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अमेरिकी रोक पर कांग्रेस का हमला, कहा- खुशामद से नहीं बचेंगे भारतीय हित

by on | 2026-10-09 13:27:16

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अमेरिकी रोक पर कांग्रेस का हमला, कहा- खुशामद से नहीं बचेंगे भारतीय हित

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

अमेरिका की ओर से कई बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के स्थायी निवास से जुड़े आवेदन रोकने के फैसले पर भारत में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने की नीति से भारत के हितों की रक्षा नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि दबंगों की खुशामद कभी काम नहीं आती।

भारतीय कंपनियों पर अमेरिकी शिकंजा

अमेरिकी श्रम विभाग ने इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल, टाटा, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी समेत कई कंपनियों के स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (पीईआरएम) के तहत नए आवेदन स्वीकार करने पर अस्थायी रोक लगाई है। माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी जैसी अमेरिकी कंपनियां भी इस कार्रवाई के दायरे में हैं।

पीईआरएम प्रक्रिया अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पाने की दिशा में अहम कदम है। इसके तहत कंपनियां पात्र विदेशी कर्मचारियों के स्थायी निवास की प्रक्रिया आगे बढ़ाती हैं। अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, संबंधित कंपनियों के खिलाफ संघीय जांच चल रही हैं। विभाग ने नए आवेदनों के साथ पहले से लंबित कुछ आवेदनों पर भी आगे की कार्रवाई रोकने की बात कही है।

जयराम रमेश ने उठाया यूपीआई शुल्क का मुद्दा

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने के लिए एकीकृत भुगतान व्यवस्था (यूपीआई) पर व्यापारी शुल्क लगाने की कोशिश की। उनके मुताबिक, ऐसे कदमों से अमेरिकी कंपनियों को लाभ मिल सकता है, जबकि भारतीय आईटी पेशेवरों के हित प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के पास अमेरिकी फैसले के जवाब में अपने कानूनों के तहत कदम उठाने के विकल्प हैं। रमेश ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और उससे जुड़े नियमों का उल्लेख किया। हालांकि, सरकार की ओर से इस मामले में किसी संभावित जवाबी कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई है।

पवन खेड़ा ने भी सरकार को घेरा

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी अमेरिकी आव्रजन नीतियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एच-1बी वीजा से जुड़ी बढ़ी लागत भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में रोजगार के अवसरों को प्रभावित कर सकती है। पीईआरएम आवेदनों पर रोक से स्थायी निवास की प्रक्रिया भी प्रभावित होने की आशंका है।

भारत के लिए अवसर भी देख रहे प्रियांक खरगे

कर्नाटक के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि अमेरिकी फैसले से भारतीय कंपनियों के पारंपरिक कामकाजी ढांचे पर दबाव बढ़ सकता है। अमेरिका में कर्मचारियों को भेजना महंगा होने और कुशल पेशेवरों को बनाए रखने में कठिनाई आने की आशंका है।

हालांकि, उन्होंने इसे भारत के लिए अवसर भी बताया। उनके अनुसार, कंपनियां अधिक तकनीकी और उच्च मूल्य वाले काम भारत में ही करा सकती हैं। इससे वैश्विक क्षमता केंद्रों, अनुसंधान, अभियांत्रिकी, उत्पाद विकास और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कामों को बढ़ावा मिल सकता है। इसके लिए भारत को आवश्यक तैयारी और तकनीकी क्षमता मजबूत करनी होगी।

छात्रों पर भी सख्त नियमों के संकेत

अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने एफ-1 छात्र वीजा धारकों के लिए वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में नई फीस लगाने का प्रस्ताव भी दिया है। इस कार्यक्रम के तहत पात्र विदेशी छात्र पढ़ाई से संबंधित क्षेत्र में अमेरिका में काम का अनुभव हासिल कर सकते हैं। प्रस्ताव लागू होने पर भारतीय छात्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

बेबाक24 टेक

अमेरिकी फैसले से भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों और अमेरिका में स्थायी निवास की प्रक्रिया से गुजर रहे कर्मचारियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। कांग्रेस ने इसे केंद्र सरकार की विदेश नीति से जोड़कर सवाल उठाए हैं, जबकि कर्नाटक के मंत्री ने भारत में उच्च तकनीकी काम बढ़ने की संभावना जताई है। आगे का असर अमेरिकी जांच, आव्रजन नियमों और कंपनियों की रणनीति पर निर्भर करेगा।



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