by on | 2026-05-06 20:00:03
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सन्तोष राय
लखनऊ | उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट आए हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों में लखनऊ का मेदांता अस्पताल केवल एक चिकित्सा केंद्र नहीं, बल्कि भारत की साझा संस्कृति और अटूट 'गंगा-जमुनी तहजीब' का एक जीवंत संगम बना रहा। बीमारी के दौरान अजय राय को मिले समाज के प्रबुद्ध स्तंभों और धर्मगुरुओं के स्नेह ने यह साबित कर दिया कि वैचारिक मतभेदों और नफरत की आंधियों के बीच भी आपसी भाईचारे की जड़ें बहुत गहरी हैं।
मजहब की दीवारों से ऊंचा 'अपनत्व': दुआओं का दौर
अस्पताल में अजय राय के स्वास्थ्य लाभ के दौरान समाज के हर वर्ग के प्रमुख चेहरों का तांता लगा रहा। यह मुलाकाते महज औपचारिक नहीं, बल्कि उस समावेशी भारत की शक्ति का प्रदर्शन थीं जिसे अजय राय अपनी राजनीति का आधार मानते हैं:
साझा विरासत की झलक: शिया मरकज़ी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी और 'इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड' के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने भेंट कर उनके जल्द पूर्णतः स्वस्थ होने की दुआ की।
दुआओं का संगम: टीले वाली मस्जिद के शाही इमाम मौलाना सैयद फ़ज़लुल मन्नान रहमानी और शाही इमाम ईदगाह मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि अजय राय का व्यक्तित्व दलीय सीमाओं से कहीं ऊपर है।
अजय राय: वो लड़ाका जिसने मोदी के गढ़ में फूंका चुनौती का शंखनाद
इस खबर के साथ यह समझना जरूरी है कि आखिर क्यों अजय राय के लिए दुआओं का यह सैलाब उमड़ा। उत्तर प्रदेश की सियासत में उन्हें उस 'जुझारू योद्धा' के रूप में देखा जाता है, जिसने दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में शुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से (वाराणसी) में एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन बार (2014, 2019 और 2024) सीधी और डंके की चोट पर टक्कर ली।
जब बड़े-बड़े दिग्गज वाराणसी के चुनावी समर से किनारा कर रहे थे, तब अजय राय ने सीना तानकर कांग्रेस का झंडा बुलंद रखा। मोदी लहर के चरम पर होने के बावजूद, अजय राय ने हर बार सत्ता के अभेद्य किले में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश की और विरोधियों के दाँत खट्टे किए। उनकी पहचान एक ऐसे जमीनी नेता की है, जिसके तेवर कभी फीके नहीं पड़ते।
क्यों अहम है यह वापसी?
अजय राय का स्वस्थ होकर लौटना केवल उनके परिवार या पार्टी के लिए खुशी की बात नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में विपक्ष की उस मुखर आवाज की वापसी है, जो सीधे सत्ता के शीर्ष से टकराने का दम रखती है। 2024 के चुनाव में जिस तरह उन्होंने वाराणसी में विपक्ष को एकजुट कर कड़ी चुनौती पेश की, उसने दिल्ली तक के सियासी समीकरणों को हिलाकर रख दिया था।
अब जबकि अजय राय पूरी तरह फिट होकर मैदान में लौट आए हैं, उनके समर्थकों में भारी उत्साह है। धर्मगुरुओं के इस आशीर्वाद और जनता की दुआओं की शक्ति के साथ, अजय राय एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सियासी बिसात पर दोगुनी ताकत के साथ उतरने को तैयार हैं।
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