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अमेरिका ने 8 आईटी कंपनियों पर लगाई रोक, इंफोसिस-टीसीएस भी सूची में

by on | 2026-10-09 13:24:00

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अमेरिका ने 8 आईटी कंपनियों पर लगाई रोक, इंफोसिस-टीसीएस भी सूची में

वॉशिंगटन | बेबाक24 न्यूज़

अमेरिका ने इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), विप्रो और माइक्रोसॉफ्ट समेत 8 बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इस फैसले के बाद संबंधित कंपनियों के नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और पहले से लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी रोक दी जाएगी। इस कार्रवाई का असर अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया से जुड़े विदेशी कर्मचारियों पर पड़ सकता है।

अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने गुरुवार को इस कार्रवाई की घोषणा की। इस दौरान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अमेरिकी धोखाधड़ी-रोधी कार्यदल के प्रमुख भी मौजूद थे।

इन 8 कंपनियों पर हुई कार्रवाई

अमेरिकी प्रशासन की ओर से जिन कंपनियों के नाम बताए गए हैं, उनमें कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब शामिल हैं। इन कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित किया गया है।

यह कार्यक्रम अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया से जुड़ा है। इसलिए इस फैसले से संबंधित कंपनियों के उन कर्मचारियों की आवेदन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जो इसके माध्यम से स्थायी निवास पाने की तैयारी कर रहे हैं।

30 लाख विदेशी कर्मचारियों के आवेदनों का दावा

अमेरिकी श्रम मंत्री ने दावा किया कि 2009 से अब तक इन कंपनियों ने करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन किए हैं। उनके अनुसार, इन कंपनियों के कर्मचारियों के लिए 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा मंजूर हुए और 1 लाख से ज्यादा स्थायी श्रम प्रमाणन जारी किए गए।

सोंडरलिंग का कहना है कि विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से अमेरिकी नागरिकों के लिए उपलब्ध बड़ी संख्या में नौकरियां प्रभावित हुई हैं। हालांकि, ये आंकड़े और रोजगार पर असर को लेकर किए गए दावे अमेरिकी प्रशासन के हैं।

माइक्रोसॉफ्ट पर जेडी वेंस ने लगाए आरोप

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर वीजा व्यवस्था के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने पिछले वर्ष करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जबकि इसी अवधि में उसे 6,300 एच-1बी वीजा मिले।

वेंस ने इस तुलना के आधार पर कंपनी की नियुक्ति नीति पर सवाल उठाए। ये आरोप अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगाए गए हैं।

भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

इस फैसले का असर अमेरिका में कार्यरत भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी पेशेवरों पर पड़ सकता है, खासकर उन कर्मचारियों पर जिनकी स्थायी निवास से जुड़ी आवेदन प्रक्रिया इन कंपनियों के माध्यम से चल रही है।

नए आवेदनों पर रोक और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया रुकने से कुछ कर्मचारियों की स्थायी निवास पाने की योजना में देरी हो सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि सभी भारतीय कर्मचारियों के वीजा या रोजगार पर तत्काल असर पड़ेगा। कार्रवाई का वास्तविक प्रभाव संबंधित कर्मचारियों की आवेदन स्थिति और अमेरिकी प्रशासन के आगे के फैसलों पर निर्भर करेगा।

बेबाक24 टेक

अमेरिका की इस कार्रवाई से बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों और विदेशी कर्मचारियों की स्थायी निवास प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका है। भारतीय पेशेवरों के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि लंबित आवेदनों पर रोक कितने समय तक रहेगी और अमेरिकी प्रशासन आगे क्या कदम उठाएगा।



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