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थिएटर से सड़कों तक: कौन हैं नेहा बोरा, युवा आंदोलनों का चर्चित चेहरा

by on | 2026-10-14 13:18:50

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थिएटर से सड़कों तक: कौन हैं नेहा बोरा, युवा आंदोलनों का चर्चित चेहरा

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 23 दिन की भूख हड़ताल से चर्चा में आईं छात्र नेता नेहा बोरा इन दिनों राष्ट्रीय राजनीति में सुर्खियां बटोर रही हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तक, वह कई आंदोलनों में सक्रिय रही हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ विपक्षी मार्च में उनकी मौजूदगी ने भी लोगों का ध्यान खींचा है।

कौन हैं नेहा बोरा?

29 वर्षीय नेहा बोरा का जन्म उत्तराखंड के खटीमा में हुआ। उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत थे, जिसके कारण बचपन में परिवार को अलग-अलग जगहों पर रहना पड़ा। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और दिल्ली के अंबेडकर विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में थिएटर और प्रदर्शन अध्ययन के क्षेत्र में पीएचडी के लिए दाखिला लिया।

जेएनयू में पढ़ाई के दौरान वह छात्र राजनीति से जुड़ीं और अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) में शामिल हुईं। यह वामपंथी छात्र संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से संबद्ध है। फिलहाल नेहा आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वह दिल्ली के नुक्कड़ नाटक समूह संगवारी से भी जुड़ी रही हैं।

थिएटर ने दिखाई राजनीति की राह

नेहा के मुताबिक, स्नातक की पढ़ाई के दौरान थिएटर से जुड़ने पर उन्हें अलग-अलग विचारों और सामाजिक अनुभवों को समझने का अवसर मिला। उनके लिए थिएटर केवल अभिनय का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों के विचारों और परिस्थितियों को समझने की जगह भी रहा।

2019-20 के नागरिकता संशोधन कानून विरोधी आंदोलन ने भी उन पर प्रभाव डाला। उन्होंने अपने साक्षात्कारों में बताया कि उस दौरान युवाओं को विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करते देखकर उन्हें समझ आया कि उम्मीद लोगों को कठिन परिस्थितियों में भी आवाज उठाने का साहस देती है।

नीट आंदोलन से मिली राष्ट्रीय पहचान

नेहा बोरा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुई भूख हड़ताल से मिली। वह आइसा के साथी मनीष कुमार और आमीन अमीतोज के साथ आंदोलन में शामिल हुईं।

प्रदर्शन करीब 23 दिन चला। 20 जुलाई को सांसदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य सार्वजनिक हस्तियों की अपील के बाद भूख हड़ताल समाप्त की गई। इस दौरान नेहा का करीब 8 किलोग्राम वजन कम होने की जानकारी सामने आई थी। आंदोलन से जुड़े उनके भाषण और वीडियो सामाजिक माध्यमों पर व्यापक रूप से साझा किए गए।

नेहा ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने अपनी मां को भूख हड़ताल के बारे में नहीं बताया था। बाद में उनकी मां दिल्ली पहुंचीं और आंदोलन में शामिल साथियों को नेहा की देखभाल करते देखकर उनका नजरिया भी बदला।

छात्र आंदोलनों में सक्रियता

नीट आंदोलन के बाद नेहा झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र आंदोलन में भी शामिल हुईं। 7 अगस्त को झारखंड विधानसभा के पास प्रदर्शन के दौरान उन पर स्याही फेंके जाने की घटना सामने आई थी। पुलिस ने इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।

सितंबर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी को लेकर भी उनके खिलाफ पुलिस शिकायतें दर्ज होने की खबरें आईं।

एसआईआर विरोध और हिरासत का मामला

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों में भी नेहा सक्रिय रहीं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़े प्रदर्शनों में हिस्सा लिया।

10 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उन्हें अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ हिरासत में लिया गया। अगले दिन उन्होंने सामाजिक माध्यम पर एक संदेश साझा किया और बाद में आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास प्रदर्शन का आह्वान किया।

इस दौरान मास्क और लाल कपड़े पहने एक महिला को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिसे शुरुआत में कुछ लोगों ने नेहा समझ लिया था। बाद में सामने आया कि वह उनकी हमशक्ल थीं। नेहा ने अपनी हमशक्ल के साथ तस्वीर साझा करते हुए कहा कि यह कोई रणनीति नहीं, बल्कि संयोग था।

इसके बाद नेहा ने अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ बैरिकेड पार कर कनॉट प्लेस पहुंचने का वीडियो साझा किया। बाद में उन्हें विजय चौक के पास हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।

राहुल और प्रियंका के साथ मार्च में दिखीं

12 अक्तूबर को आईएनडीआईए गठबंधन के नेताओं और समर्थकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की ओर मार्च किया। नेहा भी इस मार्च में शामिल हुईं। उनके साथ राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेता मौजूद थे।

उनकी सक्रियता का असर सामाजिक माध्यमों पर भी दिखाई देता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इंस्टाग्राम पर उनके करीब 12 लाख अनुयायी हैं। उनके आंदोलन से जुड़े कई वीडियो व्यापक रूप से साझा किए गए हैं।

बेबाक24 टेक

नेहा बोरा का सफर थिएटर और शोध से शुरू होकर छात्र राजनीति तथा राष्ट्रीय स्तर के आंदोलनों तक पहुंचा है। नीट परीक्षा के खिलाफ भूख हड़ताल और एसआईआर विरोधी प्रदर्शनों ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। आने वाले समय में उनकी राजनीतिक सक्रियता और छात्र आंदोलनों में भूमिका पर नजर रहेगी।



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