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रामपुर विकास प्राधिकरण का बड़ा एक्शन: मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने का नोटिस

by admin@bebak24.com on | 2026-07-18 14:50:50

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रामपुर विकास प्राधिकरण का बड़ा एक्शन: मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने का नोटिस

रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आज़म ख़ान के ड्रीम प्रोजेक्ट, मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर कानूनी संकट गहरा गया है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर बनी 40 इमारतों में से 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस फैसले के बाद से रामपुर की स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।

प्रशासन की इस कार्रवाई के पीछे की मुख्य वजहों, राजनीतिक विरोध और वहां पढ़ रहे हजारों छात्रों के भविष्य को लेकर तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट:

बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण का आरोप

रामपुर विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन ने इस कड़े कदम के पीछे मुख्य रूप से तकनीकी और वैधानिक नियमों की अनदेखी को आधार बनाया है। आरडीए का कहना है कि यूनिवर्सिटी परिसर में बनी 38 इमारतों का निर्माण बिना कोई आधिकारिक नक्शा पास कराए किया गया है।

प्रशासन ने इस कार्रवाई से पहले प्रबंधन को 15 दिनों का समय दिया है ताकि वे खुद इन निर्माणों को हटा सकें। रामपुर के ज़िलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समयसीमा के भीतर प्रबंधन कदम नहीं उठाता है, तो प्रशासन कानून के मुताबिक ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू करेगा।

आरडीए और जिला पंचायत क्षेत्र का कानूनी पेंच

इस पूरे मामले पर आज़म ख़ान के समर्थकों और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका तर्क है कि जिन इमारतों को लेकर नोटिस जारी हुए हैं, उनका निर्माण उस दौर में हुआ था जब यह पूरा इलाका रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के दायरे में नहीं आता था, बल्कि जिला पंचायत के अधीन था।

हालांकि, प्रशासन ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा है कि यह क्षेत्र भले ही साल 2024 में आरडीए के अधीन आया हो, लेकिन जांच में यह बात सामने आई है कि इन 38 भवनों का नक्शा तत्कालीन जिला पंचायत से भी मंजूर नहीं कराया गया था। पूरे परिसर में केवल 2 ही ऐसी इमारतें हैं जिनका नक्शा जिला पंचायत से पास था, जिससे साफ होता है कि नियमों की जानकारी होने के बावजूद बाकी निर्माणों में लापरवाही बरती गई।

प्रशासन की कानूनी तैयारी और कैविएट दाखिल

कार्रवाई के खिलाफ आज़म ख़ान के परिवार और जौहर ट्रस्ट द्वारा कोर्ट जाने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही मोर्चाबंदी कर ली है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक कैविएट दाखिल की है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर यूनिवर्सिटी प्रबंधन अदालत से इस आदेश पर स्टे या किसी भी तरह की राहत की मांग करता है, तो माननीय अदालत आरडीए का पक्ष सुने बिना कोई एकतरफा अंतरिम आदेश जारी नहीं करेगी।

यूनिवर्सिटी के 3,000 छात्रों के भविष्य पर क्या है योजना?

इस बड़ी प्रशासनिक रस्साकशी के बीच सबसे बड़ा सवाल उन 3,000 छात्र-छात्राओं के भविष्य को लेकर उठ रहा है जो यहां साइंस, आर्ट्स, लॉ, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट जैसे तमाम कोर्सेज की पढ़ाई कर रहे हैं। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और उनमें किसी तरह का डर न फैले, इसके लिए प्रशासन ने विशेष कदम उठाए हैं:

  • काउंसलिंग सेंटर की शुरुआत: यूनिवर्सिटी के मेन गेट पर एक छात्र परामर्श केंद्र बनाया गया है, जहां उच्च शिक्षा विभाग के प्रोफेसर्स की टीम तैनात की गई है।

  • दूसरे कॉलेजों में एडमिशन का विकल्प: इस काउंसलिंग टीम के सदस्य और राजकीय रज़ा डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर अरशद रिज़वी के मुताबिक, बच्चों को गाइड किया जा रहा है कि उनका साल खराब नहीं होने दिया जाएगा। उन्हें दूसरे नजदीकी सरकारी और प्रतिष्ठित डिग्री कॉलेजों में एडमिशन दिलाने की पूरी व्यवस्था समझाई जा रही है।

प्रोजेक्ट प्रोफाइल और विवादों का पुराना इतिहास

लगभग 250 एकड़ से ज्यादा बड़े एरिया में फैली मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की नींव साल 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने रखी थी और साल 2012 में अखिलेश यादव सरकार के दौरान यहां पढ़ाई शुरू हुई थी। आज़म ख़ान इस यूनिवर्सिटी को अपने जीवन का सबसे बड़ा सपना बताते रहे हैं।

हालांकि, साल 2017 में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही यह प्रोजेक्ट लगातार कानूनी विवादों में घिरा रहा है। जमीन अधिग्रहण से जुड़े किसानों के मुकदमों से लेकर शत्रु संपत्ति (Enemy Property) को कैंपस की सीमा में शामिल करने जैसे कई गंभीर मामलों की जांच और ट्रायल अलग-अलग अदालतों में पहले से ही चल रहे हैं। विपक्ष जहां इसे राजनीतिक प्रतिशोध का नाम दे रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि हर कदम कानून के दायरे में रहकर उठाया जा रहा है।



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