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ट्रंप के 8 युद्ध रुकवाने के दावे पर सवाल, नोबेल की राह कितनी आसान?

by on | 2026-10-09 13:26:04

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ट्रंप के 8 युद्ध रुकवाने के दावे पर सवाल, नोबेल की राह कितनी आसान?

वॉशिंगटन | बेबाक24 न्यूज़

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने दुनिया के 8 युद्धों को समाप्त कराने में भूमिका निभाई है। इसी आधार पर उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अपनी दावेदारी भी दोहराई। हालांकि, उनके दावों में शामिल कुछ मामले स्थायी शांति समझौतों के बजाय युद्धविराम या कूटनीतिक प्रयासों से जुड़े हैं। कुछ विवादों में सक्रिय युद्ध की स्थिति भी नहीं थी। ऐसे में उनके दावों की वास्तविकता और नोबेल पुरस्कार मिलने की संभावना पर सवाल उठ रहे हैं।

पहले भी कर चुके हैं पुरस्कार की मांग

ट्रंप अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल 2017 से 2021 के दौरान भी नोबेल शांति पुरस्कार की चर्चा करते रहे हैं। उन्होंने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ बातचीत और इथियोपिया से जुड़े शांति प्रयासों का उल्लेख करते हुए अपने योगदान का दावा किया था।

2025 में राष्ट्रपति पद पर लौटने के बाद उन्होंने फिर कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने का श्रेय अपने प्रशासन को दिया। उनके अनुसार, विभिन्न देशों के बीच तनाव कम कराने और समझौते करवाने में अमेरिकी दबाव तथा कूटनीति की अहम भूमिका रही है।

8 से 10 और फिर 8 पर कैसे पहुंचा आंकड़ा?

ट्रंप अलग-अलग अवसरों पर 8, 9 और 10 युद्धों को समाप्त कराने का दावा कर चुके हैं। हालांकि, उनके 10 युद्धों वाले दावे के समय सभी संघर्षों की स्पष्ट सूची सामने नहीं आई थी। हालिया बयान में उन्होंने फिर 8 युद्धों का उल्लेख किया।

उनके दावों में मुख्य रूप से ये संघर्ष शामिल हैं:

  • इस्राइल और हमास: गाजा में युद्धविराम तथा बंधकों की रिहाई के लिए शांति योजना और कूटनीतिक प्रयास।
  • इस्राइल और ईरान: जून 2025 में 12 दिन चले युद्ध के बाद युद्धविराम कराने का दावा।
  • भारत और पाकिस्तान: मई 2025 के सैन्य संघर्ष को रुकवाने में अमेरिकी भूमिका का दावा। भारत ने अमेरिकी मध्यस्थता और व्यापारिक दबाव के दावों को खारिज करते हुए कहा था कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधे संपर्क से संघर्ष रोकने पर सहमति बनी।
  • थाईलैंड और कंबोडिया: सीमा पर संघर्ष रोकने के लिए व्यापार और शुल्क संबंधी दबाव का इस्तेमाल करने का दावा।
  • अर्मेनिया और अजरबैजान: अगस्त 2025 में दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य करने और परिवहन गलियारे से जुड़े समझौते में भूमिका।
  • कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और रवांडा: पूर्वी कांगो में हिंसा कम करने के लिए समझौते कराने के प्रयास।
  • सर्बिया और कोसोवो: संभावित संघर्ष टालने के लिए व्यापारिक दबाव डालने का दावा।
  • मिस्र और इथियोपिया: नील नदी पर बांध को लेकर जारी जल विवाद को सुलझाने में भूमिका का दावा, हालांकि इस मामले में प्रत्यक्ष सैन्य युद्ध नहीं हुआ था और अंतिम समझौता भी नहीं हुआ।

ट्रंप ने इस्राइल और लेबनान के बीच संघर्षविराम को भी अपनी उपलब्धियों में गिनाया है। इन मामलों में युद्धविराम, तनाव कम करने और स्थायी समाधान के बीच अंतर करना जरूरी है।

नोबेल शांति पुरस्कार कैसे मिलता है?

नोबेल शांति पुरस्कार के लिए निर्धारित पात्रता रखने वाले व्यक्ति ही नामांकन कर सकते हैं। इनमें कुछ देशों के प्रमुख, सरकार के सदस्य, पूर्व नोबेल पुरस्कार विजेता और विश्वविद्यालयों के योग्य अध्यापक शामिल हैं।

नामांकन के बाद नॉर्वे की नोबेल समिति उम्मीदवारों की समीक्षा करती है। समिति का निर्णय स्वतंत्र प्रक्रिया के तहत होता है। किसी व्यक्ति का नाम प्रस्तावित होना पुरस्कार मिलने की गारंटी नहीं है। नामांकन से जुड़ी जानकारी भी लंबे समय तक गोपनीय रखी जाती है।

पुरस्कार का उद्देश्य राष्ट्रों के बीच भाईचारे, शांति को बढ़ावा देने और संघर्षों को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देने वालों को सम्मानित करना है।

ट्रंप की दावेदारी के सामने क्या चुनौतियां हैं?

ट्रंप के पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि उनके प्रशासन ने कई संघर्षों में बातचीत, युद्धविराम और समझौतों के लिए दबाव बनाया। कुछ देशों के नेताओं ने भी उनके शांति प्रयासों के लिए नामांकन का समर्थन किया है।

दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है कि कई मामलों में समझौते स्थायी शांति में नहीं बदले और कुछ क्षेत्रों में हिंसा जारी रही या दोबारा भड़क उठी। मिस्र-इथियोपिया और सर्बिया-कोसोवो जैसे मामलों को युद्ध समाप्त कराने के दावे में शामिल करने पर भी सवाल उठे हैं।

भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर ट्रंप के दावे को भारत द्वारा नकारा जाना भी उनकी बताई उपलब्धियों के आकलन को जटिल बनाता है। इसके अलावा, पुरस्कार के लिए सार्वजनिक रूप से दबाव बनाना अपने आप में चयन का आधार नहीं है।

बेबाक24 टेक

ट्रंप के आठ युद्ध समाप्त कराने के दावे का आकलन केवल संख्या के आधार पर नहीं किया जा सकता। यह देखना जरूरी है कि किन मामलों में वास्तविक युद्धविराम हुआ, कहां स्थायी समझौता बना और किस संघर्ष में उनकी भूमिका कितनी निर्णायक रही। नोबेल शांति पुरस्कार का निर्णय नॉर्वे की नोबेल समिति करती है। इसलिए ट्रंप की दावेदारी पर अंतिम निष्कर्ष उनके बयानों से नहीं, बल्कि शांति प्रयासों के वास्तविक और दीर्घकालिक परिणामों के आधार पर ही निकलेगा।



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