by admin@bebak24.com on | 2026-07-18 17:30:40
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नई दिल्ली: नीट परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे मशहूर सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से जबरन हटा दिया। भूख हड़ताल के 21वें दिन प्रवेश करते ही पुलिस ने यह एक्शन लिया और उन्हें सीधे सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया। इस कार्रवाई के दौरान जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और प्रदर्शनकारियों के साथ तीखी नोकझोंक और हल्की हाथापाई की खबरें भी सामने आ रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम, सोनम वांगचुक की सेहत और आगे के आंदोलन को लेकर तैयार की गई विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट:
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने की खबर मिलते ही उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो सफदरजंग अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए डॉक्टरों से अपील की है कि उनके पति को बिना मर्जी के कोई भी दवा या ड्रिप न दी जाए।
गीतांजलि ने बताया कि डॉक्टरों के मुताबिक सोनम वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर तेजी से गिरा है। शुक्रवार तक जो पोटैशियम लेवल 4.3 था, वह घटकर 2.9 पर पहुंच गया है, जिसे डॉक्टर्स जान के लिए जोखिम भरा मान रहे हैं। हालांकि, गीतांजलि का आरोप है कि शुक्रवार शाम को ही डॉक्टरों ने जब जांच की थी, तब सभी स्वास्थ्य मानक सामान्य थे और इस तरह अचानक तड़के बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें अस्पताल लाना समझ से परे है।
सफदरजंग अस्पताल प्रशासन की तरफ से जारी जानकारी के मुताबिक, सोनम वांगचुक को सुबह करीब 7:40 बजे इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में लाया गया था, जिसके बाद उन्हें मेडिसिन विभाग में शिफ्ट कर दिया गया।
अस्पताल की डॉक्टर चारु बंबा ने बताया कि लंबे समय से उपवास पर रहने के कारण उनके शरीर में हल्की कमजोरी और पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) देखी गई है। पानी की कमी की वजह से इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन थोड़ा बिगड़ा है, जिसे ठीक करने के लिए उन्हें डॉक्टरों की सख्त निगरानी में रखा गया है। फिलहाल वह पूरी तरह होश में हैं और उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। भूख हड़ताल शुरू करने के बाद से वांगचुक का वजन 9 किलोग्राम से ज्यादा घट चुका है।
इस पूरे एक्शन पर नई दिल्ली के डीसीपी ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के आधार पर की गई है। कोर्ट ने प्रशासन को वांगचुक की सेहत पर लगातार नजर रखने और स्थिति बिगड़ने पर जरूरी मेडिकल केयर देने के निर्देश दिए थे।
पुलिस का कहना है कि जब वे हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए वांगचुक को अस्पताल ले जा रहे थे, तब वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों ने रुकावट डालने की कोशिश की, जिससे थोड़ी अफरा-तफरी मची। पुलिस ने आंदोलनकारियों से जंतर-मंतर को जल्द से जल्द और शांतिपूर्वक खाली करने की अपील की है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस पर मारपीट और जबरन गिरफ्तारी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब वह सुबह फ्रेश होने गए थे, तभी सिविल ड्रेस में आए पुलिसवालों ने 60 साल के बुजुर्ग एक्टिविस्ट को घसीटकर गाड़ी में बिठाया। दीपके ने घोषणा की है कि सोनम वांगचुक की अनुपस्थिति में अब वे खुद बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
वहीं, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने साफ कर दिया है कि अगर सोनम अस्पताल से बाहर नहीं आ पाते हैं, तो सोमवार (20 जुलाई) को होने वाले 'चलो संसद' मार्च का नेतृत्व वह खुद करेंगी। सीजेपी का यह आंदोलन 20 जून से चल रहा है, जिसकी मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में बड़ा सुधार करना है।
सोनम वांगचुक को धरना स्थल से हटाए जाने पर देश में सियासी पारा चढ़ गया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता का यह अहंकार लंबे समय तक नहीं चलेगा। युवाओं की मांग सुनने के बजाय 21 दिनों से अनशन कर रहे व्यक्ति को जबरन गिरफ्तार करना गुंडागर्दी है।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी इस कदम की निंदा की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे सोशल एक्टिविस्ट को इस तरह हटाना लोकतंत्र और संविधान को कुचलने जैसा है। बीजेपी सरकार को अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
शुक्रवार शाम को अपने 20वें दिन का अनशन खत्म करते हुए सोनम वांगचुक ने एक भावुक वीडियो संदेश जारी किया था। उन्होंने देश की जनता से 20 जुलाई के संसद मार्च में जुटने की अपील करते हुए कहा था, "मैं अभी जिंदा हूं। मेरे शरीर की चर्बी और मांसपेशियां खत्म हो चुकी हैं, इसके बाद अंगों पर असर पड़ेगा। लेकिन मैं साबित करना चाहता हूं कि मेरा दिमाग अभी भी पूरी तरह काम कर रहा है।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस आंदोलन से शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होगा, तो उन्होंने इतिहास की याद दिलाते हुए कहा, "लोग जन आंदोलनों की ताकत भूल जाते हैं। भारत में प्याज की बढ़ती कीमतों पर जनता के गुस्से ने तीन बार (1980 में केंद्र, 1998 में दिल्ली और राजस्थान) सरकारें गिरा दी थीं। तो क्या देश के लोग अपने बच्चों की जिंदगी और उनकी शिक्षा से प्याज से भी कम प्यार करते हैं?"
21 दिनों से देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा में सुधार के लिए अनशन पर बैठे एक सम्मानित एक्टिविस्ट को सुबह के अंधेरे में जबरन उठाना लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। कोर्ट का आदेश स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए हो सकता है, लेकिन प्रदर्शनकारियों और वांगचुक के परिवार को भरोसे में लिए बिना किया गया यह एक्शन पुलिसिया हठधर्मिता को दर्शाता है।
बेबाक24 का मानना है कि नीट परीक्षा को लेकर देश के युवाओं में भारी असंतोष है। सरकार को लाठी या जबरन मेडिकल इमरजेंसी का सहारा लेने के बजाय सीधे प्रदर्शनकारियों की मेज पर आकर बातचीत करनी चाहिए। परीक्षा सुधारों और पारदर्शिता की मांग को दबाने की हर कोशिश इस आंदोलन की आग को और भड़काएगी, जिसका ट्रेलर सोमवार को होने वाले संसद मार्च में देखने को मिल सकता है।
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