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पंजाब में महिला वोट पर सियासी दांव, नशे से आर्थिक मदद तक अलग-अलग मुद्दे

by on | 2026-10-07 14:22:48

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पंजाब में महिला वोट पर सियासी दांव, नशे से आर्थिक मदद तक अलग-अलग मुद्दे

जालंधर | बेबाक24 न्यूज़

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं को साधने की राजनीतिक कोशिश तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल नशे के मुद्दे को लेकर मावां-धियां इंसाफ यात्रा के जरिए महिलाओं तक पहुंच रही हैं, जबकि आम आदमी पार्टी सरकार मावां-धियां सत्कार योजना के माध्यम से सीधे आर्थिक सहायता देने पर जोर दे रही है।

निर्वाचन आयोग के 2024 के आंकड़ों के अनुसार पंजाब में 1,02,03,440 महिला मतदाता थीं। इनमें 73,35,923 महिलाओं ने मतदान किया था। ऐसे में महिला मतदाताओं की संख्या और उनकी मतदान भागीदारी दोनों ही चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

अकाली दल का नशे पर जोर

हरसिमरत कौर बादल की मावां-धियां इंसाफ यात्रा का मुख्य मुद्दा पंजाब में नशे की समस्या है। गांवों में महिलाओं से संवाद के दौरान अकाली दल परिवारों पर नशे के असर और युवाओं की स्थिति को प्रमुख मुद्दा बना रहा है।

अभियान के दूसरे चरण में माई भागो मावां-धियां दी फौज की घोषणा भी की गई है। इसके जरिए महिलाओं को नशा बेचने वालों और उनके कथित संरक्षणकर्ताओं की जानकारी सामने लाने के लिए लामबंद करने की बात कही गई है।

सीधी आर्थिक सहायता पर सरकार का जोर

आम आदमी पार्टी सरकार ने महिला मतदाताओं तक पहुंचने के लिए आर्थिक सहायता को प्रमुख आधार बनाया है। 2026-27 के बजट में घोषित मावां-धियां सत्कार योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग की पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये देने का प्रावधान किया गया है।

इससे पहले पंजाब में कांग्रेस सरकार के दौरान 1 अप्रैल 2021 से सरकारी बसों में महिलाओं और लड़कियों के लिए मुफ्त यात्रा शुरू की गई थी। यह सुविधा अभी भी जारी है।

अकाली-भाजपा सरकार के समय शगुन योजना के तहत जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहायता दी गई थी। इसी दौरान माई भागो विद्या योजना के तहत सरकारी स्कूलों की छात्राओं को साइकिलें भी दी गईं। केंद्र की उज्ज्वला योजना ने भी महिलाओं से जुड़े ईंधन और रसोई के मुद्दे को प्रभावित किया।

महिला मतदाता निर्णायक भूमिका में

डीएवी विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति जसबीर कौर रिशी के अनुसार पंजाब की महिला मतदाता अब किसी एक दल का पारंपरिक वोट बैंक नहीं रह गई हैं। उनके मुताबिक 2024 में 1.02 करोड़ से अधिक महिला मतदाताओं में से करीब 73.36 लाख ने मतदान किया था।

उनका कहना है कि चुनाव में महिलाओं की प्राथमिकताएं महत्वपूर्ण रहेंगी। घर की अर्थव्यवस्था और सरकारी सहायता बड़ा मुद्दा बनती है तो आर्थिक लाभ वाली योजनाएं असर डाल सकती हैं, जबकि नशा, बच्चों की सुरक्षा और परिवारों पर इसके प्रभाव जैसे मुद्दे विपक्ष की राजनीति को मजबूती दे सकते हैं।

बेबाक24 टेक

पंजाब में 2027 के चुनाव से पहले महिला मतदाताओं को लेकर राजनीतिक दलों के मुद्दे अलग-अलग हैं। कोई नशे के खिलाफ अभियान को आधार बना रहा है तो कोई आर्थिक सहायता, मुफ्त यात्रा या महिला कल्याण योजनाओं को आगे रख रहा है। ऐसे में चुनावी नतीजों में महिला मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।



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