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जंतर-मंतर मामले में 14 सीजेपी कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई, 2 नेता जेल में

by on | 2026-10-14 13:18:58

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जंतर-मंतर मामले में 14 सीजेपी कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई, 2 नेता जेल में

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद गहरा गया है। पुलिस ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बिना अनुमति पहुंचने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में पार्टी के 14 सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की। पार्टी के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि अजिंक्य शिंदे को मुचलका भरने के बाद रिहा कर दिया गया।

इन धाराओं में दर्ज हुए मामले

दिल्ली पुलिस के अनुसार, मामले में कनॉट प्लेस थाने में प्राथमिकी संख्या 289/26 और संसद मार्ग थाने में प्राथमिकी संख्या 128/26 दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अनधिकृत प्रवेश, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा और अन्य आरोपों की जांच शुरू की है।

पुलिस का आरोप है कि सीजेपी के 14 सदस्य निजी परिसर से होकर उस स्थान पर पहुंचे, जिसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया था। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने सरकारी कामकाज में बाधा डाली।

तीनों नेताओं को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। मजिस्ट्रेट ने आशुतोष रांका और सौरव दास को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। वहीं, अजिंक्य शिंदे को 6 महीने तक शांति और अच्छा आचरण बनाए रखने की शर्त पर 5,000 रुपये के निजी मुचलके और जमानत पर पाबंद किया गया।

दिपके बोले- देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि तिरंगा फहराने और विरोध दर्ज कराने के कारण नेताओं को जेल भेजना लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट है।

दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि यदि सरकार विरोध की आवाज दबाना चाहती है, तो उसे आपातकाल घोषित करने की हिम्मत दिखानी चाहिए। उन्होंने मौजूदा स्थिति को अघोषित आपातकाल जैसा बताया। ये आरोप दिपके के हैं।

नागपुर से दिल्ली रवाना होने के दौरान दिपके ने कहा कि संविधान, लोकतंत्र और मतदान के अधिकारों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।

अजिंक्य शिंदे ने भी लगाए आरोप

रिहाई के बाद अजिंक्य शिंदे ने दावा किया कि सीजेपी कार्यकर्ता तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे और उन्होंने 'भारत माता की जय' के नारे लगाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था का इस्तेमाल कर विरोध करने वालों को डराना चाहती है।

शिंदे ने कहा कि आशुतोष रांका और सौरव दास जेल जाने से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान नेताओं को अपने वकीलों से मिलने नहीं दिया गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

सीजेपी करेगी जमानत के लिए आवेदन

सीजेपी के अधिवक्ता अभिष्त हेला ने कहा कि पार्टी कानूनी प्रक्रिया के तहत जमानत के लिए आवेदन करेगी। उन्होंने पुलिस के इस दावे पर सवाल उठाया कि नेताओं ने लोगों को प्रदर्शन के लिए बुलाया था। बचाव पक्ष का कहना है कि नेताओं ने मुचलके की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया।

दूसरी ओर, पुलिस ने बार-बार कानून तोड़ने और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका का हवाला देते हुए कार्रवाई की है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया से आरोपों और बचाव पक्ष की दलीलों पर स्थिति स्पष्ट होगी।

एसआईआर के विरोध के बीच सियासी घमासान

देश के कई राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग का विरोध कर रहे हैं। विपक्ष के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं। सीजेपी ने भी अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है।

बेबाक24 टेक: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर सीजेपी और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव अब न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया है। 2 नेता न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया है। आगे की सुनवाई और पुलिस जांच इस मामले में अहम होगी।



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