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बिहार की राजनीति में पहली बार: नीतीश ने नहीं भेजा इस्तीफा, खुद चलकर CM आवास पहुँचे सभापति; MLC पद से विदाई की कहानी

by admin@bebak24.com on | 2026-03-30 14:31:49

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बिहार की राजनीति में पहली बार: नीतीश ने नहीं भेजा इस्तीफा, खुद चलकर CM आवास पहुँचे सभापति; MLC पद से विदाई की कहानी

पटना |  बिहार की सियासत में सोमवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जो पिछले दो दशकों के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। करीब 20 वर्षों तक बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन चर्चा उनके इस्तीफे की नहीं, बल्कि 'इस्तीफा लेने के तरीके' की हो रही है। बिहार के संसदीय इतिहास में संभवतः यह पहली बार है जब किसी सदस्य का इस्तीफा लेने के लिए खुद विधान परिषद के सभापति को मुख्यमंत्री आवास जाना पड़ा।

शिष्टाचार या मजबूरी? सभापति ने खुद दी जानकारी

सोमवार सुबह से ही पटना के सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा थी कि नीतीश कुमार खुद विधान परिषद आकर इस्तीफा देंगे या किसी के हाथ पत्र भेजेंगे। लेकिन सस्पेंस तब खत्म हुआ जब विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह खुद मुख्यमंत्री आवास से इस्तीफा पत्र लेकर बाहर निकले।

 • सभापति का बयान: अवधेश नारायण सिंह ने मीडिया को बताया, "मैं सुबह मुख्यमंत्री आवास पर नीतीश जी से शिष्टाचार मुलाकात करने गया था। वहीं उन्होंने मुझे अपना इस्तीफा सौंपा। अब उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है और आगे की प्रक्रिया की जा रही है।"

 • अपूर्णनीय क्षति: सभापति ने नीतीश कुमार के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उनके जाने से बिहार को बड़ी क्षति हुई है, लेकिन वे अब केंद्र में बड़ी भूमिका निभाने जा रहे हैं।

इस्तीफे को लेकर मची अफरा-तफरी: जदयू नेताओं ने दिखाया पत्र

विधान परिषद में इस्तीफा पहुंचने से पहले काफी देर तक भ्रम की स्थिति बनी रही।

 • संजय गांधी की एंट्री: पहले खबर आई कि नीतीश कुमार के करीबी और जदयू नेता संजय गांधी इस्तीफा पत्र लेकर आए हैं। उन्होंने मीडिया के सामने पत्र दिखाया भी।

 • अंतिम तारीख का दबाव: राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के बाद आज इस्तीफे की अंतिम तारीख (14वां दिन) थी। अगर आज इस्तीफा नहीं होता तो तकनीकी दिक्कतें आ सकती थीं।

 • भाजपा का रुख: भाजपा नेताओं ने इस घटनाक्रम पर कहा कि चूंकि आज आखिरी दिन था, इसलिए सभापति का मुख्यमंत्री से मिलना केवल एक 'शिष्टाचार भेंट' थी और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।

विपक्ष के सवाल: 'सम्मान या दबाव?'

राजनीतिक गलियारों में इस घटना के दो मायने निकाले जा रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि 20 साल तक सूबे के मुखिया रहे व्यक्तित्व को 'विशेष सम्मान' देने के लिए सभापति खुद उनके द्वार पहुँचे। वहीं, विरोधियों का तर्क है कि जब नीतीश कुमार खुद इस्तीफा देने नहीं निकल रहे थे, तब उनसे जाकर इस्तीफा 'लिया' गया।

अब आगे क्या?

 • उपचुनाव की घोषणा: नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई विधान परिषद की सीट पर जल्द ही निर्वाचन आयोग उपचुनाव की घोषणा करेगा।

 • दिल्ली रवानगी: नीतीश कुमार अब पूरी तरह से राष्ट्रीय राजनीति और केंद्र में अपनी नई जिम्मेदारी पर ध्यान केंद्रित करेंगे।



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