लेकर निम्नलिखित जानकारियां सामने आई हैं:
गंभीर सर्जरी और कृत्रिम पैर: मोजतबा के एक पैर का तीन बार ऑपरेशन हो चुका है और उन्हें प्रोस्थेटिक (कृत्रिम पैर) लगाए जाने का इंतजार है। इसके अलावा उनके एक हाथ की भी सर्जरी हुई है।
बोलने में कठिनाई और प्लास्टिक सर्जरी: हमले में उनका चेहरा और होंठ बुरी तरह झुलस गए थे, जिसकी वजह से उन्हें बोलने में काफी दिक्कत आ रही है और आने वाले समय में उन्हें प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत होगी।
मानसिक रूप से सक्रिय: रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शारीरिक रूप से गंभीर रूप से अक्षम होने के बावजूद मोजतबा मानसिक रूप से पूरी तरह सक्रिय हैं। हालांकि, उन्होंने अस्थायी रूप से निर्णय लेने की कमान रिवॉल्युशनरी गार्ड्स (IRGC) के जनरलों को सौंप दी है।
सार्वजनिक रूप से गायब रहने के बावजूद मोजतबा ख़ामेनेई के नाम से लगातार लिखित बयान जारी किए जा रहे हैं। शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में उन्होंने अपने पिता की हत्या का बदला लेने का संकल्प दोहराया। बयान में कहा गया कि दुनिया भर में ऐसे स्वतंत्र लोग मौजूद हैं जो बहुत जल्द इस मिशन में अपना-अपना हिस्सा पूरा करेंगे और इस युद्ध में शहीद हुए लोगों के खून का बदला लेंगे।
इससे पहले जून में भी उनके नाम से एक बयान आया था, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति मसूद पेज़श्कियान के आश्वासनों के बाद अमेरिका के साथ हुए एक समझौते को सशर्त मंजूरी देने की बात कही थी, जिसने ईरान की घरेलू राजनीति में तीखी बहस छेड़ दी है।
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सर्वोच्च नेता का पद सबसे शक्तिशाली होता है, जिसके पास सेना की कमान, न्यायपालिका के प्रमुख की नियुक्ति और युद्ध या शांति की घोषणा करने का अंतिम अधिकार होता है। पिछले 37 वर्षों (1989 से 2026) तक अली ख़ामेनेई ने एक मजबूत केंद्रीय सत्ता के रूप में ईरान पर नियंत्रण रखा।
स्कॉटलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्रयूज़ के इतिहासकार अली अंसारी का मानना है कि मोजतबा की अनुपस्थिति के कारण ईरान में इस समय कोई प्रभावी केंद्रीय सत्ता नहीं है जो अलग-अलग गुटों (जैसे कट्टपंथी जनरल्स और सुधारवादी गुट) के बीच चल रहे सत्ता संघर्ष को संभाल सके। जब तक देश की जनता अपने सर्वोच्च नेता को देख या सुन नहीं लेती, तब तक यह अनिश्चितता बनी रहेगी कि ईरान को वास्तव में कौन चला रहा है।
ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े नेतृत्व संकट से गुजर रहा है। एक तरफ बाहरी मोर्चे पर इजरायल और अमेरिका के हमलों से उसका सैन्य ढांचा कमजोर हुआ है, तो दूसरी तरफ अंदरूनी मोर्चे पर एक 'अदृश्य' सर्वोच्च नेता के भरोसे देश चल रहा है। केवल लिखित बयानों के आधार पर किसी देश की जनता और सेना को लंबे समय तक एकजुट नहीं रखा जा सकता।
बेबाक24 का विश्लेषण कहता है कि डोनाल्ड ट्रंप का '90 फीसदी खत्म' होने वाला बयान भले ही मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा हो, लेकिन इसमें सच्चाई के अंश जरूर हैं। मोजतबा ख़ामेनेई का अपने ही पिता के जनाजे में न आना यह साबित करता है कि वे गहरे शारीरिक संकट में हैं। ऐसी स्थिति में ईरान की कमान असल में रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के जनरलों के हाथ में जा चुकी है, जो आने वाले दिनों में मध्य पूर्व को और अधिक आक्रामक और अनियंत्रित युद्ध की ओर धकेल सकते हैं।
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