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योजनाओं की रफ्तार में 'टशन', DM का बैंकर्स को कड़ा फरमान— "फाइलें नहीं, अब नतीजे चाहिए!"

by on | 2026-03-24 22:31:14

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योजनाओं की रफ्तार में 'टशन', DM का बैंकर्स को कड़ा फरमान— "फाइलें नहीं, अब नतीजे चाहिए!"

​वाराणसी | बनारस में अब सिर्फ घाटों पर ही नहीं, सरकारी फाइलों पर भी काम की लहर तेज दिखने वाली है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने साफ कर दिया है कि विकास योजनाओं में 'वेटिंग लिस्ट' का खेल अब नहीं चलेगा। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में DM का तेवर देख बैंक और विभाग के अधिकारियों में खलबली मच गई। सीधा निर्देश है— PM स्वनिधि और PM सूर्यघर योजना के जितने भी आवेदन अटके हैं, उन्हें फौरन निपटाओ।
​काम का रिपोर्ट कार्ड: बनारस 'लक्ष्य' के पार
​बैठक में आंकड़ों की बाजीगरी भी चली और हकीकत भी। अग्रणी जिला प्रबंधक अविनाश अग्रवाल ने बताया कि बनारस ने कई मामलों में रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वार्षिक ऋण योजना में जिले ने 108% की उपलब्धि हासिल कर ली है, जो अपने आप में एक मिसाल है।
​योजनाओं की प्रगति पर एक नजर:

एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) : 146%

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) : 135% ।

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना : 107%

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान : 95%

​CD Ratio पर 'कमांड' और किसानों के लिए 'कैंप'
​भले ही उपलब्धि के आंकड़े चमक रहे हों, लेकिन DM की नजर CD Ratio (ऋण-जमा अनुपात) पर टिकी है। फिलहाल यह 58.04% है, जिसे मार्च की क्लोजिंग तक 60% पहुंचाने का अल्टीमेटम दिया गया है।
​जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि:
​किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): बैंक अधिकारी दफ्तर से बाहर निकलें और गांवों में कैंप लगाएं। किसानों को बैंकों के चक्कर नहीं, बल्कि बैंक को किसानों के दरवाजे तक पहुंचना होगा।
​फसल बीमा: प्राकृतिक आपदा झेलने वाले पात्र किसानों को मुआवजे के लिए भटकना न पड़े, उनका भुगतान समय पर सुनिश्चित हो।
​गांव-गांव में सजेगा 'ब्यूटी पार्लर', महिलाएं बनेंगी उद्यमी
​इस बैठक की सबसे दिलचस्प बात रही महिलाओं के स्वरोजगार पर जोर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अब हर गांव में ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण केंद्र खोलने की तैयारी है। प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि महिलाएं सीधे तौर पर स्वावलंबी बन सकेंगी।
​बेबाक टिप्पणी:  सरकारी कागजों पर 146% की उपलब्धि तो शानदार दिखती है, लेकिन असली चुनौती उन लंबित आवेदनों की है जो बैंक की फाइलों में 'सत्यापन' के नाम पर दबे हैं। DM की सख्ती ने इशारा कर दिया है कि अगर बैंकों ने सुस्ती दिखाई, तो अब गाज गिरना तय है।



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