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BHU में आधी रात 'महाभारत': भगवान दास हॉस्टल के विवाद ने पकड़ी तूल, VC आवास पर छात्रों का हल्ला बोल!

by on | 2026-04-07 21:15:38

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BHU में आधी रात 'महाभारत': भगवान दास हॉस्टल के विवाद ने पकड़ी तूल, VC आवास पर छात्रों का हल्ला बोल!

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), जिसे 'सर्वविद्या की राजधानी' कहा जाता है, सोमवार की काली रात रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। भगवान दास हॉस्टल से उठी चिंगारी ने ऐसी आग पकड़ी कि छात्रों का सैलाब आधी रात को कुलपति आवास (VC Lodge) के गेट तक जा पहुँचा। प्रशासन की 'तानाशाही' और सुरक्षाकर्मियों के 'नकाबपोश' चेहरे अब सवालों के घेरे में हैं।

विवाद की जड़: एक निष्कासन और कमरे पर ताला

​पूरा मामला शनि और विकास नाम के दो छात्रों के बीच हुए पुराने झगड़े से जुड़ा है। सूत्रों की मानें तो:

  • ​कुछ दिन पहले दोनों के बीच मारपीट हुई थी, जिसके बाद प्रशासन ने 'शनि' को हॉस्टल से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
  • सोमवार की रात: निष्कासित छात्र शनि मेस में खाना खाने पहुँचा। इसी दौरान वार्डन महोदय ने विकास के कमरा नंबर 90 पर ताला जड़ दिया।
  • आरोप: बिना किसी कसूर के विकास को घंटों बाहर खड़ा रखा गया। छात्रों का सीधा सवाल है—जब झगड़ा दो के बीच था, तो निर्दोष छात्र को सजा क्यों?

नकाबपोश सुरक्षाकर्मी: रक्षक या भक्षक?

​प्रदर्शनकारी छात्रों का सबसे गंभीर आरोप प्राक्टोरियल बोर्ड के उन सुरक्षाकर्मियों पर है, जो कथित तौर पर मुंह ढककर हॉस्टल में दाखिल हुए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि सुरक्षा दस्ता किसी जांच टीम की तरह नहीं, बल्कि 'हमलावरों' की मुद्रा में था।

​"अगर नीयत साफ थी, तो चेहरा छुपाने की जरूरत क्या थी?" — यह सवाल आज हर छात्र की जुबान पर है।


आधी रात 'चाणक्य' के किले पर दस्तक

​प्रशासन की इस एकतरफा कार्रवाई से नाराज सैकड़ों छात्र मशालें और आक्रोश लेकर VC आवास की ओर कूच कर गए। रात के सन्नाटे में 'प्रशासन मुर्दाबाद' और 'न्याय दो' के नारों ने कैंपस की शांति भंग कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए:

  1. ​कैंपस में भारी संख्या में वाराणसी पुलिस तैनात कर दी गई।
  2. ​PAC और प्राक्टोरियल बोर्ड ने मोर्चा संभाला।
  3. ​छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है—वार्डन पर कार्रवाई हो और इस 'नकाबपोश' संस्कृति की निष्पक्ष जांच हो!

बेबाक 24 की टिप्पणी: कब थमेगा कैंपस में कोहराम?

​BHU प्रशासन के लिए यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन जिस तरह से सुरक्षाकर्मी नकाब लगाकर छात्रों के बीच पहुँच रहे हैं, वह पारदर्शिता की धज्जियाँ उड़ाता है।

  • क्या वार्डन ने अपनी पावर का गलत इस्तेमाल किया?
  • क्या चीफ प्रॉक्टर इन नकाबपोश कर्मियों की जिम्मेदारी लेंगे?

चुनौती बड़ी है: अगर समय रहते संवाद का रास्ता नहीं निकला, तो यह आंदोलन विश्वविद्यालय के अनुशासन की चूलें हिला सकता है। छात्रों ने साफ कर दिया है—कार्रवाई नहीं तो क्लास नहीं, और अब समझौता नहीं, सिर्फ न्याय होगा!



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