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उज्ज्वला के दौर में चूल्हे पर लौटी दिल्ली; झुग्गी-बस्तियों में बुझी रसोई, सरकार के 'सब ठीक' दावों की खुली पोल

by on | 2026-04-05 20:55:56

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उज्ज्वला के दौर में चूल्हे पर लौटी दिल्ली; झुग्गी-बस्तियों में बुझी रसोई, सरकार के 'सब ठीक' दावों की खुली पोल

नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में गैस की किल्लत अब केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि लाखों गरीबों की रोजी-रोटी का संकट बन गई है। एक तरफ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता दावा कर रही हैं कि सप्लाई 'पूरी तरह सामान्य' है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों और रेहड़ी-पटरी वालों की रसोई में गैस की नीली लौ की जगह अब लकड़ी और कोयले का काला धुआं फैल रहा है। मोदी सरकार के 'फ्री सिलेंडर' और 'धुआं मुक्त भारत' के दावों के बीच, दिल्ली के सीमापुरी, भजनपुरा और सीलमपुर जैसे इलाकों में लोग पुराने दौर में लौटने को मजबूर हैं।

1. जमीनी हकीकत: 20 दिन की वेटिंग और ₹3000 का 'ब्लैक'

सरकारी दावों के उलट, दिल्ली के कई इलाकों में सिलेंडर की बुकिंग के 20 दिन बाद भी डिलीवरी नहीं हो रही है।

कालाबाजारी का नंगा नाच: भजनपुरा और करावल नगर में गैस सिलेंडर ₹3000 से भी अधिक कीमत पर 'ब्लैक' में बिक रहा है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि इतनी महंगी गैस खरीदकर खाना बेचना मुमकिन नहीं है।

छोटे सिलेंडर की किल्लत: दिहाड़ी मजदूरों के लिए सहारा बनने वाले 5 किलो के छोटे सिलेंडर बाज़ार से गायब हैं। अवैध रीफिलिंग का धंधा जोरों पर है, जिससे हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।

2. धुएं में घुटती रोजी-रोटी: छोटे ढाबे बंदी की कगार पर

आउटर रिंग रोड और सीलमपुर के ढाबा संचालकों का दर्द गहरा है। लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने से न केवल लागत बढ़ी है, बल्कि मुनाफे में भी भारी गिरावट आई है:

ग्राहकों की कमी: लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनने में समय ज्यादा लगता है, जिससे ग्राहक होटलों की ओर रुख कर रहे हैं।

स्वास्थ्य पर प्रहार: धुएं के बीच घंटों काम करने से मजदूरों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की शिकायतें बढ़ रही हैं।

3. सरकारी दावा: "सब चंगा सी"

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि 3 अप्रैल को दिल्ली में जितनी बुकिंग हुई, उससे अधिक डिलीवरी (1.26 लाख सिलेंडर) की गई। सरकार के अनुसार:

डिलीवरी टाइम: औसतन वेटिंग पीरियड घटकर 4.37 दिन रह गया है।

जमाखोरों पर वार: पुलिस ने रोहिणी समेत कई इलाकों में छापेमारी की है। एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है ताकि जमाखोरी रोकी जा सके।

 वादे बनाम हकीकत

मुख्यमंत्री भले ही कागजों पर सप्लाई सामान्य दिखा रही हों, लेकिन आरके पुरम की एकता विहार और मुनिरका की झुग्गियों में सन्नाटा पसरा है। यहाँ रहने वाली ओमवती और सुखदेव जैसे हजारों लोग पूछते हैं कि अगर सप्लाई सामान्य है, तो उन्हें लकड़ी क्यों जलानी पड़ रही है?

बेबाक टिप्पणी: "जब आंकड़ों की बाजीगरी पेट की आग नहीं बुझा पाती, तब धुएं के बीच सुलगते चूल्हे सरकार की विफलता की सबसे बड़ी गवाही देते हैं। दिल्ली का यह गैस संकट केवल 'सप्लाई चेन' की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागत प्रमाण है।"



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