ब्रेकिंग न्यूज़
सोमनाथ में श्रद्धा और शक्ति का सैलाब: पीएम मोदी ने डमरू बजाकर और त्रिशूल थामकर किया 'शौर्य यात्रा' का शंखनाद
शहर और राज्य राज्य

बीज पर सख्ती, खाद पर लाचारी: गाजीपुर में खाद माफियाओं के आगे प्रशासन बेबस!

by admin@bebak24.com on | 2025-11-16 20:27:10

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3160


बीज पर सख्ती, खाद पर लाचारी: गाजीपुर में खाद माफियाओं के आगे प्रशासन बेबस!

गाजीपुर : जनपद में किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज और उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने के सरकारी प्रयासों में विरोधाभास साफ दिख रहा है। एक ओर जिलाधिकारी के निर्देश पर बीज की कालाबाजारी और मिलावट रोकने के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है, वहीं दूसरी ओर खाद माफियाओं के सिंडिकेट के सामने जिला प्रशासन लाचार नजर आ रहा है। खाद की ओवररेटिंग और कालाबाजारी खुलेआम जारी है, जिससे किसानों की कमर टूट रही है।

बीज पर 'ऑपरेशन शुद्धता'

किसानों को उचित मूल्य पर बीज उपलब्ध कराने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शासन के निर्देश पर गाजीपुर में "बीज छापा अभियान" चलाया गया। 15 नवंबर 2025 (गुरुवार) को बीज निरीक्षक और अन्य विभागीय अधिकारियों की संयुक्त टीम ने जनपद के संस्थागत और निजी बीज विक्रेताओं के बिक्री केंद्रों/गोदामों पर व्यापक कार्रवाई की।

 कुल जांच: 40 बिक्री केंद्रों की जांच की गई।

 नमूने: जांच के दौरान 33 बीज नमूने गृहीत किए गए हैं, जिन्हें गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाएगा।

 टीम गठन: जिलाधिकारी गाजीपुर द्वारा तहसीलवार टीम का गठन किया गया, जिसमें उप कृषि निदेशक, जिला उद्यान अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, जिला गन्ना अधिकारी, अपर जिला कृषि अधिकारी और विषय वस्तु विशेषज्ञ शामिल थे।

 आवंटित क्षेत्र: टीमों को तहसील सदर, सैदपुर, कासिमाबाद, मोहम्मदाबाद, जखनिया, जमानिया और सेवराई आवंटित किए गए।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध रूप से व्यापार तथा बीजों की कालाबाजारी करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध यह अभियान निरंतर चलता रहेगा।

  खाद पर लाचारी: खुलेआम लूट

बीज पर प्रशासन की सख्ती के विपरीत, खाद की कालाबाजारी और ओवररेटिंग को रोकने में जिला प्रशासन की लाचारी स्पष्ट दिखती है। खाद माफियाओं का सिंडिकेट अरबों का अवैध कारोबार कर रहा है, और सरकार इसे रोकने में विफल साबित हो रही है।

किसानों को निर्धारित मूल्य से काफी अधिक दरों पर खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है:

 * डीएपी (DAP): ₹1350 के निर्धारित मूल्य के बदले, निजी दुकानों पर यह ₹1500 से ₹1600 में बेची जा रही है।

 * यूरिया: यूरिया भी निर्धारित मूल्य से अधिक, ₹340 में खुलेआम बिक रही है।

वर्तमान रबी सीजन में जब बुवाई का उपयुक्त समय चल रहा है, तब खाद और बीज दोनों ही किसानों की सबसे बड़ी जरूरत हैं। ऐसे में बीज पर आंशिक सफलता के बावजूद, खाद पर प्रशासन की चुप्पी किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

> प्रश्न यह है कि बीज पर सख्ती दिखाने वाला जिला प्रशासन खाद माफियाओं के सिंडिकेट पर कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहा है? क्या यह 'लाचारी' है, या फिर यह अवैध कारोबार किसी बड़े सिंडिकेट के संरक्षण में चल रहा है?



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment