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मुख्तार का 'क्रिकेट पार्टनर', जो जुर्म की पिच पर बिछाता था फील्डिंग: जानें कौन है 4 करोड़ की संपत्ति गंवाने वाला जफर उर्फ चंदा

by on | 2026-05-31 19:28:54

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मुख्तार का 'क्रिकेट पार्टनर', जो जुर्म की पिच पर बिछाता था फील्डिंग: जानें कौन है 4 करोड़ की संपत्ति गंवाने वाला जफर उर्फ चंदा


बाराबंकी/वाराणसी:

बाराबंकी गैंगस्टर कोर्ट से 4 करोड़ की संपत्ति पर दावा खारिज होने के बाद मुख्तार अंसारी गैंग का सिपहसालार जफर उर्फ चंदा एक बार फिर सुर्खियों में है। यह सिर्फ एक अदालती फैसला नहीं है, बल्कि उस तिलिस्म का टूटना है जो दशकों से पूर्वांचल के जरायम जगत में अपनी खास 'फील्डिंग' के लिए जाना जाता था। आइए खंगालते हैं चंदा की वो पूरी कुंडली, जो क्रिकेट के मैदान से शुरू होकर जुर्म के गलियारों तक पहुंची।

​ क्रिकेट की दोस्ती से जुर्म के 'टीम वर्क' तक

​जफर खां उर्फ चंदा और मुख्तार अंसारी की ट्यूनिंग कोई नई नहीं है। जानकार बताते हैं कि इन दोनों की जोड़ी कभी क्रिकेट के मैदान पर मशहूर हुआ करती थी। मैदान पर मैच जीतने के लिए दोनों मिलकर ऐसा जाल बिछाते थे कि विरोधी पस्त हो जाते थे।

जरायम में 'टीम भावना': खेल के मैदान की यही 'टीम भावना' आगे चलकर जरायम की दुनिया में मुख्तार अंसारी की सबसे बड़ी ताकत बनी।


माफिया का 'चीफ फील्डर': मुख्तार गैंग के लिए किस वक्त, कहां और कैसी फील्डिंग सजानी है, यह तय करने का जिम्मा अक्सर जफर खां चंदा के पास ही होता था।


​ पठान टोले का 'सुल्तान', रसूखदारों पर भारी

​गाजीपुर के मोहम्दाबाद का भठ्ठी मोहल्ला चंदा का गढ़ माना जाता था। एक दौर में वह इस इलाके का 'सुल्तान' बनकर उभरा। उसका दबदबा ऐसा था कि इलाके के कई रसूखदार और असरदार पठान परिवार भी उसके सामने बेबस नजर आते थे। मुख्तार के संरक्षण ने चंदा के इस रसूख को और धार दे दी थी।

​ विधायक हत्याकांड और 'राय साहब' की फील्डिंग

​चंदा की सबसे खतरनाक फील्डिंग पूर्वांचल के चर्चित विधायक हत्याकांड में देखने को मिली थी। सूत्रों की मानें तो:

गवाहों को तोड़ने का खेल: सीबीआई और न्याय प्रणाली की नाक के नीचे गवाहों को प्रभावित करने और उन्हें तोड़ने के लिए चंदा ने एक 'राय साहब' को मोहरे की तरह आगे किया था।


संसद तक का सफर: खैर, उस वक्त तो न्याय को मुंह की खानी पड़ी, लेकिन इस 'वफादारी' के बदले राय साहब को माफिया के आशीर्वाद से इनाम भी भरपूर मिला ।


​समय के साथ 'पाला बदलने' का हुनर

​यह इस पूरे सिंडिकेट की पुरानी खूबी रही है—समय के साथ रंग बदलना और कानूनी शिकंजे से बच निकलना।

नई सियासी जमीन की तलाश: चर्चा है कि जेल से बाहर आने के बाद चंदा ने भी वक्त की नजाकत को भांपते हुए पाला बदल लिया है। और इन दिनों राय साहब पूर्वांचल की कई सीटों पर सियासी जमीन तलाश रहे है और 30-40 गाड़ियों के काफिले के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे है।


बदलते समीकरण: सिर्फ चंदा ही नहीं, पूर्व सांसद अतुल राय, विधायक अभय सिंह ,उमेश राय गोरा, अंगद राय, मैनेजर अखंड प्रताप राय और एमएलसी विशाल सिंह चंचल जैसे कई नाम, जो कभी मुख्तार के बेहद खास या समीकरणों के इर्द-गिर्द थे, आज बदलते वक्त के साथ अपनी-अपनी गोटियां सेट करने में जुटे हैं। कोई पर्दे के पीछे से तो कोई सीधे तौर पर पाला बदलकर अपनी राह चुन चुका है।


बेबाक टिप्पणी: जफर उर्फ चंदा की 4 करोड़ की संपत्ति का जब्त होना यह साफ करता है कि जरायम की पिच पर चाहे जितनी सधी हुई फील्डिंग सजाई गई हो, कानून के 'बुलडोजर एक्शन' और अदालती हंटर के आगे हर चाल अंततः ढेर हो ही जाती है। अतीत के रसूखदार अब सिर्फ अपनी साख बचाने की जुगत में हैं।




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