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वाराणसी एयरपोर्ट बना 'नशे का ट्रांजिट पॉइंट'? बैंकॉक से गुजरात वाया बाबतपुर... 25 करोड़ का हाईटेक गांजा बरामद!

by on | 2026-03-10 09:38:09

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वाराणसी एयरपोर्ट बना 'नशे का ट्रांजिट पॉइंट'? बैंकॉक से गुजरात वाया बाबतपुर... 25 करोड़ का हाईटेक गांजा बरामद!

वाराणसी: धर्म और संस्कृति की नगरी काशी के बाबतपुर एयरपोर्ट पर आज कस्टम विभाग ने वो कर दिखाया, जिसकी गूँज थाईलैंड से लेकर गुजरात तक सुनाई दे रही है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX-216 जैसे ही बैंकॉक से वाराणसी की जमीन पर उतरी, तस्करों को लगा कि वो बच निकलेंगे, लेकिन लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मुस्तैद अधिकारियों ने उनके 'हाई-प्रोफाइल' मंसूबों पर पानी फेर दिया।

एक्स-रे की नजर और कस्टम का शिकंजा

मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। कस्टम निरीक्षक अजय सिंह यादव और उनकी टीम की पारखी नजरों ने टर्मिनल पर टहल रहे तीन यात्रियों की 'बॉडी लैंग्वेज' में छिपी घबराहट को ताड़ लिया। शक गहराया तो सामान को एक्स-रे स्कैनर में डाला गया। स्क्रीन पर उभरती संदिग्ध आकृतियों ने साफ कर दिया कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरा बैग ही 'नशे' से भरा है।

जब गवाहों के सामने ट्रॉली बैग की परतें खुलीं, तो अधिकारियों की आंखें फटी रह गई। भीतर छिपाए गए थे 25 किलो 200 ग्राम 'हाइड्रोपोनिक गांजा' के पांच बड़े पैकेट।

क्या है ये 'हाइड्रोपोनिक' बला?

साधारण गांजा तो आपने सुना होगा, लेकिन ये 'हाइड्रोपोनिक' गांजा वो हाइब्रिड नशा है जिसे बिना मिट्टी के, केवल नियंत्रित पानी और पोषक तत्वों के साथ उगाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 25 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। रेव पार्टियों ,हुक्काबारों और महानगरों के अमीरजादों के बीच इस 'महंगे जहर' की भारी डिमांड रहती है।

भागने की कोशिश हुई नाकाम, अब सलाखों के पीछे ठिकाना

पकड़े जाने के डर से दो आरोपियों ने रनवे की तरफ भागने की हिमाकत भी की, लेकिन CISF के जवानों ने उन्हें दबोचने में देर नहीं लगाई। गिरफ्तार आरोपियों की कुंडली कुछ इस तरह है:

 * हिमराज रामसिंग सुंदर (जूनागढ़, गुजरात)

 * राज कांतिलाल चौहान (जूनागढ़, गुजरात)

 * हीनाबेन भारदा (वडोदरा, गुजरात)

वाराणसी से गुजरात: ट्रेन का था प्लान

पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इन तस्करों का प्लान बैंकॉक से इस खेप को वाराणसी लाकर, यहाँ से ट्रेन के जरिए सुरक्षित गुजरात पहुँचाने का था। लेकिन अब ये तिकड़ी ट्रेन की बर्थ के बजाय जेल की कालकोठरी में रातें बिताएगी।

बेबाक टिप्पणी:

कस्टम विभाग ने NDPS Act के तहत मुकदमा दर्ज कर इन्हें जेल तो भेज दिया है, लेकिन सवाल वही है—क्या वाराणसी एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट ने अपना नया 'सेफ रूट' मान लिया है? फिलहाल, विभाग अब उस 'मास्टरमाइंड' की तलाश में है जो बैंकॉक में बैठकर गुजरात के इन प्यादों को नचा रहा था।

बने रहिये हमारे साथ, क्योंकि हम सच दिखाते हैं बेबाक!



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