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DGP राजीव कृष्णा का 'हंटर' चला, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप! 5 थानेदार नपे, 2 CO पर भी गिरी गाज

by on | 2026-04-09 09:48:30

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DGP राजीव कृष्णा का 'हंटर' चला, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप! 5 थानेदार नपे, 2 CO पर भी गिरी गाज

लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस में अब 'सुस्ती' और 'लापरवाही' के लिए कोई जगह नहीं है। DGP राजीव कृष्णा ने साफ कर दिया है कि अगर जनता की सुरक्षा और सड़क पर अनुशासन में ढिलाई बरती गई, तो कुर्सी जाते देर नहीं लगेगी। पुलिस मुख्यालय में हुई एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक के बाद DGP ने वो कर दिखाया जिसका खौफ महकमे में हमेशा रहता है—एक साथ 5 थाना प्रभारियों को लाइन हाजिर और 2 डिप्टी SP (CO) के खिलाफ जांच के कड़े आदेश।

 क्यों गिरा DGP का 'गाज'?

समीक्षा बैठक में जब सड़क दुर्घटनाओं और कानून-व्यवस्था का कच्चा चिट्ठा खुला, तो कई जिलों की तस्वीर धुंधली नजर आई। DGP ने पाया कि कई इलाकों में सड़क हादसे लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन वहां के जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। बस फिर क्या था, साहिब का पारा चढ़ा और तुरंत 'ऑन द स्पॉट' कार्रवाई का फरमान जारी हो गया।

ये हैं वो नाम, जिनकी कुर्सी छिन गई (लाइन हाजिर):

लापरवाही की लिस्ट लंबी थी, लेकिन इन पांचों पर कार्रवाई की गाज सबसे पहले गिरी:

दीपक कुमार थाना चोलापुर  वाराणसी कमिश्नरेट ।

 जीतेन्द्र सिंह:  थाना कैम्पियरगंज ,गोरखपुर ।


 विष्णुकान्त तिवारी:  थाना  छिबरामऊ , कन्नौज ।


जगदीश प्रसाद शुक्ला: थाना रामसनेहीघाट , बाराबंकी ।

उदय प्रताप सिंह: थाना सिकरारा ,जौनपुर ।


इन सभी को उनके क्षेत्रों में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और उन पर लगाम न लगा पाने के कारण तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिरकर दिया गया है।

 रडार पर 'साहब' भी: 2 CO के खिलाफ जांच शुरू


कार्रवाई सिर्फ छोटे स्तर पर नहीं रुकी है। DGP ने स्पष्ट संदेश दिया है कि 'ऊपर' वालों की जवाबदेही भी उतनी ही है। सड़क सुरक्षा में विफलता के लिए दो CO ट्रैफिक के खिलाफ प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) के आदेश दिए गए हैं:

 आलोक कुमार पाठक: CO ट्रैफिक, बाराबंकी

 गिरेन्द्र कुमार सिंह: CO ट्रैफिक, जौनपुर

 बेबाक टिप्पणी: अब 'विजिट' नहीं, 'विजिलेंस' का जमाना है!

DGP राजीव कृष्णा की इस कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के पुलिस कप्तानों और थाना प्रभारियों को हिला कर रख दिया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े ADG, IG और SSP को सख्त लहजे में बता दिया गया है कि पुलिसिंग का मतलब सिर्फ ऑफिस में बैठना नहीं, बल्कि जमीन पर नतीजे दिखाना है।

 DGP का सीधा संदेश: "कानून-व्यवस्था और सड़क सुरक्षा में जीरो टॉलरेंस। जो काम नहीं करेगा, वो सिस्टम से बाहर होगा।"




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