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मोदी के प्रशासनिक जीवन के 25 साल, बोले- जनता का विश्वास मेरी सबसे बड़ी ताकत

by on | 2026-10-07 14:29:58

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मोदी के प्रशासनिक जीवन के 25 साल, बोले- जनता का विश्वास मेरी सबसे बड़ी ताकत

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रशासनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर अपने लंबे सार्वजनिक सफर को याद किया। दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में देशभर के भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों का विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है। मोदी ने कहा कि विरोध ने उन्हें लोकतंत्र की शक्ति समझाई, संकटों ने धैर्य सिखाया और असफलताओं ने दोबारा खड़े होने की प्रेरणा दी।

मोदी ने कहा कि 7 अक्तूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेते समय उन्होंने नहीं सोचा था कि एक दिन सार्वजनिक जीवन में 25 साल का यह पड़ाव आएगा। उन्होंने इस यात्रा को जनता के लगातार मिल रहे आशीर्वाद का परिणाम बताते हुए भाजपा, राजग और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों का आभार जताया।

जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें सबसे बड़ा योगदान जनता का है। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों का विश्वास ही उनकी शक्ति रहा है और देश ने उन्हें बहुत कुछ दिया है, इसलिए देश ही उनके लिए सबकुछ है।

उन्होंने कहा कि 25 साल का जनविश्वास और अनुभव बड़ी पूंजी है, लेकिन यह पूंजी उनकी निजी नहीं बल्कि देश की है। मोदी ने अपने बचपन और स्कूल के दिनों को याद करते हुए कहा कि सीखने की इच्छा उनके जीवन का हिस्सा रही है और वह आज भी खुद को विद्यार्थी मानते हैं।

हर चुनौती ने कुछ सिखाया

मोदी ने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उनके मन में कृतज्ञता का भाव आता है। उनके अनुसार, जिसने उन्हें गिराया, उसने खड़ा होना सिखाया और जिसने विरोध किया, उसने लोकतंत्र की शक्ति समझाई। संकटों ने धैर्य की परीक्षा ली, जबकि सफलताओं ने बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ने का सामर्थ्य दिया।

उन्होंने चंद्रयान और कोरोना काल का उल्लेख करते हुए कहा कि चंद्रयान ने असफलता के बाद फिर उठने की सीख दी, जबकि कोरोना ने सामूहिक चेतना का पाठ पढ़ाया। गांवों और गरीबों से मिले अनुभवों ने उन्हें सिखाया कि साधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन सपने बड़े और हौसले मजबूत होने चाहिए।

‘हम करके रहेंगे’ का संकल्प

प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 साल पूरे होने का दिन केवल पुरानी यादों को दोहराने का नहीं, बल्कि संकल्पों को नई ऊर्जा देने का अवसर है। उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच कहा, ‘वी विल डू इट’, यानी हम करके रहेंगे।

उन्होंने विकसित भारत, तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर भारत, ओलंपिक की मेजबानी और अंतरिक्ष में आगे बढ़ने जैसे लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं से इसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

‘मैं महत्वाकांक्षा नहीं, मिशन के लिए जीता हूं’

मोदी ने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि उनका काम संगठन के कार्यकर्ता के रूप में था। उन्होंने कहा कि अगर चुनावी राजनीति में चमकने की इच्छा होती तो वह बहुत पहले मैदान में उतर सकते थे, लेकिन उनका स्वभाव ऐसा नहीं था।

उन्होंने कहा कि वह महत्वाकांक्षा के बजाय मिशन के लिए जीने वाले व्यक्ति रहे हैं। देश के लिए निस्वार्थ कर्म को उन्होंने अपने जीवन का ध्येय बताया और कहा कि कर्म ही उनके लिए धर्म है।

2014 की चुनौतियों को किया याद

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वह गुजरात पहुंचे थे, तब प्रशासनिक व्यवस्था का ज्यादा अनुभव नहीं था। उनके पास केवल जनशक्ति का भरोसा था। जनता को साथ लेकर निर्णय लेने और नीतियां लागू करने को उन्होंने अपनी कार्यशैली का आधार बताया।

2014 का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि उस समय देश निराशा में डूबा था और अर्थव्यवस्था को लेकर भी दुनिया में नकारात्मक धारणा थी। उन्होंने कहा कि लोगों के साथ मिलकर काम किया और फिर वही संकल्प दोहराया—‘हम करके रहेंगे’। उनके अनुसार, इसके बाद देश की तस्वीर बदली।

देश कहां पहुंचा, यह ज्यादा अहम

मोदी ने कहा कि उनकी 25 साल की यात्रा का आकलन इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि वह खुद कहां पहुंचे, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि देश कहां पहुंचा।

उन्होंने कहा कि भारत में जन्म लेना अपने आप में अमृत जैसा अनुभव है। पद और प्रतिष्ठा कहीं भी मिल सकती है, लेकिन भारत जैसी पुण्यभूमि नहीं मिल सकती। उनके अनुसार, जिस देश ने मानवता को ज्ञान और मूल्यों का प्रकाश दिया, उसकी सेवा का अवसर अमूल्य है।

कार्यक्रम से पहले मंदिर में पूजा

कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री ने दिल्ली के श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना की। वहीं, उनके जन्मदिन पर शुरू किए गए ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत वाराणसी से वडनगर तक निकली सेवा यात्रा का समापन भी 7 अक्तूबर को उनके गृह नगर वडनगर में होना है। इसका मुख्य कार्यक्रम शाम 4 बजे आयोजित किया जाएगा।

बेबाक24 टेक

प्रशासनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में सत्ता और पद के बजाय जनविश्वास, सेवा और कर्म को अपनी यात्रा का आधार बताया। उन्होंने कार्यकर्ताओं के सामने पुराने अनुभवों को याद करने के साथ भविष्य के लक्ष्यों के लिए ‘हम करके रहेंगे’ के संकल्प को दोहराया।



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