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फ्रांस के प्रदर्शनों में वैश्विक वामपंथी नेटवर्क का दावा, भारत से जुड़े संगठन का भी जिक्र

by on | 2026-10-19 12:05:17

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फ्रांस के प्रदर्शनों में वैश्विक वामपंथी नेटवर्क का दावा, भारत से जुड़े संगठन का भी जिक्र

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

फ्रांस में छात्र प्रदर्शनों और हिंसक घटनाओं के पीछे वैश्विक वामपंथी संगठनों के नेटवर्क की भूमिका होने का दावा किया गया है। फॉक्स न्यूज डिजिटल की 9 अक्टूबर को प्रकाशित एक जांच रिपोर्ट में 50 संगठनों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस नेटवर्क की गतिविधियां फ्रांस से आगे अमेरिका, ब्रिटेन, ग्रीस, ब्राजील और भारत तक फैली हुई हैं। हालांकि, रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्यों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, इन संगठनों में छात्र और युवा समूहों के साथ श्रमिक संघ, राजनीतिक दल, कम्युनिस्ट और समाजवादी संगठन तथा नागरिक अधिकारों से जुड़े समूह शामिल हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि स्कूलों की स्थिति को लेकर शुरू हुए प्रदर्शनों में बाद में ऐसे संगठन भी सक्रिय हुए, जिनके मुद्दे सरकारी खर्च में कटौती, पूंजीवाद, पुलिस व्यवस्था, सैन्य खर्च और इस्राइल से जुड़े विवादों तक फैले हुए हैं।

50 संगठनों का नेटवर्क होने का दावा

फॉक्स न्यूज डिजिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्लेषण किए गए 50 संगठनों में 15 छात्र या युवा संगठन हैं, जबकि बाकी 35 में श्रमिक संघ, राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और विभिन्न अभियानों से जुड़े समूह शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये संगठन समर्थकों को जुटाने, हड़तालों की अपील करने और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से प्रदर्शनों को व्यापक समर्थन दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। रिपोर्ट का दावा है कि आंदोलन के मुद्दे समय के साथ शिक्षा से जुड़ी शिकायतों से आगे बढ़कर व्यापक राजनीतिक और वैचारिक सवालों तक पहुंच गए।

भारत से जुड़े संगठन का उल्लेख

रिपोर्ट में फ्रांस स्थित इंडियन अलायंस पेरिस का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह संगठन छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों से जुड़ा है और इसने सामाजिक माध्यमों पर फ्रांस में चल रहे प्रदर्शनों के समर्थन में संदेश साझा किए।

रिपोर्ट में संगठन की एक पोस्ट का उल्लेख है, जिसमें फ्रांस और भारत के युवाओं को संबोधित करते हुए लिखा गया था, “जेन जी के नाम: फ्रांस में। भारत में। आज के लिए शाबाश।”

फॉक्स न्यूज डिजिटल के मुताबिक, संगठन के खाते से भारत में हुए प्रदर्शनों और राजनीतिक घटनाओं से संबंधित पोस्ट भी साझा की गईं। 6 अक्टूबर को राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने का एक वीडियो साझा करते हुए भारत सरकार और दिल्ली पुलिस की आलोचना की गई थी। 7 अक्टूबर को एक समाचार क्लिप साझा की गई, जिसमें मुस्लिम मतदाताओं को मतदान से रोकने और विपक्षी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के आरोपों का जिक्र था।

इन पोस्ट का उल्लेख रिपोर्ट में भारत और फ्रांस में चल रहे प्रदर्शनों के बीच वैचारिक संपर्क का संकेत देने के लिए किया गया है। हालांकि, केवल सामाजिक माध्यमों पर समर्थन या राजनीतिक आलोचना के आधार पर हिंसा भड़काने की साजिश साबित नहीं होती।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान पर भी सवाल

रिपोर्ट में न्यूयॉर्क स्थित मीडिया संस्थान ब्रेकथ्रू न्यूज की गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि संस्थान ने प्रदर्शनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया और उन्हें मितव्ययिता संबंधी नीतियों के खिलाफ ऐतिहासिक हड़ताल के रूप में प्रस्तुत किया। रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान ने छात्रों और पुलिस के बीच टकराव के वीडियो भी साझा किए।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणियों का भी रिपोर्ट में जिक्र है। वेंस ने फ्रांस में हुई हिंसा के लिए उदारवादी विचारधारा और विविधता से जुड़ी नीतियों की आलोचना की थी। उन्होंने आशंका जताई थी कि हिंसा से फ्रांस की ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुंच सकता है। उनके बयान में प्रवासन और समाज में लोगों के समायोजन से जुड़े मुद्दों को भी उठाया गया था।

मैक्रों ने हिंसा की निंदा की

फ्रांस में प्रदर्शन और हिंसक झड़पें जारी रहने के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि हिंसा को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

रिपोर्ट में फ्रांस 24 के हवाले से बताया गया है कि बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब स्थिति को लेकर चल रहे प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और हिंसक समूहों के बीच टकराव हुआ। दुकानों में लूटपाट की घटनाएं भी सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने 2,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया।

शनिवार को पेरिस सहित फ्रांस के विभिन्न इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। प्रदर्शनकारियों ने महंगाई के खिलाफ मार्च निकाला, जबकि कुछ स्थानों पर आगजनी और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लूटपाट की घटनाएं हुईं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस के खिलाफ और राष्ट्रपति मैक्रों के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे भी लगाए गए।

बेबाक24 टेक

फ्रांस के प्रदर्शनों को लेकर फॉक्स न्यूज डिजिटल की रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय वामपंथी संगठनों और भारत से जुड़े एक संगठन की गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। लेकिन किसी संगठन का प्रदर्शन का समर्थन करना, सरकार की आलोचना करना और हिंसा की साजिश में शामिल होना अलग-अलग बातें हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस प्रमाण और स्वतंत्र जांच जरूरी हैं।



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