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गंगा में लापरवाही पर लगेगा 'ब्रेक': 119 नाविकों को बंटीं 974 फ्री लाइफ जैकेट, अब बहानेबाजी नहीं चलेगी!

by on | 2026-05-31 20:10:49

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गंगा में लापरवाही पर लगेगा 'ब्रेक': 119 नाविकों को बंटीं 974 फ्री लाइफ जैकेट, अब बहानेबाजी नहीं चलेगी!


वाराणसी। गंगा की लहरों पर सैर-सपाटा करने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है। अब 'बाबा की नगरी' में नौका विहार पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित होने जा रहा है। जिला प्रशासन ने गंगा में होने वाले हादसों पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए कमर कस ली है। इसी कड़ी में रविवार को नमो घाट (फेज-2) पर एक बड़ा अभियान चलाते हुए 119 नाविकों को कुल 974 लाइफ जैकेट बिल्कुल मुफ्त बांटी गईं।

​यह कदम जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और यूपी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साझा सहयोग से उठाया गया है।

यात्रियों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: ADM

​कार्यक्रम में मौजूद अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. सदानन्द गुप्ता ने दो टूक शब्दों में कहा कि गंगा में हर दिन हजारों लोग नाव की सवारी करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

"प्रशासन का साफ स्टैंड है—जल दुर्घटनाओं में जनहानि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बनारस की सभी रजिस्टर्ड नावों को उनकी क्षमता के हिसाब से फेज वाइज फ्री लाइफ जैकेट दी जा रही है। अब नाविकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।"

— डॉ. सदानन्द गुप्ता, ADM (F&R)

प्रशासन का 'कड़ा अल्टीमेटम', नाविकों को मानने होंगे ये 5 नियम:

​लाइफ जैकेट थमाने के साथ ही प्रशासन ने नाविकों को सख्त हिदायत भी दे दी है। अब नाव चलाने से पहले इन गाइडलाइंस का पालन करना अनिवार्य होगा:

चेकिंग जरूरी: हर ट्रिप से पहले लाइफ जैकेट की कंडीशन चेक करनी होगी।


नो जैकेट, नो राइड: नाव में बैठने वाले हर एक यात्री को लाइफ जैकेट पहनाना अनिवार्य है।


ओवरलोडिंग पर नो टॉलरेंस: नाव की जितनी क्षमता तय है, उससे एक भी आदमी ज्यादा बैठाया तो खैर नहीं।


मौसम से पंगा नहीं: आंधी-तूफान, तेज हवा या गंगा का जलस्तर बढ़ने पर नाव का संचालन पूरी तरह बंद रखना होगा।


अलर्ट पर नजर: मौसम विभाग और प्रशासन के हर निर्देश को मानना ही पड़ेगा।


क्यों जरूरी है यह सख्ती?

​जानकारों की मानें तो पानी में हादसा होने पर लाइफ जैकेट ही जिंदगी और मौत के बीच का सबसे बड़ा सहारा बनती है। यह न सिर्फ इंसान को डूबने से बचाती है, बल्कि रेस्क्यू टीम (NDRF/जल पुलिस) को राहत कार्य के लिए जरूरी वक्त भी दे देती है।

​वाराणसी जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि "सुरक्षा सबसे पहले" के नियम के तहत अब हर नाविक को जिम्मेदार बनना ही होगा। इस पूरे अभियान को जमीन पर उतारने में एनडीआरएफ, जल पुलिस और आपदा मित्रों ने अहम भूमिका निभाई।

बेबाक 24 : प्रशासन ने मुफ्त में जैकेट बांटकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब यह सुनिश्चित किया जाए कि नाविक सच में यात्रियों को जैकेट पहना रहे हैं या ये सिर्फ नाव के कोने में शो-पीस बनकर धूल खा रही हैं। नियम का पालन कराने के लिए घाटों पर कड़े पहरे की जरूरत है!



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