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काशी के घाट पर उमड़ा भक्ति का समंदर, दिव्य आरती से निहाल हुए श्रद्धालु

by on | 2026-04-23 22:31:06

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काशी के घाट पर उमड़ा भक्ति का समंदर, दिव्य आरती से निहाल हुए श्रद्धालु

वाराणसी। जब शिव की जटाओं से निकलकर मां पतित पावन गंगा धरा पर अवतरित हुईं, तो वह पावन तिथि 'गंगा सप्तमी' कहलाई। इसी मंगल बेला पर मोक्षदायिनी काशी के विश्व प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर आस्था का वह अलौकिक दृश्य दिखा, जिसे देख देवता भी आनंदित हो उठें। गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित भव्य महाआरती में हज़ारों दीपों की लौ और मंत्रोच्चार की गूंज ने पूरी काशी को स्वर्गिक आभा से भर दिया।

दुग्धाभिषेक और षोडशोपचार पूजन की दिव्यता

​उत्सव का शुभारंभ मां गंगा के पावन दुग्धाभिषेक के साथ हुआ। वैदिक ब्राह्मणों के सस्वर मंत्रोच्चार के बीच जब षोडशोपचार विधि से मां का पूजन संपन्न हुआ, तो वातावरण की शुद्धि और दिव्यता देखते ही बनती थी। शंखों की ध्वनि और डमरुओं की गूंज ने यह अहसास करा दिया कि साक्षात् महादेव अपनी प्रिय नगरी में मां गंगा का स्वागत कर रहे हैं।

अष्टधातु प्रतिमा का मनमोहक श्रृंगार

​भक्ति के इस महापर्व पर मां गंगा और देवाधिदेव महादेव की अष्टधातु प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया। फूलों की सुगंध और दीपों के प्रकाश के बीच प्रतिमाओं की आभा ऐसी बिखरी कि श्रद्धालु टकटकी लगाए निहारते रह गए। घाट की सीढ़ियों पर तिल रखने की जगह न थी, हर कोई बस मां की एक झलक पाकर अपना जीवन धन्य कर लेना चाहता था।

आस्था का संगम और संकल्प

​इस गरिमामयी आयोजन में गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा, कोषाध्यक्ष आशीष तिवारी और सचिव हनुमान यादव सहित गणमान्य जनों ने मां की सेवा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। गंगा सप्तमी की यह शाम केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और अटूट श्रद्धा का वह जीवंत प्रमाण बनी, जो सदियों से काशी को 'अविमुक्त क्षेत्र' बनाए हुए है।



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