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यूपी में भाजपा की राज्यसभा सूची: जातीय संतुलन के साथ संगठन को भी तरजीह

by on | 2026-10-06 13:11:13

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यूपी में भाजपा की राज्यसभा सूची: जातीय संतुलन के साथ संगठन को भी तरजीह

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

भाजपा ने उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव के लिए 8 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं। सूची में पार्टी ने पुराने संगठनात्मक कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषण में इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से लेकर 2029 के लोकसभा चुनाव तक के लिए सामाजिक और संगठनात्मक संतुलन साधने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

पार्टी ने मौजूदा 8 राज्यसभा सदस्यों में किसी को दोबारा मौका नहीं दिया। केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह का नाम भी सूची में नहीं है। वहीं, कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह को प्रत्याशी बनाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोधी समाज के बीच नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत माना जा रहा है।

3 अगड़े, 3 पिछड़े और 2 दलित चेहरे

घोषित 8 नामों में 3 अगड़े, 3 पिछड़े और 2 दलित चेहरे बताए जा रहे हैं। गोपीकृष्ण पांडेय, राधाकांत ओझा, धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर और रामप्रताप सिंह जैसे नेताओं की राजनीतिक पहचान लंबे समय से संगठन से जुड़ी रही है।

प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार को अपेक्षाकृत नए चेहरों के तौर पर देखा जा रहा है। इस तरह सूची में सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ संगठन में लंबे समय से काम करने वाले नेताओं को भी जगह दी गई है।

श्रुति गंगवार के चयन पर चर्चा

झारखंड के राज्यपाल और बरेली से कई बार सांसद रहे संतोष गंगवार की पुत्री श्रुति गंगवार का नाम सूची में शामिल होने के बाद परिवारवाद को लेकर चर्चा शुरू हुई है। हालांकि, उनके चयन को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुर्मी समाज को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

इसी तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीएल वर्मा और राजवीर सिंह जैसे पुराने प्रभावशाली चेहरों को सूची से बाहर रखने और धर्मपाल सिंह को मौका देने को लेकर भी राजनीतिक हलकों में अलग-अलग आकलन किए जा रहे हैं।

2027 और 2029 पर नजर

राज्यसभा के प्रत्याशियों का चयन ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। सूची में सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठन से जुड़े चेहरों को जगह मिलने से इसे आगामी चुनावों के व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।

हालांकि, इन फैसलों से चुनावी स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।

बेबाक24 टेक

भाजपा की राज्यसभा सूची में सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक पृष्ठभूमि दोनों पर जोर दिखाई देता है। 8 प्रत्याशियों के चयन के जरिए पार्टी ने अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है, जबकि 2027 और 2029 के चुनावों को देखते हुए इस सूची के राजनीतिक संदेश पर भी नजर रहेगी।



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