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दिल्ली में प्रदर्शनों के बीच मेटा को सरकार की सलाह, भ्रामक सामग्री पर बढ़ानी होगी निगरानी

by on | 2026-10-19 11:58:08

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दिल्ली में प्रदर्शनों के बीच मेटा को सरकार की सलाह, भ्रामक सामग्री पर बढ़ानी होगी निगरानी

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा को भ्रामक सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने और हिंसा व अशांति को बढ़ावा देने वाली पोस्ट की निगरानी बढ़ाने की सलाह दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 10 अक्तूबर को जारी निर्देश में तस्वीरों, वीडियो और अन्य सामग्री के साथ सही संदर्भ उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।

सामग्री की पहुंच और संदर्भ की समीक्षा

मेटा फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे मंचों का संचालन करती है। सरकार ने कंपनी से अपने सुझाव तंत्र और सामग्री लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था की समीक्षा करने को कहा है, ताकि किसी खास विचार या चुनिंदा सामग्री को जरूरत से ज्यादा बढ़ावा न मिले।

निर्देश में ऐसी सामग्री पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है, जिससे सार्वजनिक अशांति, हिंसा या गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। खासकर घटनाओं से जुड़ी उन तस्वीरों, वीडियो और ग्राफिक्स के साथ पर्याप्त संदर्भ देने की जरूरत बताई गई है, जिनकी तारीख, स्थान या वास्तविक परिस्थितियों की पहचान करना आसान नहीं होता।

बदली हुई और संदर्भ से हटाई गई सामग्री पर नजर

सरकार ने मेटा से सामग्री की जांच और उसके प्रसार की प्रक्रिया की समीक्षा करने को कहा है। इसका उद्देश्य भ्रामक, बदली हुई या संदर्भ से अलग करके पेश की गई सामग्री को बार-बार लोगों तक पहुंचने से रोकना है।

दिल्ली के प्रदर्शनों के बीच आई सलाह

सरकार की सलाह में किसी खास घटना का उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि, यह ऐसे समय जारी हुई है, जब दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और कांग्रेस समेत विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।

बेबाक24 टेक

सरकार की सलाह का मुख्य जोर सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री की पहचान, उसके संदर्भ की स्पष्टता और उसके प्रसार की समीक्षा पर है। डिजिटल मंचों के लिए चुनौती यह होगी कि गलत सूचना और हिंसा को बढ़ावा देने वाली सामग्री पर कार्रवाई करते हुए वैध अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण विरोध की स्वतंत्रता का भी ध्यान रखा जाए।



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